सोमवार, 11 दिसंबर 2017

Facebook Video Monetization क्या है, इससे पैसे कैसे कमायें?

दिसंबर 11, 2017 0
Facebook-Video-Monetization
यदि आप एक youtube creator है तो आप video बना कर youtube से पैसे कमा रहे थे. लेकिन अब youtube को टक्कर देने के लिए facebook ने अपना Facebook Video Monetization Service launch कर दिया है.

जिसका इस्तेमाल कर के आप भी youtube की तरह facebook सभी पैसे कमा सकते है. अभी कुछ समय पहले ही facebook ने  Facebook Instant Article Service launch किया है.

लेकिन Article monetization service के बाद Facebook ने Video Monetization Service launch कर दिया. जिससे यदि आप एक facebook यूजर है और video बना सकते है तो आप इसके द्वारा अब अपने video से facebook से भी पैसे कमा सकते है.

Facebook Video Monetization क्या है?


जिस प्रकार से Youtube एक video sharing platform है. ठीक उसी तरह से Facebook ने एक Facebook Creators नाम का एक Video Sharing Platform launch किया है.

 Facebook Creators Platform यानी अब इस platform के द्वारा  कोई भी Creators यानि आप Video Upload करके और Facebook Ad Network से Monetize करके पैसा कमा सकते है.
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facebook page कैसे बनाये ?
आपका facebook profile कौन देखता है?

Facebook Creators platform को ज्वाइन कैसे करे?

यदि आप चाहते है की आप फसबूक्पर video upload करके पैसे कमाए तो आप को इसके लिए Facebook Creators Video sharing Platform को Join करना होगा. इसमे register होने के लिए आपके पास facebook page और app id होना चाहिए.

चलिये अब  बताते है की आप Facebook Creators Platform में register कैसे हो सकते है.

Step #1- 

यदि आपके पास facebook account नहीं है तो आप पहले facebook account बनाये. और इसका एक facebook page  बनाये.

Step #2- 

यदि आपके पास पहले ही facebook page है तो आप को इस पेज में कुछ बदलाव करने होंगे उसके बाद ही आप इस facebook Creators Community को ज्वाइन कर पाएंगे.

इसके लिए पहले आप अपने facebook page को ओपन करें.

Step #3- 

फिर setting >edit page में जाए.
facebook-video-monetization
facebook-video-monetization-2

अब यहाँ पर जो Template section है, वहा पर आप उस template को edit कर video creator कर दें.
facebook-video-monetization-3
facebook-video-monetization-4


अब आप facebook Creators Communityको join करने के लिए बिलकुल तैयार है.

Step #4-

facebook Creators Community को आप दो तरीके से ज्वाइन कर सकते है.

पहला  तरीका है facebook creators app के द्वारा और दूसरा तरीका है facebook creators website के द्वारा. लेकिन अभी creators app सिर्फ iOS के लियेही उपलब्ध है.

यह अभी Android users के लिए launch  नहीं हुआ है, लेकिन बहुत जल्द ही यह लांच होने वाला है.

तो आप facebook creators website पर क्लिक करें, और इसे ओपन करें.
facebook-creators-community

Step #5- 

जब website ओपन हो जाए तो Sign in with Facebook button पर click करे.
facebook-creators-community-join

Step #6-


अब आप यहाँ पर account और video से जुड़े सभी सूचनाओ को अच्छी तरह से fill up करें.
जैसे की आप किस तरह की video बनायेंगे.
facebook-creators-community-join-form

क्या आप part टाइम बनायेंगे या फुल टाइम या video बनाना आपका हॉबी है,केवल फन के लिए बनाते है.
यदि आप चाहे तो इसके साथ अपने सभी Instagram, Youtube, Twitter जैसे सभी Social Media Profile को Connect कर सकते है.

ये सभी Information दर्ज करने के बाद Let’s do this button पर click करे.
facebook-creators-community-join-form-2

Step #7-

  Let’s do this button पर click करते ही Facebook creators Registration complete हो जायेगा.
और अब आप facebook के लिए video बनाकर और उसे monetize करके पैसे कमा सकते है.
facebook-creators-community-join-sucessful

फ़िलहाल मैंने भी Facebook Creators Community join कर लिया है. और कोशिश यही करूंगा इस पर डेली video upload करू.
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Cyber Bullying Kya hota hai?
fake facebook account को कैसे पहचाने?

Conclusion

youtube का इस क्षेत्र में एक छत्र राज है, और video sharing का बेताज बादशाह है, और अपने पालिसी को बदल कर लाखो creator को परेशान कर दिया है.  लेकिन देखना यह है कि क्या facebook video sharing के क्षेत्र में भी सफल हो पता है,या नहीं.

यदि आप भी चाहते है की facebook से video sharing करके पैसे कमाए तो आप भी तुरंत ही इसे ज्वाइन कर लें.

मुझे उम्मीद है की आप लोगो को आज का यह पोस्ट Facebook Video Monetization क्या है, इससे पैसे कैसे कमायें? जरुर पसंद आया होगा. इसे social media, facebook, twitter, googlePlus पर जरुर शेयर करें. ताकि और्लोग भी  इससे लाभ उठ सके.

Input device kya hota hai, aur yah kitne prakar ka hota hai?

दिसंबर 11, 2017 0
Input-device

दोस्तों आप सब कंप्यूटर का इस्तेमाल तो करते ही होंगे,  लेकिन क्या आप जानते है की Input device kya hota hai, aur yah kitne prakar ka hota hai?
आप लोगो मे से बहुत से लोगो को यह पता नहीं होगा की आखिर यह input device क्या होता है. आज हम बात कर रहे है computer के उन external part की जिनके द्वारा computer यूजर से निर्देशों को ग्रहण करता है.
आज के इस दौर में लगभग सभी लोग computer, desktop, laptop, mobile , internet का इस्तेमाल करते है. लेकिन इनमे से  कुछ ऐसे लोग भी होंगे जिन्हें यह नहीं पता होगा की यह input device क्या है?
तो चलिये जानते है की इनपुट डिवाइस क्या है?

Input Device क्या है? input devices definition in Hindi

वे devices जिनके द्वारा किसी computer में user के निर्देशों को डाला जाता है. input device कहलाते है.
इनपुट device का मुख्य कार्य user और computer के बीच संपर्क की सुविधा देता हैऔर साथ ही उसे कंट्रोल करने की सुविधा भी देता है.


example of Input devices

  1. Keyboard
  2. Mouse
  3. Joystick
  4. Trackball
  5. Light pen
  6. Touch screen
  7. Web Camera / Digital Camera
  8. Scanner
  9. Bar Code Reader
  10. Microphone

Input Device के प्रकार

Keyboard

यह एक प्राइमरी input device है, यह देखने में कुछ टाइपराइटर के कीबोर्ड की तरह होता है, और computer के सारे लिखने वाला कार्य इसी के द्वारा संपन्न होता है.
इसमें लगभग 108 Keys होती हैं. Keyboard  में कई प्रकार की कुंजियाँ (Keys) होती है जैसे- अक्षर (Alphabet), नंबर (Number), चिन्ह (Symbol), फंक्शन की (Function Key), एर्रो की (Arrow Key) व कुछ विशेष प्रकार की Keys भी होती हैं.
keyboard दो प्रकार के होते है.

  1. Normal or wired keyboard
  2. Wireless keyboard

Normal or wired keyboard

यह keyboard भी दो प्रकार का होता है.
PS2 type- यह computer के पीछे PS2 पोर्ट से जोड़ा जाता है. लेकिन यह पोर्ट सिर्फ desktop computer में ही होता है. इस प्रकार के keyboard का इस्तेमाल लैपटॉप में नहीं किया जा सकता है.
USB keyboard - इस प्रकार के keyboard computer के USB port से जोड़े जाते है और और इस प्रकार के कंप्यूटर का इस्तेमाल लैपटॉप मे भी किया जा सकता है.

Wireless keyboard

इस प्रकार के keyboard को connect करने के लिए किसी वायर की जरुरत नहीं होती है, यह computer या laptop के साथ ब्लूटूथ या wifi की मदद से connect हो जाता है.
इस keyboard की यह खासियत होती है कि इसके द्वारा आप दूर से भी काम कर सकते है.
Keyboard के संरचना के आधार पर Keyboard  के keys को 6 भागो में बात सकते है.

  1. एल्फानुमेरिक कुंजियाँ (Alphanumeric Keys)
  2. न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad)
  3. फंक्शन की (Function Keys)
  4. विशिष्ट उददेशीय कुंजियाँ (Special Purpose Keys)
  5. मॉडिफायर कुंजियाँ (Modifier Keys)
  6. कर्सर कुंजियाँ (Curser Keys) या Movement Keys
input-device-keyboard-infograpic

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एल्फानुमेरिक कुंजियाँ (Alphanumeric Keys)

Alphanumeric Keys में Alphabets (A-Z), Number (0-9), Symbol (@, #, $, %, ^, *, &, +, !, = ), होते हैं.  सभी प्रकार की टाइपिंग इसी के द्वारा  की जाती है.

