रविवार, 11 जून 2017

Retina,Amoled and IPS Display

हैलो दोस्तो कैसे है आप सब जब कभी भी हम सब मोबाईल लेने जाते है तो हम मोबाईल की प्रोसेसर, रैम , इन्टरनल स्टोरेज, आदि पर बहुत ही ज्यादा ध्यान देते है लेकिन हम इनके स्क्रीन को लगभग भूल ही जाते है। तो आज हम आपका ध्यान मोबाईल के स्क्रीन पर लिये चलते है और जानते है कि स्मार्ट फोन, टीवी या Computer मानीटर में प्रयोग होने वाला स्क्रीन  जिनको कम्पनीया IPS display, Amoled display, Retina Dispaly बता रही है वास्तव में यह क्या है?, और इनमें क्या अंतर है? कौन है सबसे बेहतर? आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे और जानेगे की कौन सी तकनीक बेहतर है और क्यो?

डिस्प्ले की क्वालिटी फैक्टर

मोबाईल, टीवी, या कम्प्यूटर मानीटर की स्क्रीन की क्वालिटी को 3 फैक्टर से जाना जा सकता है।

  • ब्युइंग एंगल

जब हम मोबाईल, टीवी, या कम्प्यूटर मानीटर की स्क्रीन को सामने से न देखकर किसी एक तरफ से देखते है और यदि साइड से देखने पर भी हमको स्क्रीन अच्छी तरह से दिख रही है तो वह उस स्क्रीन की ब्युइंग एंगल कहलाती है। आजकल जो स्क्रीन मार्केट में आ रही है उनका ब्यूइंग एंगल 170-178 तक होता है।

  • पिक्सल पर इंच PPI

यहा पर पिक्सल पर इंच का मतलब यह होता है कि एक इंच लम्बे और एक इंच चैडाई में कितनी डाट या पिक्सल की संख्या है। जितनी अधिक पिक्सल की संख्या होगी स्क्रीन पर इमेज की क्लीयरेटी उतनी ही अच्छी होगी।

  • विद्युत पावर की खपत

स्क्रीन की क्वालिटी को जाचने का तीसरा फैक्टर है की वह स्क्रीन कितनी  विद्युत की खपत करेंगी। अर्थात उस स्क्रीन को चलाने के लिये कितनी विद्युत की जरुरत होगी। जितना कम पावर की जरुरत होगी Screen उतनी अच्छी मानी जायेगी।
स्क्रीन के प्रकार

LCD

 इसका पूरा नाम लिक्विड क्रीस्टल डिस्पले है। इस प्रकार के डिस्प्ले के पीछे बैकलाइट लगे होते है जिनकी मदद से हम स्क्रीन को देखते है। इनका प्रयेाग काफी पहले होता था। आज के समय में यह आउटडेटेड हो चुका है।

TFT LCD

इसका पूरा नाम थीन फिल्म ट्न्सजिस्टर लिक्विड क्रीस्टल डिस्पले है। यह भी अब आउटडेटेड हो चुका है। क्योकि इनकी डिस्प्ले की क्वालिटी बहुत बेहतर नही थी।
टीएफटी एलसीडी का उपयोग टीवी उपकरणों, कंप्यूटर मॉनिटर, मोबाइल फोन, हाथ में वीडियो गेम सिस्टम, व्यक्तिगत डिजिटल सहायकों, नेविगेशन सिस्टम और प्रोजेक्टर सहित उपकरणों में किया जाता है।
टीएफटी एलसीडी का इस्तेमाल कार इंस्ट्रूमेंट क्लस्टरों में भी किया जाता है क्योंकि वे ड्राइवर को क्लस्टर को अनुकूलित करने की अनुमति देते हैं

IPS LCD

इसका पूरा नाम है इन-प्लेन स्विचिंग लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले । आईपीएस पैनल ब्यूइंग एंगल 170-178 तक होता है। औस इस एंगल से सुसंगत, सटीक रंग प्रदर्शित करते हैं। इसमें सभी कलर नेचुरल दिखते है। लेकिन यह थोडा ज्यादा पावर खपत करता है।

AMOLED LED

इसका पूरा नाम ंactive-matrix organic light-emitting diode है। इस प्रकार के डिस्प्ले में एलसीडी की तरह बैक्लाइट का प्रयोग नही होता है इसमें पिक्सल ही खुद को आवश्यकतानुसार आन आफ करके हमें कलर और  अन्य चीजे दिखा देती हैं यह आईपीएस डिस्प्ले की तुलना में पावर की खपत कम करता है। इसमें प्रत्येक पिक्सल एक लाईट की तरह काम करता है। इस प्रकार के डिस्प्ले में ब्लैक कलर पूरा ब्लैक ही दिखत है क्योकि जब ब्लैक कलर को दिखना होता है तो पिक्सल आन ही नही होता है।

रेटिना डिस्प्ले 

जब किसी भी डिस्प्ले की पीपीआई बहुत ही अधिक होती है तो उसे हम रेटिना डिस्प्ले कह सकते है। सबसे पहले इसको एपल ने अपने  आईफोन 4 में प्रयोग किया था। जिसका पीपीआई 325 था। और आज भी आई फोन 6 सीरीज में भी वही है। वास्तव में रेटिना डिस्प्ले कुछ होता नही हैं, इसमें सिर्फ पिक्सल डेन्सीटि ही बहुत अधिक होती है। जिससे पिक्चर क्वालिटी बहुत अच्छी दिखती है। वास्तव में रेटिना डिस्प्ले कोई तकनीक नही  यह केवल एपल का एक माकेर्टिग स्टंट है। मार्केट में इससे भी ज्यादा पिक्सल डेन्सीटी के स्क्रीन वाले मोबाईल आ चुके है।

पहले इन सभी प्रकार के स्क्रीन का प्रयोग मोबाईल या कम्प्यूटर के स्क्रीन को बनाने में किया जाता था। लेकिन अब काफी साल पहले से इनका उपयोग टीवी के लिये भी होने लगा है। टीवी का रिजोल्यूशन कम्प्यूटर स्क्रीन के रिजोल्यूशन से कम होता है। क्योकि लैपटाप या डेस्कटाप के क्रीन को हम एकदम नजदीक से देखते है, और टीवी को काफी दूर से देखते है। इसीलिये टीवी की स्क्रीन का रिजोल्यूशन कम्प्यूटर स्क्रीन से कम होता है। फिलहाल अब तो मार्केट में 4k रिजोल्यूशल वाले टीवी, फुल एचडी टीवी भी आ गये है। जिनको हम कम्प्यूटर मानीटर या टीवी दोनेा की तरह इस्तेमाल कर सकते है।

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