न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad)

न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad) में लगभग 17 कुंजियाँ होती हैं| जिनमे 0-9 तक के अंक, गणितीय ऑपरेटर (Mathematic operators) जैसे- +, -. *, / तथा Enter key होती हैं .

फंक्शन की (Function Keys)

keyboard के सबसे ऊपर संभवतः ये 12 Function Keys होती हैं| जो F1, F2……..F12 तक होती हैं. ये keys  निर्देशों को shortcut  के रूप में प्रयोग करने में सहायक होती हैं. इन Keys के कार्य software के अनुरूप बदलते रहते हैं.

Special Purpose Keys

Sleep, Power, Volume, Start, Shortcut, Esc, Tab, Insert, Home, End, Delete, इत्यादि. ये keys कुछ विशेष कार्यों को करने के लिये प्रयोग की जाती है.

Modifier Keys

SHIFT, ALT, CTRL को modifier keys कहते है, क्योकि  इनको अकेले  दबाने का कोई खास इस्तेमाल नहीं होता है, परन्तु जब अन्य किसी keys  के साथ इनका प्रयोग होता हैं तो ये उन keys के इनपुट को बदल देती हैं.

Cursor Keys या Movement Keys

ये चार प्रकार की Keys होती हैं UP, DOWN, LEFT तथा RIGHT.  इनका प्रयोग करके कर्सर को स्क्रीन पर मूव किया जाता है.


Mouse -

इस समय सबसे प्रचलित input device mouse ही है. यह एक pointing device है जिसके द्वारा windows के सभी version के menu को ओपन करने के साथ ही graphics या चित्र को बनाने में इस्तेमाल किया जाता है.
जबसे mouse का इस्तेमाल computer में शुरू हुआ computer को ऑपरेट करना काफी आसन हो गया है.
mouse 2 बटन और 3 बटन वाले होते है. और mouse को मूव करने पर computer का पॉइंटर या कर्सर मूव करता है. और बटन को दबाने पर signal computer को भेज देता है.

Work of Mouse

  • क्लिकिंग (Clicking)
  • डबल क्लिकिंग (Double Clicking)
  • दायाँ क्लिकिंग (Right Clicking)
  • ड्रैगिंग (Dragging)
  • स्क्रोलिंग (Scrolling)

Kind of Mouse (Mouse के प्रकार )

  1. Mechanical Mouse
  2. Optical Mouse
  3. wireless Mouse

Mechanical Mouse
इस mouse में मूवमेंट के लिए निचे की तरफ एक रबर ही गेंद होती है, और जब वह अन्दर घुमती है माउस के अंदर गेंद के घूमने से उसके अंदर के सेन्सर्स (Censors) कंप्यूटर को संकेत (Signal) देते है.

Optical Mouse
इसमें लेज़र किरणे mouse के  नीचे की सतह से उत्सर्जित होती है,  जिसके परिवर्तन के आधार पर यह ऑब्जेक्ट (Object) की दूरी, तथा गति तय करता है, और इसके आधार पर ही कर्सर का मूवमेंट  होता है.

wireless Mouse
यह सारे काम optical mouse को तरह ही करता है, इसमे यही अंतर है की यह computer से बिना किसी तार radio frequency के द्वारा कनेक्ट होता है, और कर्सर को कंट्रोल करता है.

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Scanner

Scanner भी एक input device है, इसके द्वारा किसी images या लिखे हुये टेक्स्ट यानि documents को सीधे ही computer में input कराया जाता है.  यह स्कैनर भी दो तरह के होते है.

  1. HandHeld Scanner 
  2. FlatBed Scanner.

Microphone

इसके द्वारा sound को digital format में बदल कर computer में store कर सकते है,या सीधे speaker के जरिये output कर सकते है. Microphone का इस्तेमाल video recording, audio recording में किया जाता है.

JoySticks

इसका अधिकांश इस्तेमाल video game खेलते समय किया जाता है.  इसके अलावा CAD design, में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसमे दो बाल लगे होते है, और इन बाल ऊपर एक छड़ी लगी होती है.
जैसे ही छड़ी को घुमाते है, तो उससे बाल घुमाता है, जिससे सेंसर बॉल्स के मूवमेंट के अनुसार signal computer को भेजता है. और इससे game में किसी कैरक्टर को कंट्रोल किया जाता है.

LightPen

यह देखने मे बिल्कुल किसी पेन की तरह होती है. यह भी mouse की तरह एक pointing device है. इसके computer स्क्रीन पर सिधे ही किसी चित्र को बनाया जा सकता है,या कोई टेक्स्ट  लिखा जा सकता है.


Touch Screen

आज के समय का यह बहुत ही प्रचलित input device है. इसे एक pointing device और keyboard दोनों की तरह इस्तेमाल कर सकते है.  इसका इस्तेमाल ATM ,smartphone, Tablet आदि में होता है. यह computer screen के साथ  जुडी होती है.
यदि किसी user को computer की कोई विशेष जानकारी नहीं है तब भी वह इसके इस्तेमाल से अपने कुछ सामान्य कार्यो को निपटा लेता है.
जैसे सभी यूजर को computer की जानकारी नहीं होती है, तब भी यूजर ATM से पैसे बहुत आसानी से निकाल लेते है.

Conclusion

आज की दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है, और हर रोज एक नै technology आ रही है. भविष्य में input device की high tech होते जा रहे है. जैसे की laser keyboard आ गए है, जिसके द्वारा आप किसी समतल सर्फेस पर उसे प्रोजेक्ट कर के उसे एक keyboard की तरह से इस्तेमाल कर सकते है.
अब mouse भी ऐसे आ गये है जिन्हें हाथ में पहन  कर इस्तेमाल किया जा सकता है. और उंगली की मूवमेंट के कर्सर को कंट्रोल किया जा सकता है.
मुझे उम्मीद हैकि आप लोगो को आज का यह पोस्ट Input device kya hota hai, aur yah kitne prakar ka hota hai? जरुर पसंद आया होगा. अगर अभी भी कोइ सवाल हो तो आप कमेंट बॉक्स के जरिये हमसे पूछ सकते है. यदि आपने अभी तक हमारे blog को सब्सक्राइब नहीं किया है तो इसे जरुर subscribe करें.

रविवार, 10 दिसंबर 2017

google files go app से Phone का Storage Space कैसे Free करे?

दिसंबर 10, 2017 0
google-files-go-app
दोस्तों आज हम आप लोगों को एक ऐसे software, google files go app के बारे में बताने वाले है, जिससे आप अपने फ़ोन के कचरा को बड़ी ही आसानी से साफ़ कर सकते है.
बहुत से ऐसे एंड्राइड user होंगे जिनका फ़ोन स्लो हो गया होगा, जिससे बार बार फ़ोन के हैंग होंगे से परेशान होंगे, और आपके फ़ोन के Memory Card या Internal Storage का Problem का स्थाई समाधान हो सकता है.
इस App को Google ने Android phone को Optimize करने के लिए बनाया है.
वैसे तो google ने इसे android oreo के लाइट version android goके लिए बनाया है. लेकिन यदि आपके पास android lolipop 5.0 या इससे ऊपर के वर्शन है तो आप इसका इस्तेमाल जरुर कर सकते है.

Files Go App kya hai?

दरअसल Files Go एक Phone Storage Manager App है. जो फ़ोन के internal  और external दोनों memory को manage करता है. इसकी सहायता से आप अपने फ़ोन के space को free कर सकते है, इसके साथ ही आप duplicate files को delete भी कर सकते है.
इस files go app में Data backup, File Sharing और Smart Recommendation जैसे Feature भी मिलते है. किसी भी mobile cleaner app के सभी feature इसमे मिलते है.

Phone का storage Space कैसे Free करे?

फ़ोन के स्टोरेज space को free करने के लिए सबसे पहले आप इसे google play store से इसे इंस्टाल करें.
इनस्टॉल करने के बाद जैसे ही आप इसे ओपन करेंगे files go का Smart Recommendation Feature आपके फ़ोन के सभी unwanted Storage के बारे में जानकारी दे देगा और आप इसके Home Screen से ही सभी Duplicate Files और Unwanted Files को Remove करके storage Space को Free कर सकते है.

आप files go की सहायता से अपने app storage को भी manage कर सकते है. जैसे की कोई भी app कितना मेमोरी इस्तेमाल कर रहा है, cache में कितना memory use कर रहा है. और इस cache memory को clear करके फ़ोन के performance को बढ़ा सकते है.
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google Files Go में  File Sharing और Storage Cleaner दोनों एक साथ 

अभी तक आप File Sharing और Storage Cleaner के लिए दो app का इस्तेमाल कर रहे थे. लेकिन यदि आप अपने फ़ोन में files go को इंस्टाल कर लिया तो इस एक ही app की मदद से आप Phone का Space भी free करने के साथ ही एक फ़ोन से दुसरे फ़ोन ,में  file भी transfer कर सकते है.
कई बार ऐसा होता है की हम कोई app इंस्टाल करते है, और बाद  में जरुरत ख़तम हो जाती है तो उसे uninstall कर देते है. लेकिन हम यह भूल जाते है कि उस app की कुछ files, Phone में save रहता है और इससे Phone सही से काम नहीं करता है.

लेकिन यदि हम अपने फ़ोन में इस google files go का use करते है, जो एक storage manager भी है तो हम uninstall app के सभी files को भी delete कर सकते है.
जिससे हमारे फ़ोन की स्पीड और performance बढ़ जाएगी.
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Conclusion

यदि आप यह चाहते है की आपके फ़ोन की performance बढ़ जाये और Phone Storage manage भी हो जाए तो आप को इसे अपने फ़ोन में जरुर इनस्टॉल करना चाहिए.
play store से अभी तक 10 लाख से भी ज्यादा लोगो ने downloads कर लिया है. और इसका rating 4.6 star है.
मुझे उम्मीद है की आज का यह पोस्ट google files go app से Phone का Storage Space कैसे Free करे? आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. इसे आपप्नेमित्रो के साथ जरुर शेयर करें ताकि वह भी अपने फ़ोन की  performance को बढ़ा सके और phone storage को manage कर सके.

शनिवार, 9 दिसंबर 2017

Output devices kya hota hai (क्या होता है)

दिसंबर 09, 2017 0
Output-Devices-kya-hota-hai
दोस्तों आज हम आप लोगो को बताने वाले है की Output devices kya hota hai (क्या होता है)? मैंने अपने पिछले पोस्ट में आप लोगो को बताया कंप्यूटर क्या है.
लेकिन आज बताने वाले है की computer output devices क्या है? चुकी एक कंप्यूटर या कोई डिजिटल डिवाइस बिना किसी output devices के बिना पूर्ण नहीं बन सकती है.
इसीलिए लगभग सभी digital devices में एक या कई output devices जुड़े होते है. आज हम कंप्यूटर के output devices के बारे में जानेंगे.

Output devices kya hai? or Output Devices in Hindi


किसी भी कंप्यूटर से जुड़े वे सभी devices जो किसी प्रोसेस हो चुके डाटा की जानकारी की हार्ड कॉपी या सॉफ्ट कॉपी को यूजर को दिखाती है. output devices कहलाते है.
जैसे - Monitor, Printer, Speaker आदि.

1- Computer Monitor

कंप्यूटर के प्रोसेस हुए डाटा को हम अपने मॉनिटर स्क्रीन पर देखत है, और यह computer का एक बहुत आवश्यक devices है.
यदि यह न रहे तो कंप्यूटर पर काम करना मुश्किल हो जायेगा. क्योकि हमारा कंप्यूटर को काम करेगा लेकिन हम यह नहीं जान पाएंगे की कंप्यूटर पर काम क्या हो रहा है.
मॉनिटर मुख्यत: do प्रकार के होते है.
1- CRT MOnitor
2- TFT Monitor

1- CRT Monitor

अब इस समय इस प्रकार के computer monitor नहीं आ रहे है. यह पुराने टीवी के जैसा दीखता था, और इसमें cathod ray tube का इस्तेमाल होता था, यही कारण है की इसे CRT monitor कहते है.

2- TFT Monitor

आज कल यही monitor लगभग सभी कंप्यूटर के साथ देखने को मिल रहा है. यह monitor CRT monitor से हल्का, कम विद्युत खर्च करने वाला, काफी बेहतरीन मॉनिटर होता है. अब इसमे भी कई प्रकार के मॉनिटर आ रहे है.
जैसे - LCD Monitor, LED Monitor आदि

2-Printer -

मॉनिटर पर दिखाई दे रहे किसी भी मैटर की किसी कागज पर प्रिंट आउट लेने के लिए प्रिंटर का इस्तेमाल किया जाता है. यह भी एक प्रमुख आउटपुट डिवाइस है.
कार्य और क्षमता के अनुसार प्रिंटर 3 प्रकार के होते है.
1- Dot Matrix printer
2- Inkjet Printer
3- Laser printer

1- Dot Matrix printer

इस प्रकार के प्रिंटर में रिदन का इस्तेमाल होता है. यह एक सिंगल कलर प्रिंटर है, इसकी प्रिंट की quality और स्पीड काफी कम होती है. लेकिन इसमे प्रिंटिंग का खर्च बहुत ही कम आता है.
अब इस प्रकार के प्रिंटर का इस्तेमाल बहुत कम हो गया है. अब यह प्रिंटर कुछ बांको में शायद मिल जायेंगे.
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2- Inkjet Printer

यह प्रिंटर अक्सर रंगीन प्रिंटिंग के लिए इस्तेमाल किये जाते है. लेकिन इनके प्रिंटिंग का खर्च ज्यादा आता है. यह ऑफिस इस्तेमाल में बहुत ही कम उसे किये जाते है. लेकिन
इनका इस्तेमाल photo printing में ज्यादा किया जाता है. इनकी प्रिंट quality और स्पीड बेहतर होता है. आज कल इसमें आल इन ओने टाइप के प्रिंटर आ रहे है , जो scan, print और फोटोकॉपी भी करने में सक्षम होते है.

3- Laser printer

यह भी रंगीन और मोनो दोनों प्रकार के आते है लेकिन इसमे ज्यादा सफल मोनो प्रिंटर ही हुआ है. लेज़र प्रिंटर थर्मल टेकनिक पर काम करता है.
इसकी प्रिंट की quality और स्पीड अब तक से सभी प्रिंटर से जयादा होती है.  यह भी आल इन ओने टाइप में आ रहे है जो प्रिंट के साथ फोटोकॉपी और scan करने में भी सक्षम होते है.

3- Speaker

यदि आप अपने कंप्यूटर पर म्यूजिक या मूवीज का आनद लेना चाहते है तो आपको अपने  कंप्यूटर के साथ एक अच्छी quality का स्पीकर भी रखना होगा. क्योकि आप अपने कंप्यूटर के साउंड को इसी स्पीकर से ही सुन सकते है.
इसे भी एक मुख्य output devices में गिना जा सकता है.

Output Device के नाम या Output Devices के 10 उदाहरण (example)


  1. Computer Monitor(CRT Monitor, TFT Monitor, LED Monitor, LCD Monitor )
  2. Printer (Dotmatrix, Inkjet, Laser Printer)
  3. Plotter
  4. Speaker
  5. Projector
  6. TV
  7. HeadPhones
  8. GPS (Global Positing System)


Conclusion

computer के  output devices की आवश्यकता लगभग सभी कंप्यूटर में या डिजिटल diveces में होती है जैसे की यदि हमारा मोबाइल हो है तो टच इसका इनपुट devices है और दिस्पली इसका ओउतपुर devices है.
यदि हम बात करे एक कैलकुलेटर की जो की एक बहुत छोटा डिजिटल devices है, तो इसमे भी इनपुट devices और output devices है. जिनके जरिये हम इसमे डाटा को enter करते है और उसका रिजल्ट देख पाते है.
मुझे उम्मीद है की आप लोगो को आज का पोस्ट जरुर पसंद आया होगा, इसे आप अपने  मित्रो के साथ  जरुर शेयर करें.

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

secure password kaise banaye(कैसे बनाये)?

दिसंबर 08, 2017 0
secure-password-kaise-banaye
दोस्तों आज हम आप लोगो को बताने वाले है, की आप अपने किसी भी account के लिए secure password kaise banaye(कैसे बनाये)? क्योकि यदि आप का password strong नहीं है तो आप यह भी जान लीजिये की आप का account भी secure नहीं है.
आप सभी gmail, facebook.com, twitter.cominstagram.com आदि social sites का इस्तेमाल करते होंगे. लेकिन सबसे जरुरी है की यह सभी account किसी भी हैकर से बचा रहे.और account तभी किसी भी हैकर से बचा रह सकता है जब उसका password को strong बनाया जाये.
अब आप सोच रहे होंगे की strong password कैसे बनाया जाये. तो इसके लिए आज का यह पोस्ट आप सभी पूरा पढ़े.

 Strong Password और  Secure Password में अंतर 



Normal password

जब आप अपने account को secure करने के लिए password के लिए अपने मोबाइल नंबर, date of birth, या वाइफ का नाम, गर्लफ्रेंड का नाम, या अपने किसी फॅमिली मेम्बर कानाम का इस्तेमाल करते है.
इसप्रकार के password  को हैक करना  बहुत ही आसान होता है. 65% इन्टरनेट यूजर normal password को ही इस्तेमाल करते है. केवल 25 % user strong password का इस्तेमाल करते है.

Strong Password

अब बात आती है की strong password क्या है?  strong password वो है जिसमे आप अल्फाबेट, नंबर और कुछ स्पेशल सिम्बल का इस्तेमाल करते है.
जैसे आपने अपने account के लिए एक password बनाया - yogi 1234@ इस प्रकार के password  को आप strong password तो कह सकते है,लेकिन यह password एक secure password नहीं है.

secure password 

secure password कुछ कुछ strong password की तरह ही होता है, लेकिन वो देखने और हैक करने में आसान नहीं होता है. यह password भी अल्फाबेट, नंबर और कुछ स्पेशल सिम्बल का इस्तेमाल करके ही बनाया जाता है,लेकीन तरीका कुछ   अलग होता है.
जैसे - Y09!ku$h अब इस password में मैंने कैपिटल लेटर, स्माल लेटर, स्पेशल कैरक्टर, नुमेरिक कभी इस्तेमाल भी किया है. 
अब यहाँ पर मैंने Y कैपिटल में लिखा और o की जगह पर मैंने 0 जीरो का इस्तेमाल किया g की जगह पर 9 का इस्तेमाल किया, i की जगह पर ! का इस्तेमाल किया , और s की जगह पर $ इस्तेमाल किया.
password की security के लिए इस प्रकार के password ही safe है.


Secure Password kaise banaye (कैसे बनाये )

secure password बनाना कोई बहुत मुस्किल का काम नहीं है. यदि आप कुछ बातो का ध्यान रखे तो आप काफी secure password बना सकते है.


#password strength 

आप जब भि कोई password create करे तो इस बात का हमेशा ध्यान दे की password strength कम से कम 8 से 10 वर्ड की तो जरुर हो.
आप जितना लम्बा चाहे उतना लम्बा password create कर  सकते है लेकिन  इतना लम्बा भी नहीं की आप उसे भूल जाए.

#कई account के लिये एक ही password का इस्तेमाल न करें 

बहुत से लोग  password जल्दी भूल जाते  है. इसकी वजह से वे अपने सभी अकाउंट के लिए एक ही password को  इस्तेमाल करते है.
यदि आप भी ऐसे कर रहे है तो इसे आज  ही बंद कर दीजिये, क्योकि यदि कोई आपके एक account के password को जान गया तो वह आपके सभी account पर  उसे आजमा कर उसे ओपन कर सकता है.
तो आप एक ही password को सभी account में इस्तेमाल करने से बचे.

#password complexity

यदि आप अपने password की complexity को बनाये रखते है तो आपका password एक secure password बन जायेगा.
इसके लिए आप अपने password में अल्फाबेट, नंबर और कुछ स्पेशल सिम्बल का इस्तेमाल कर सकते है,और Yogikush को कुछ इस प्रकार से Y09!ku$h लिख कर भी एक secure  password बना सकते है.

#password generator का इस्तेमाल न करें

यदि आप अपने password को create करने के लिए किसी password generator का इस्तेमाल करते है तो आप ऐसा करने से बचे, क्योकि इस प्रकार से generate किये गए password को dictionary attack से हैक किया जा सकता है.
मेरा यदि राय है कि आप किसी भी प्रकार के strong password generator, secure password generator, password checker ,password tester  का इस्तेमाल ना करें और अपना password खुद ही बनाये.

#Phone Number With Verification

यदि आप जिस साईट पर अपना account बना रहे हैवो आपको फ़ोन नंबर वेरिफिकेशन की सुविधा दे रही है तो इसे जरुर इस्तेमाल करें.
gmail इस प्रकार की सुविधा दे रही है, जैसे ही इसमे आप लॉग इन करने के लिए password डालेंगे वैसे ही आप के मोबाइल नंबर पर एक कोड आएगा और जब आप उस कोड को डालेंगे तभी आपका account ओपन होगा.
इस प्रका की सुविधा बैंक की साईट से भी मिल रही है, और आप इसका इस्तेमाल जरुर करें क्योकि यह आपके password के साथ आपके account को भी secure रखेगा.

Conclusion

आज कल password हैकिंग क्राइम इतना ज्यादा हो गया है कि यदि आप एक secure password नहीं रखते है तो आपका account भी हैक हो सकता है.
इससे पहलेकी आपका  account हैक हो आपपने password को secure कर लें.
मुझे उम्मीद है कि मेरे बताये गये सुझाव का इस्तेमाल करके आप अपने account के लिए एक secure password को create कर सकते है.
मेरा आज का यह पोस्ट secure password kaise banaye(कैसे बनाये)? आप लोगों को जरुर पसंद आया होगा. इसे आप अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करें और यदि आपको secure password के बारे कोई भी सवाल पूछना हो तो आप अपने सवालों को कमेंट बॉक्स के जरिये पूछ सकते है.

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

SEO vs SEM me kya antar hai (क्या अंतर है ?)

दिसंबर 07, 2017 0
SEO-vs-SEM
दोस्तों आप सब SEO (search engine optimization) के बारे में तो जानते ही है. लेकिन क्या आप जानते है कि SEM (search engine marketing) क्या होता है? और यह सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन से कैसे भिन्न है.
यदि आपके ब्लॉग या वेबसाइट का डिजाईन बहुत ही बेहतर है, और उस  पर आपने high quality content भी लिखे है. लेकिन यदि आपके ब्लॉग या वेबसाइट पर traffic नहीं है तो आपका ब्लॉग का कोई मायने नहीं है.
SEO & SEM दोनों ही ब्लॉग या वेबसाइट पर traffic लाने के लिए marketing  के दो महत्वपूर्ण तंत्र हैं.

SEO (search engine optimization) क्या होता है ?



सर्च इंजन से free आर्गेनिक ट्रैफिक प्राप्त करने के लिए पेज को किसी खाश keyword के हिसाब से ऑप्टिमाइज़ करना ही SEO (search engine optimization) कहलाता है.
गूगल ने SEO algorithms में change करके  सर्च इंजन को और भी ज्यादा स्मार्ट बनता जा रहा है.  लेकिन पूरा SEO दो केटेगरी में बंटा हुआ है.
  1. On-Page SEO
  2. Off -Page SEO

1- On Page SEO 

इसमे निम्न चीज़ सामिल होते है.
  • Optimized Meta data,जिसमे  page title tag भी शामिल होता है, Meta description, heading tags, और  image ALT tag, जो  target keywords को शामिल किये होता है.
  • Well-written और  optimized page जो  target keywords को शामिल किये हुये होते है.
  • Simple और  well-formatted page URLs जिसमे  selective keywords होते है.
  • content के साथ Social sharing integration भी होता है.

2- Off -Page SEO

  • high quality backlinks, जो ब्लॉग या वेबसाइट के पेज को सर्च इंजन में मेजोरिटी प्रदान कर सके.
  • किसी ब्लॉग या वेबसाइट का traffic social media पर sharing से बढ़ाना. social signal कहलाता है जो off page seo के अंतर्गत आता है.
  • Reddit, Digg, Stumbleupon जैसी सामाजिक बुकमार्किंग साइटों से visitor का ध्यान आकर्षित करना.
  • SEO search engine optimization, On-page और  Off-page के माध्यम से होता रहता है, जिससे नए विजिटर ब्लॉग या वेबसाइट की तरफ आते है. 
SEO के लिए मुख्यत: एक high quality content होना जरुरी है, जिसके द्वारा सर्च इंजन विजिटर को आकर्षित कर सके.
How to Create a Blog in Hindi (ब्लॉग कैसे बनायें)
Public Domain Content kya hota hai(क्या होता है), इससे पैसे कैसे कमायें ?

Search Engine Marketing (SEM) क्या होता है?

किसी सर्च इंजन में paid advertisement के द्वारा सर्च इंजन रिजल्ट पेज (SERP) में किसी keyword के द्वारा डिस्प्ले होना SEM search engine marketing कहलाता है.
दुसरे और सरल शब्दों में कह सकते है कि किसी भी सर्च इंजन के द्वारा paid traffic प्राप्त करना ही Search Engine Marketing (SEM) कहलाता है.
इस प्रकार के विज्ञापन को pay per click(PPC) के नाम से भी जाना जाता है.
search engine marketing में cost-per-click (CPC) ads, paid search ads और  paid search advertising भी शामिल होता है.
  • PPC- Pay Per Click
  • PPC- Pay Per Call
  • CPC- Cost Per Click
  • CPM (cost-per-thousand impressions)
  • Paid Search Advertising
PPC(pay per click) advertising के द्वारा सर्च क्वेरी से मिलते जुलते keyword के द्वारा वेबसाइट के विज्ञापन को serp में शो करता है.
ये विज्ञापन orgenic listing के बगल में या इसके ऊपर search engine resultpage (SERP) में दिखाए जाते हैं, जो आपकी blog या वेबसाइट  को अपने वेब पेज की दृश्यता, लैंडिंग पेज, ब्लॉग ऑब्जेक्ट और ट्रैफिक  को बढ़ाने का अवसर देता है.
इस प्रकार से आये हुये ट्रैफिक को paid traffic के रूप में जाना जाता है.

SEO vs SEM , SEO  aur SEM me difference (SEO और SEM में अंतर)



  • SEO free of cost होता है. जबकि SEM एक paid service है.
  • search engine optimization के लिए on page और off page seo जरुरी होता है, जबकि SEM के लिए इनकी कोई जरुरत नहीं होती है.
  • SEO में सर्च क्वेरी के हिसाब से SERP में पोजीशन ऊपर निचे होती रहती है. SEM ranking पोजीशन को प्रभावित नहीं करता है.
  • search engine optimization के लिए high quality content की जरुरत होती है. जबकि SEM के लिए इसकी  जरुरत नहीं होती है.
  • SEO से आये हुए ट्रैफिक के लिए सर्च इंजन को कोई पैसा नहीं देना होता है. जबकि SEM से आये ट्रैफिक के लिए प्रत्येक click के लिए pay per click या cost per click के हिसाब से पैसा देना होता है.
  • यदि आप कोइ ब्लॉग या वेबसाइट को शुरू किये है और  चाहते है की वह तत्काल ही सर्च इंजन में शो होने लगे तो आपको SEM के द्वारा ही कर सकते है. SEO के द्वारा सर्च रिजल्ट में आने में कुछ समय लगता है.

SEO और SEM कौन सा आपके लिए बेहतर है ?

अब बात यहाँ पर यह आती है की कायं सी तकनीक आपके लिए  बेहतर है तो मेरा यह मानना है की यदि आप एक बिजनेसमैन है और आपके online तथा ऑफलाइन बिज़नस है तो आपके SEM के द्वारा उसे ऑनलाइन प्रमोट कर सकते है. और अपने सेल्स को बढ़ा सकते है.
लेकिन यदि आप एक blogger है तो आप के लिए SEO ही बेहतर होगा. लेकिन यदि आप चाहे तो SEM को भी आजमा सकते है. लेकिन यदि आप adsense का इस्तेमाल आप कर रहे है तो मेरा यदि सलाह होगा की आप SEM की बजाय SEO को अजमाए.
email tracker tool की जानकारी हिंदी में 
infographic क्या होता है?

Conclusion

SEO (search engine optimization) और SEM (search engine marketing) दोनो का अपना महत्व है, लेकिन इन दोनों ने सबसे बेहतर SEO है, जो आपके ब्लॉग  या वेबसाइट को आर्गेनिक traffic free में उपलब्ध करता है. बस जरुराथोती है आपको सही ढंग से अपने ब्लॉग के पेज को ऑप्टिमाइज़ करने की.
मुझे उम्मीद है की आप लोगों को आज का मेरा यह पोस्ट SEO vs SEM me kya antar hai (क्या अंतर है ?) जरुर पसंद आया होगा और आप अब यह अची तरह से  जान गए होंगे की SEO और SEM क्या होता है, और इनमे क्या अंतर है ? यदि यह पोस्ट पसंद आया हो तो इसे आप अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करें, और हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब जरुर करें

बुधवार, 6 दिसंबर 2017

Email Id Kaise Banate Hai (कैसे बनाते है?)

दिसंबर 06, 2017 0

दोस्तों आज हम आप लोगो को Email Id Kaise Banate Hai(कैसे बनाते है?) या create new email account in hindi के बारे में बताने वाले है.
दरअसल आज का यह पोस्ट मेरे उन विजिटर के लिए है, जो अभी कंप्यूटर और इन्टरनेट के मामले में नए है, और उनका अभी तक कोई भी email id नहीं है.
वैसे तो बहुत सी कंपनी email id बनाने की सुविधा देती है. जैसे gmail, hotmail.com, mail.yahoo.com, rediffmail.com
यह सभी कंपनी आपको free email id की सुविधा देती है. और इस समय सबसे ज्यादा स्टोरेज की सुविधा आपको gmail देता है. जो लगभग 15 GB होता है.
आज हम आप लोगों को gmail पर email id कैसे बनाते है, इसकी पूरी जानकारी के साथ बताने वाले है.
यदि आपको नया email id बनाना है,तो आप इसे जरुर पढ़े. लेकिन पहले यह जान लेते है की email id क्या होता है.?

email id kya hota hai (क्या होता है?)


ईमेल का मतलब होता है इलेक्ट्रॉनिक मेल (Electronic Mail) यानी की इन्टरनेट के माध्यम से  (internet medium)  या इन्टरनेट की मदद से एक जगह से दुसरे जगह पर  मेसेज (Message) या फिर किसी भी तरह का डाटा भेजना email  कहलाता है.
इस email को भेजने या मांगाने के लिए एक एड्रेस की जरुरत होती है उसे ही email id कहते है.
जिस प्रकार से हम पहले लेटर भेजते है , ठीक उसी प्रकार से हम email भी भेजते है. लेकिन दोनों में यह मुख्य अंतर यह है की लेटर को हम डाक से भेजते है  और email को इन्टरनेट के माध्यम से भेजे जाते है.
डाक से भेजे जाने वाले लेटर के लिए भी एड्रेस जरुरी है, और इन्टरनेट से भेजे जाने वाले email के लिए भी एड्रेस जरुरी है. जिसे email address कहते है.

Gmail  की मदद से ईमेल आईडी (Email id) कैसे बनाते है?

Step #1 - सबसे पहले आप अपने कंप्यूटर के ब्राउज़र में जाए और gmail.com को ओपन करें.
email-id-kaise-banaye-1
Step #2 -  क्रिएट अकाउंट (Create Account) पर क्लिक करे.
अब आप gmail.com को ओपन कर लिए तो अब आप More Option पर क्लिक करे और वहाँ पर लिखे  create account लिंक पर क्लिक करें.
email-id-kaise-banaye-2
Step #3- जैसे ही आप create account पर क्लिक करते है तो आपको सामने एक फॉर्म खुलेगा जिसमे आपको अपना नाम, पासवर्ड डालना है, उसके बाद ईमेल आईडी (email id) चुनना है.
लेकिन ध्यान रहे ईमेल आईडी एक दम अलग होना चाहिए नहीं तो यह आपको एक मेसेज दिखायेगा the username is take. try again इसलिए आपको ईमेल आईडी यूनिक डालना है यानि अलग उसके बाद पासवर्ड इत्यादि नीचे एक एक डिटेल्स बताया गया है की कैसे आपको फॉर्म भरना है.
email-id-kaise-banaye-3

Name -

name  बॉक्स के अंदर आपको आपको अपना नाम डालना है पहले बॉक्स में first ame  दुसरे बॉक्स मे अपना surname लिखें.

choose your username -


यहाँ पर आपको अपना user name डालना है yah username ही आपका email id होगा यह यूनिक होना चाहिए जिस तरह आपके मोबाइल का नंबर यूनिक है उसी तरह आप username  भी अलग होना चाहिए.
जैसे -  यदि आपका नाम yogendra  है और kushwaha आपका सर नेम है तो आपको यूजर नेम के अन्दर yogendrakushwaha  ऐसा कुछ डाले या फिर yogendrakushwaha123 इत्यादि डाले क्यों की यही आपका email id होगा जैसे आपके yogendrakushwaha123 डाला तो आपका ईमेल आईडी yogendrakushwaha123@gmail.com  होगा बस आपके यूजर नेम के बाद @gmail.com लग जायेगा.

Create Password-

यहाँ पर आपको अपना एक पासवर्ड बनाना होता है. आप इसी पासवर्ड की मदद से अपने email id को ओपन कर सकते है. आप अपने पासवर्ड में कम से कम 8 कैरक्टर रख सकते है.
जब भी  आप पासवर्ड बनाये तो इसमे capital aur small letters, numeric and कम से कम एक स्पेशल कैरक्टर जरुर डाले.
मान लीजिये की आपको अपना पासवर्ड बनाना है Yogekush तो आप इसे नुमेरिक शब्दों को मिलकर इस प्रकार से भी लिख सकते है. Y0g3ku$h.

Confirm Password

इस बॉक्स में आपको अपना वही पासवर्ड डालना है जो आपने create password में डाला है.

Birthday
यहाँ पर आपको अपना date of birth डालना होता है. आपका उम्र 18 साल से कम नहीं होना चाहिए.

Gender-

यह एक ड्राप down लिस्ट है जिसमे से आपको male, female को सेलेक्ट करना होता है. यदि आप किसी और केटेगरी में आते है तो आप other को सेलेक्ट कर सकते है.

Mobile Phone-

इस बॉक्स में आपको अपना मोबाइल नंबर डालना होता है. जिस पर gmail आपको एक OTP भेजेगा और आपके नंबर को वेरीफाई करेगा, और जब कभी आप अपने पासवर्ड को भूल जायेंगे तो आप इसी  मोबाइल नंबर की मदद से अपने पासवर्ड को रिकवर कर सकते है.

Your Current Email Address

यदि आपके पास कोई email id है तो आप उसे भी यहाँ डाल सकते है, ताकि बाद में आप इसे पासवर्ड को भूल जाने पर आप इससे उसे रिकवर कर सके.
इसे आप खालि भी छोड़ सकते है.

Location-

इस बॉक्स से आपको अपने देश को सेलेक्ट करना होता है. आप जिस देश में रहते हो उस को सेलेक्ट कर लीजिये.
पूरी डिटेल को एकबार दुबारा चेक कर लें और,
Step #4 - अब आप next Step बटन पर क्लिक करें.
Step #5 - अब I Agree पर क्लिक करें .
इस जैसे ही आप क्लिक करते है तो एक प्राइवेसी पालिसी का पॉप अप windows ओपन होता है. इसमे आपको agree पर क्लिक करना होता है.
email-id-kaise-banaye-4
Step #6 - अब आपको यहाँ पर continue to gmail बटन प् क्लिक करना होगा.
email-id-kaise-banaye-5
जैसे आप इस बटन पर क्लिक करते है तो आप अपने gmail account या यह कहे की अपने email account के अन्दर चले जायेंगे. जहा से आप किसी कभी email id पर मेल भेज सकते है और email माँगा सकते है.
email-id-kaise-banaye-6

blogger par documents kaise upload karen
ब्लॉग शुरू करने के best 50 टॉपिक्स 

Conclusion

अब आप् जान  गए होंगे की email id क्या होता है. और इसे free में कैसे बना सकते है. यदि कही कोई दिक्कत आये तो आप कमेंट बॉक्स के जरिये हमशे संपर्क करें. हमें आपकी सहायता करने में ख़ुशी होगी.
मुझे उम्मीद है की आज का यह पोस्ट Email Id Kaise Banate Hai (कैसे बनाते है?) आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा इसे अपने मित्रो के साथ social media पर जरुर शेयर करें. और ब्लॉग को सब्सक्राइब करना न भूले.

मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

how to find your monitor refresh rate kya hota hai (क्या होता है?)

दिसंबर 05, 2017 0
monitor-refresh-rate-1
दोस्तों जब भी आपको मॉनिटर खरीदना होता है तो आप यह सोचते है की इसकी साइज़ 20 इंच हो, 22 इंच  या 24 इंच हो. लेकिन क्या आपने कभी अपने monitor  की specification पर ध्यान दिया है की इसमे लिखा refresh rate क्या होता है?
जब कभी आप अपने monitor की refresh rate को देखे तो इसमे 50Hz, 60Hz, 120Hz, 144Hz लिखा होता है. क्या आपने कभी यह सोचा है की यह क्या है, या इसका क्या मतलब है. चलिये आज हम आपको इसी refresh rate के बारे में बताते है.

Monitor refresh rate kya hota hai (क्या होता है?)


monitor के refresh rate का सीधा सा मतलब यह होता है की आपका monitor 1 सेकंड में कितनी बार refresh होगा.
अर्थात यदि किसी monitor  का refresh rate 60 Hz है तो वह 1 सेकंड में 60 बार refresh होता है. या नए इनफार्मेशन के साथ 60 बार update होता है.
अब मान लेते है कि आप अपने कंप्यूटर पर कोई गेम खेल रहे है और आपका कंप्यूटर भी 60 Hz के हिसाब से signal भेज रहा है तो आपको गेम खेलने में  कोई दिक्कत नहीं होगी.
लेकिन यदि आप का कंप्यूटर काफी फ़ास्ट है और उस गेम को 120Hz पर भेज रहा है, और आपका monitor इससे  कम जैसे 60Hz refresh रेट का है तो आपका monitor बिच के कुछ फ्रेम को नहीं दिखा पायेगा.
इन्हें भी अवश्य पढ़े 

Simple monitor और Gaming monitor में अंतर

एक सिंपल monitor का refresh rate जहा 50Hz से 60Hz होता है वहीँ एक gaming monitor का refresh rate 120Hz से 144Hz होता है.
अब आप यह सोच रहे होंगे की आखिर gaming monitor की refresh rate इतना ज्यादा क्यों होता है.
इसका कारण यह है की  high end game को आपके कंप्यूटर के CPU और GPU high refresh rate पर आउटपुट करते है.
जिसके कारण उस गेम को खेलने के लिए आप को भी उस refresh rate के बराबर refresh rate वाले monitor होने पर ही उस गेम के सभी फ्रेम को अच्छी तरह से देख पाएंगे.


अपने monitor refresh rate को कैसे जाने ? how to check monitor refresh rate windows 10

  1. अपने monitor refresh rate जानने के लिए आप अपने desktop पर राईट क्लिक कीजिये.
  2. अब इसमे आप यहाँ पर dispaly setting पर क्लिक करें.
  3. अब आप यहाँ पर advance display setting पर क्लिक करें.
  4. यहाँ पर आपको display adapter properties पर क्लिक करें.
  5. अब जो windows ओपन हुई है उसमे monitor टैब पर क्लिक करें तो आपको अपने monitor का refresh rate मालूम चल जायेगा.
Monitor-refresh-rate

इन्हें भी अवश्य पढ़े 

Conclusion

जिस monitor का refresh rate जितना अधिक होता है, वह उतनी ही स्मूथली से किसी भी high end गेम्स को play कर देता है. यदि गेम और monitor के refresh rate में अंतर होता है तो वह गेम सही ढंग से कंप्यूटर में नहीं चल पता है.
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सोमवार, 4 दिसंबर 2017

Blog पर Traffic कैसे बढ़ाये how to increase traffic to your blog for free?

दिसंबर 04, 2017 0
Blog-पर-Traffic-कैसे-बढ़ाये-how-to-increase-traffic-to-your-blog-for-free
दोस्तों आज हम आप लोगो को blog की traffic बढ़ाने की 4 ऐसे तरीके बताने वाले है , जिसे यदि आप अपने डेली रूटीन में सामिल कर ले तो आप को एक सफल blogger बनने से कोई रोक नहीं  सकता है. इसीलिए मैंने यह आर्टिकल Blog पर Traffic कैसे बढ़ाये how to increase traffic to your blog for free ?आप लोगो के लिए लायें है.
मैंने अक्सर blogger से यह सुना है की 2 महीने हो गए, 3 महीने हो  गए  और अभी तक blog पर डेली 100 पेज व्यू ही हो रहे है. और बहुत कोशिश करने के बाद भी traffic नहीं बढ़ रही है.
यह समस्या लगभग हर blogger के शुरुवाती दिनों में जरुर आती है. और बहुत से blogger traffic नहीं बढ़ने के वजह से अपने blog को update करना छोड़ देते है. और निराश हो जाते है.

यदि आपभी उसी स्थिति में है तो आपको एक रणनीति की जरुरत है, और जो निश्चित रूप से आपके ब्लॉग ट्रैफ़िक में वृद्धि करेगी और आप 1,000 डेली पेज व्यू के अपने लक्ष्य्को प्राप्त कर लेंगे.
यदि आप यहाँ तक पहले ही पहुच गए है तो आपको यहाँ रूकना नहीं है, आप इसके आगेभी जरुर जा सकते है.
बस योजना के अनुसार 4 स्टेप को हर दिन करने के लिए सुनिश्चित करें और हर दिन ढाई घंटा खर्च करें (यदि आप के पास ज्यादा समय है तो आप इसी अनुपात में प्रतेक स्टेप पर जादा समय खर्च कर सकते है.)
pay per click advertisement क्या होता है?
keyword stuffing क्या होता है?

How to increase traffic to your blog for free in 4 Step (Blog पर Traffic बढ़ाने के 4 स्टेप)

Step 1- Killer Article (1 hour per Day)

आपका पहला स्टेप यह होना चाहिए की आप हर हप्ते एक बहुत ही बेहतरीन और टॉप  आर्टिकल अपने ब्लॉग पर पब्लिश करें, जिसे आप आप killer article भी कह सकते है, यदि आप के पास समय की कमी को तो आप हर 15 दिन में ऐसा किलर आर्टिकल जरुर पब्लिश करें.
अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा आर्टिकल कैसे लिखे, जिसे किलर आर्टिकल कहा जायेगा. दरअसल किलर आर्टिकल एक लम्बा और structured article होता है. जो अपने विजिटर को टॉपिक की सम्पूर्ण जानकारी देता है.
यदि आप का एक technology blog है तो आप technology who can change your life जैसे टॉपिक पर एक लम्बा आर्टिकल लिख सकते है.
लेकिन इस प्रकार केआर्टिकल लिखने के लिए प्रतिदिन कम से कम 1 घंटे का समय टॉपिक को खोजने और उसकी आउटलाइन तैयार करने के लिए जरुर निकाले.

Tips for writing a good article who increase traffic of  your blog

  • सबसे पहले टॉपिक्स की एक सूचि बनाये की आप किस विषय पर लिखेंगे. 
  • आप अपने विजिटर के लिए एक  विस्तृत टुटोरिअल लिख सकते है. कि -------- कैसे करें.
  • आप अपने ब्लॉग टॉपिक से जुड़े किसी  समस्या के समाधान के लिए आर्टिकल लिख सकते है. 
  • किसी ऐसे विषय पर आप डीप एनालिसिस लिख सकते है, जिस पर लोग केवल चर्चा कर रहे हो.
  • जब इस प्रकार के लेख आप्केब्लोग पर हप्ते या 15 दिन में आयेंगे तो आपका ब्लॉग धीरे धीरे लोगो के बीच फैलता जायेगा. 
How to Create a Blog in Hindi (ब्लॉग कैसे बनायें)
Public Domain Content kya hota hai(क्या होता है), इससे पैसे कैसे कमायें ?

Step 2: Networking (30 minutes per day)

नेटवर्किंग बहुत ही जरुरी है. आप इस काम के लिए प्रतिदिन 30 मिनट का समय जरुर निकालें. आप इस समय में आप अपने टॉपिक के जुड़े अन्य ब्लोग पर कमेंट करें.
अन्य blogger के साथ email, twitter आदि पर सम्पर्क करें. उनसे बातचीत करें.
यहाँ पर आपको एक बात हमेशा यह रखना होगा की आपका लक्ष्य वास्तविक रिश्तों का निर्माण करना है, उनसे संपर्क करें क्योंकि आप अपने काम का सम्मान करते हैं और आपको लगता है कि आप दोनों एक साथ बढ़ सकते हैं.

Step 3: Blog  Promotion (30 minutes per day)

जब भी आप अपना कोइ भी आर्टिकल पब्लिश करें तो उसे सर्च इंजन,सोशल मीडिया पर जरुर प्रमोट करें.
  • कुछ मित्रों को अपने आर्टिकल को सोशल बुकमार्किंग साईट पर सबमिट करने के लिए कहें.  और अपने फ्रेंड के वाल पर पोस्ट करें.
  • twitter पर अपने आर्टिकल को पोस्ट करें, retweet करें.
  • ऑनलाइन forum, न्यूज़ ग्रुप में भी अपने आर्टिकल को प्रमोट करें.
  • आप अपने आर्टिकल का pdf बना कर उसे विभिन्न साईट पर अपलोड करें. 
  • यदि कुछ समय बाच  जाए तो आप इसे सोशल मीडिया marketing में खर्च करें. 
top 10 email marketing platform 

Step 4 : Normal Posts (30 minutes per day)

जिस प्रकार से एक आदमी केवल इकलौती रोटी खाकर नहीं रह सकता है , ठीक उसी प्रकार से कोई भी ब्लॉग केवल किलर आर्टिकल के भरोसे ट्रैफिक गेन नहीं कर सकता है.
जिस प्रकार से रोटीके साथ दाल,सब्जी आदि भी लेना पढ़ता है ठीक उसी प्रकार से सप्ताह के बाकि के दिन भी नार्मल पोस्ट पब्लिश करते रहना चाहिए.
यदि आप अपना किलर पोस्ट monday को पब्लिश करते है तो आप मंगलवार से शुक्रवार तक नार्मल पोस्ट को पुब्लिश करते रहना चाहिए.
  • अब आप सोच रहे होंगे की यह नोर्मलपोस्ट क्या है. इसका कुछ example निचे दे रहे है.
  • किसी अन्य ब्लॉग का कोइ पोस्त जिस पर आप अपने ओपिनियन दे.
  • कोई ऐसा पोस्ट जो आपके ब्लॉग टॉपिक से संबंधित न्यूज़ की जानकारी विजिटर को दे.
  • कोई ऐसा पोस्ट जो आपके रीडर से कोई प्रश्न पूछे और उस पर अन्य रीडर भी डिस्कशन करें.
  • एक पोस्ट जिसमे कोई ट्रिक हो जो आपके विजिटर के लिए उपयोगी साबित हो सके.
email tracker tool की जानकारी हिंदी में 
infographic क्या होता है?

Conclusion

कुल मिलकर कहने का मतलब यह है कि किलर आर्टिकल या विशेष पोस्ट आपके ब्लॉग को प्रमोट करते है. जिससे आपके ब्लॉग पर नए विजिटर आते रहते है.
नार्मल  पोस्ट आपके ब्लॉग के कंटेंट के डाइवर्सिटी को बनाये रखता है, जिससे विजिटर का इंटरेस्ट आपके ब्लॉग पर हमेशा बना रहेगा.
मुझे उम्मीद है की आज का यह पोस्ट Blog पर Traffic कैसे बढ़ाये how to increase traffic to your blog for free ? आप लोगो के लिये फायदेमंद साबित होगा और आपके Blog पर Traffic को increase करने में सहायक होगा.  इसे आप अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करें. और हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब जरुर करें. 

शनिवार, 2 दिसंबर 2017

Pay Per Click (PPC) advertising kya hota hai(क्या होता है? )

दिसंबर 02, 2017 0
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दोस्तों आज हम आप लोगो को Pay Per Click (PPC) advertising kya hota hai के बारे में बताने वाले है. आज के दौर में इन्टरनेट सभी लोगो तक पहुचने का सस्ता और आसान तरीका है.
आप इसके माध्यम से अपने बात को बड़ी ही सुगमता से किसी ब्यक्ति तक पंहुचा सकते है.  pay per click या PPC एक digital marketing का ही एक तरीका है. जिसका उपयोग करके अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर ट्रैफिक लाया जाता है.
चुकी किसी ब्लॉग या वेबसाइट पर विजिटर सर्च इंजन के द्वारा ही सबसे अधिक आते है. इसीलिए लिए सभी blogger या website owner यह चाहते है की उनकी वेबसाइट रैंकिंग सर्च इंजन में बेहतर हो.
क्योकि बेहतर सर्च इंजन रैंकिंग ब्लॉग को  ज्यादा विजिटर दिलाता है.
Search Engine Optimization एक Free Organic Result होता है लेकिन  pay per click या PPC एक Paid Advertisement है.

pay per click या PPC क्या होता है? what is PPC in Hindi


PPC  का पूरा नाम pay per click होता है. जैसा की नाम से ही पता चल जा रहा है की pay per click मतलब की प्रति क्लिक के लिए पेमेंट करना.
यह एक internet marketing model  हैं जिसमे विज्ञापन देने वाला संस्थान, विज्ञापन पर होने वाले हर क्लिक के लिए, कुछ धनराशि देता हैं.
यह एक तरीका है जिसका आप उपयोग करके अपने ब्लॉग के लिए कुछ विजिट खरीद सकते है, और उस विजिट के बदले एडवरटाइजिंग कंपनी को आप पेमेंट करेंगे.
आप जब google का इस्तेमाल करते होंगे तो आप देखते होंगे की जैसे ही आप कुछ सर्च करते होंगे तो सर्च रिजल्ट के कुछ लिंक के आगे AD लिख कर आता होगा.
यह एक प्रदर्शन आधारित भुगतान मॉडल है, यदि आपके विज्ञापन पर क्लिक नहीं होता है तो आपको कोई भी पेमेंट करने की जरुरत नहीं होती है.

Pay per click (PPC) का मूल्य निर्धारण

PPC के  प्रत्येक क्लिक  के मूल्य का निर्धारण इस बात पर पर निर्भर करता है की विज्ञापनदाता अपने ब्लॉग पर किस देश से  और किस प्रकार के विजिटर को पाने की उम्मीद करता है.
PPC advertisement का मूल्य प्रभावित करने वाले फैक्टर.

1- visitor location

यदि आप अपने ब्लॉग का pay per click के माध्यम से अपने ब्लॉग का advertisment करते है तो इसका मूल्य इस बात पर निर्भर करता है की आप कहा से विजिटर पाना चाहते है. यदि आप इंडिया, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान के विजिटर चाहते है तो आप को per क्लिक के लिए कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
लेकिन यदि आप अमेरिका, ब्रिटेन आदि पश्चिमी देशो के विजिटर pay per click के माध्यम से चाहते है तो आपको ज्यादा पैसे खर्च करने पढ़ सकते है.


2- Keyword

pay per click का मूल्य के निर्धारण के लिए दूसरा फैक्टर है keyword. आप किस keyword के search करने पर अपने ब्लॉग को शो करना चाहते है. यह चीज़ भी आपके PPC advertisement का मूल्य निर्भर करता है.
जैसे आप यदि insurance, loan, software आदि शब्द से अपने ब्लॉग का विज्ञापन करना चाहते है तो आपको अधिक पैसे खर्च करने पढ़ सकते है.
कहने का मतलब यह है की यदि आप high cpc keyword से अपने ब्लॉग का advertisement करेंगे तो आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे.

Pay Per Click का इतिहास

सबसे पहले 1998 में एक नयी  कंपनी goto.com ने pay per click को शुरू किया. PPC advertising model की आईडिया goto.com के संस्थापक bill grass और idealab कंपनी का था.
google ने pay per click की शुरुवात 1999 में की, और adwords को oct 2000 में पेश किया जो आज के समय में pay per click की एक leading advertisement company है.
हालाँकि ppc को अच्छे तरके से 2002 में ही पेश किया जा सका, उस समय तक विज्ञापन के लिए प्रति हजार की लागत के हिसाब से भुगतान प्राप्त किया जाता था.

Pay Per Click के लाभ


  1. अगर आप यह चाहते है की बिना SEO search engine optimization किये ही आपका blog post सर्च इंजन ने किसी keyword से रैंक करें तो आप इसका सहायता ले सकते है.
  2.  यह अन्य मार्केटिंग टेकनिक से काफी सस्ता है, और आप इसके द्वारा अपने ब्लॉग के ads को हाई ट्रैफिक वाले वेबसाइट पर बहुत ही कम पैसे से दिखा सकते है और जो वहा से ट्रैफिक आपके ब्लॉग पर आएगी, उसका आप पेमेंट करेंगे.
  3. Google Algorithm में समय समय पर कोई न कोई Changes होते रहते है जिससे Websites की Ranking घटती या बढती रहती है लेकिन pay per click  PPC पर इस का कोई Effect नहीं पड़ता है.
  4.  आप pay per click  से अपने Audience को Target कर सकते है, और अपने Products और Services उनको बेच सकते है, PPC से आप किसी Particular Location को भी Target कर सकते है, कहने का मतलब यह है की आप अपने हिसाब से Keywords, Location, Website, Device, Time and Date Target करके अपने ब्लॉग का विज्ञापन कर सकते है.
  5. आप pay per click के द्वारा कम Budget में  भी अपने ब्लॉग या वेबसाइट या अपने business का प्रचार कर सकते है.
  6. यदि आपने अभी जल्द ही कोई कंपनी शुरू की है तो आप उसका विज्ञापन कम पैसे में कर सकते है, या आपकी कंपनी कोई ऑफर शुरू की है तो आप इसके द्वारा अपने ऑफर को लोगो तक कम पैसे में पंहुचा सकते है.

Pay Per Click (PPC) advertising company

Pay Per Click (PPC) advertising company  में, google adwords, yahoo search marketing तथा microsoft adcenter,  तीन सबसे बड़े नेटवर्क ऑपरेटर हैं और ये तीनों bid based model  के तहत काम करते हैं. cost per click  (CPC), search engine  तथा किसी keywords के लिए प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर भिन्न होता है.

Conclusion

अब आप लोग यह जान गए होंगे की pay per click क्या होता है? और इससे  आप अपने ब्लॉग  का ट्रैफिक कैसे बढ़ा सकते है? यह एक पेड advertisement है, इसलिए आपको कुछ पैसे भी खर्च करने पड़ेंगे. लेकिन यदि आप अपने ब्लॉग को एक हॉबी की तरह कर रहे है तो ठीक है लेकिन यदि आप इसे एक सीरियस बिज़नस की तरह करना चाहते है तो आपको एक बार इसे जरुर आजमाना चाहिए. 
क्योकि कोई भी बिज़नस का प्रचार प्रसार किये बगैर आप ज्यादा फायदा नहीं ले सकते है. और ब्लॉग एक ऐसा बिज़नस है की आप इसका जितना प्रचार करेंगे यह आपको उतना ही फायदा देगा.
मुझे उम्मीद है की आप लोगो को आज का मेरा यह पोस्ट Pay Per Click (PPC) advertising kya hota hai(क्या होता है? ) जरुर पसंद आया होगा. इसे आप अपने मित्रो के साथ जरुर शेयर करें. और मेरे इस ब्लॉग को सब्सक्राइब करें. 

गुरुवार, 30 नवंबर 2017

Contact Us Form Blogspot के Contact Us पेज में कैसे जोड़े

नवंबर 30, 2017 1
blogspot-contact-us-form
दोस्तों यदि आपका blog, blogger या blogspot पर है तो आप के लिए भी एक समस्या contact us form के लेकर होगी. क्योकि जब हम विजेट से contact us form को अपने थीम में जोड़ते है तो वह सभी पेज में दिखाई देता है जबकि हमें इस contact us form को contact us page में ही सिर्फ शो करना होता है. आप इसलिए इस पोस्ट  को पूरा पढ़े इसमे मैंने पूरे विस्तार से बताया है की आप कैसे contact form widget को अपने blogspot के contact us page पर लगा सकते है वो भी 10 मिनट में.

Blogger Form को जोड़ने के फायदे.

1- जैसे ही कोई आपको इस form के द्वारा संपर्क करना चाहेगा वैसे ही आपको अपने एडमिन email पर email मिल जायेगा.
2- यह बहुत ही सधारण और सिंपल form है जिसे कोई भी विजिटर बढ़ी ही आसानी से फिल कर सकता है.
3-यदि आपको CSS (Casecade Style Sheet) की जाकारी है तो आप इसके लुक को और बेहतर बना सकते है.
4- इस form की सबसे बड़ी बड़ी खासियत यह है की मेसेज को भेजने के लिए पूरा पेज reload नहीं करता है. जिससे इसकी स्पीड काफी बेहतर है.

BlogSpot में  Contact Us Form को page में कैसे लगायें? पूरी जानकारी हिंदी में .

तो चलिये अब जानते है की Contact Us Form को किसी भी seprate page जैसे contact us पेज या आप जिस भी पेज में चाहे उसमे कैसे जोड़े.

Part 1-  Contact gadget को जोड़ना-

Step 1- सबसे पहले आप अपने blogger.com  में लॉग इन करके आप अपने account के dashboard में जाए.
Step 2- अब बाए साइड में दिखाई दे रहे layout आप्शन पर क्लिक करें.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-2
Step 3- अब दाहिने साइड में आपको एक लिंक Add a Gadget पर क्लिक करें. जिससे यह आपको gadget list के पेज पर ले जायेगा.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-3

Step 4- अब यहाँ पर आप बाएं साइड में  more gadget पर क्लिक करें. अब आप को यहाँ पर Contact Form दिखाई दे रहा होगा. उसे add कर दे. और save कर दें.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-4

Part 2 - Gadget को छिपाना

Step 1- अब दाहिने तरफ दिखाई दे रहे template या theme पर क्लिक करें.
Step 2- अब आप edit HTML पर क्लिक करके अपने ब्लॉग के थीम कोड को ओपन  करें.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-5
Step 3- अब Ctrl + F बटन को प्रेस करके ]]></b:skin> को सर्च करें, और निचे दिए गए कोड को add कर दें.
div#ContactForm1 {
display: none !important;
}


Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-6

Part 3 - Contact Form को Page में जोड़ना.

Step 1- अब आप Page आप्शन पर क्लिक करके, और इसमे New page पर क्लिक करें.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-7
Step 2- अब दाहिने तरफ के page setting में जाकर reader comment सेक्शन में do not allow, hide existing को सेलेक्ट कर लें.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-8
Step 3- अब इस नए पेज में बाए तरफ HTML लिखा होगा वहा पर क्लीक करे और निचे के कोड को copy paste कर दें.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-9


<script>
var blogId = '8600000030000000341';//इस नंबर को आप अपने blogID से बदल लें..
//The below message 5 Strings can also be edited
var contactFormMessageSendingMsg ='Sending...';
var contactFormMessageSentMsg = 'Your message has been sent.';
var contactFormMessageNotSentMsg = 'Message could not be sent. Please try again later.';
var contactFormEmptyMessageMsg ='Message field cannot be empty.';
var contactFormInvalidEmailMsg = 'A valid email is required.'
var widgetLoaded=false;
function sendEmailMsg() {
if(widgetLoaded== false) {
_WidgetManager._RegisterWidget('_ContactFormView', new _WidgetInfo('ContactForm1', 'sidebar', null, document.getElementById('ContactForm1'), {'contactFormMessageSendingMsg': contactFormMessageSendingMsg , 'contactFormMessageSentMsg': contactFormMessageSentMsg , 'contactFormMessageNotSentMsg': contactFormMessageNotSentMsg , 'contactFormInvalidEmailMsg': contactFormInvalidEmailMsg , 'contactFormEmptyMessageMsg': contactFormEmptyMessageMsg , 'title': 'Contact Form', 'blogId': blogId, 'contactFormNameMsg': 'Name', 'contactFormEmailMsg': 'Email', 'contactFormMessageMsg': 'Message', 'contactFormSendMsg': 'Send', 'submitUrl': 'https://www.blogger.com/contact-form.do'}, 'displayModeFull'));
widgetLoaded=true;
document.getElementById('ContactForm1_contact-form-submit').click();
}
return true;
}
</script>
<form name='contact-form'>
<div>Your Name : </div>
<input class='contact-form-name' id='ContactForm1_contact-form-name' name='name' size='30' type='text' value=''/>
<div>Your Email: <em>(required)</em></div>
<input class='contact-form-email' id='ContactForm1_contact-form-email' name='email' size='30' type='text' value=''/>
<div>Your Message: <em>(required)</em></div>
<textarea class='contact-form-email-message' id='ContactForm1_contact-form-email-message' name='email-message' rows='5'></textarea>
<p></p>
<input class='contact-form-button contact-form-button-submit' id='ContactForm1_contact-form-submit' type='button' value='Send' onclick="sendEmailMsg()"/>
<div style='text-align: center; max-width: 450px; width: 100%'>
<p class='contact-form-error-message' id='ContactForm1_contact-form-error-message'></p>
<p class='contact-form-success-message' id='ContactForm1_contact-form-success-message'></p>
</div>
</form>

Part 4 - blog id पता करना. और page को publish करना.

Step 1- सबसे पहले आप अपने blogger.com के URL पर जाए,  उस URL में blog id करके कुछ नंबर लिखे रहते है, आप उन नंबर को वहा से copy करे.
Contact-Us-Form-Blogspot-के-Contact-Us-पेज-में-कैसे-जोड़े-10
Step 2- उस copy किये हुए नंबर को ऊपर के कोड में जहा पर blog id करके नंबर दिया  है वहा पर उसे paste कर दे.
Step 3- अब Publish बटन के द्वारा अपने पेज को पब्लिश कर दें.
अब आपका contact form किसी भी यूजर से इनपुट लेकर आपके email पर तुरंत सेंड कर सकता है.
ब्लॉग ट्रैफिक नहीं आने के मुख्य कारण
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Conclusion

मुझे उम्मीद है की आप लोगो को आज का यह पोस्ट Contact Us Form Blogspot के Contact Us पेज में कैसे जोड़े जरुर पसंद आया होगा. इसे अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूले. और मेरे इस ब्लॉग को जरुर सब्सक्राइब करें. ताकि इसी प्रकार के पोस्ट आपके email पर सीधे मिल सके.