सोमवार, 27 मार्च 2017

Some Myth about Phone which you Think are Right

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दोस्तो आजकल लगभग सभी लोग मोबाईल फोन का इस्तेमाल करते है, और हर साल बडी तेज़ी से इनकी संख्या भी बढती जा रही है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में 33 करोड से उपर स्मार्टफोन यूजर्स है, और भारत के लोग खुद से ज्यादा अपने फोन की देखभाल करते हैं, लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद कुछ ऐसे फैक्ट है जिसे जो झूठ है जिनमें कोई सच्चाई नही है फिर भी लोग उन्हे सही मानते है। तो चलिये हम आप को बताते है की वे कौन से मिथ है और क्या है उनकी सच्चाई

  • फोन को 100 प्रतिशत चार्ज करें और पूरी तरह डिस्चार्ज करें

सच्चाई- किसी भी फोन के यूजर गाईड या किसी कम्पनी के बेवसाइट पर ऐसी कोई गाईड लाईन नही है कि मोबाईल फोन को 100 प्रतिशत तक चार्ज करें और पूरी तरह से डिस्चार्ज करें। यदि मोबाईल को अपने पास 4-5 साल तक यूज करना है तो कभी भी बैटरी को 80 प्रतिशत से उपर जार्च ना करें और 20 प्रतिशत से अधिक डाउन ना होने दे। यदि आप बैटरी को 100 प्रतिशत तक चार्ज करते है और 5-10 प्रतिशत तक डाउन करते है तो भी आपके फोन की बैटरी 3 संे 4 साल तक अच्छी बैकअप देगी। लेकिन स्मार्टफोन कितना बैकअप देता है आप सभी को पता है।

  • फोन से कैंसर होता है।

सच्चाई - इसमें कोई भी सचाई नही है कि फोन यूज करने से कैंसर होता है। फोन के यूजर्स जिस तेजी से बढ रहे है उस तेजी से कैंसर से मरीज नही बढ रहे है, और फोन के द्वारा जो रेडियेशन से कंैसर की बात होती है, तो ऐसा कोई रिसर्च नही हुआ है जिससे पता चले कि फोन से कैसर होता हैं, और कही सुनने में भी यह बात सामने नही आई है कि फलां ब्यक्ति को मोबाईल यूज करने के बजह से कैंसर हो गया हैं। यदि मोबाईल फोन से कैंसर होता तो डाक्टर खुद मोबाईल की की जगह लैंड लाईन फोन का ही इस्तेमाल करते। हम लोग काफी सालो से मोबाईल फोन यूज कर रहे है, लेकिन अभी तक हम लोगो को ऐसा कोई परेशानी का सामना नही करना पडा है। इसलिये निश्चिन्त रहे आपनी आवश्यकता के अनुसार समार्टफोन का इस्तेमाल करते रहे।

सच्चाई - समार्टफोन यूजर्स के द्वारा माना जाने वाला एक ऐसा मिथक जिसमें रत्ती भर भी सच्चाई नही है। ज्यादा मेगापिक्सल के कैमरे से बडे साइज का फोटो लिया जाता है, न कि अच्चछी क्वालिटी का। अच्छी क्वालिटी की फोटो लेने के लिये अच्छी क्वालिटी की सेन्सर, अपार्चर, लेन्स की फोकल लेंथ की भी  जरुरत होती है। यदि ज्यादा मेगापिक्सल के कैमरा से ज्यादा अच्छा फोटो आता तो एन्ड्रायड का 13 मेगापिक्सल एप्पल के 8 मेंगापिक्सल कैमरे से मात नही खाता।


सच्चाई - इस बात में कोई सच्चाई नही है।  फोन को बेहतर बनाने के लिये सिर्फ एक अच्छा प्रोसेसर ही नही होना चाहिये। फोन को बेहतर होन के लिये प्रोसेसर के साथ रैम, स्क्रीन, टच, बैटरी बैकअप, कैमरा सभी होने चाहिये। क्योकि किसी फोन में बहुत अच्छा प्रोसेसर हो और उसका रैम ही 1 जीबी हो तो भी हाई मेेमोरी गेम्स खेलने में हेंग हो सकता है। प्रोसेसर की पावर को अच्छा कर लेने से फोन की पावर डबल नही हो जाती है। फोन को अच्छी तरह से कार्य करने के लिये भी हार्डवेयर के साथ साफ्टवेयर का भी बहुत बडा योगदान होता है।

  • फोन को कुछ घंटे ही चार्ज करना चाहिये रात भर नही।


सच्चाई - आज कल के जो स्मार्टफोन आ रहे है। उनमें ऐसा सर्किट लगा हुआ है कि जैसे ही बैटरी 100 प्रतिशत चार्ज हुई मोबाईल फोन बैटरी को चार्ज करना बंद कर देता हैे। तो फिर आप अपने मोबाईल को रात भर चार्ज करे या चार्ज करते रहे 100 प्रतिशमत के बाद तो चार्ज होना बंद हो जायेगा। लेकिन एक बात का हमेशा ख्याल रखे की कभी भी चार्जर किसी रिप्यूटेड ब्रांड का ही हो, यह जरुरी नही है कि जिस ब्रंाड का फोन हो उसी ब्रांड का चार्जर भी हो। बैटरी के फटने का कोई सवाल ही नही है, क्योकि फोन के स्मार्ट होने के साथ ही  बैटरी भी अब स्मार्ट हो गई है।

  • पावर सेविंग एप्प के प्रयोग से बैटरी बैकअप ज्यादा मिलता है 

सच्चाई- पावर सेविंग एप्प खुद ही ज्यादा बैटरी यूज करते है क्योकि यह एप्प हमेशा यह चेक करते रहते है कि कौन - कौन से एप्प रन कर रहे है और और कितना बैटरी यूज कर रहा है। जिसकी वजह से ये एप्प खुद ही ज्यादा बैटरी खर्च करते रहते है। इसलिये संभव हो तो स्र्माटफोन यूजर कभी भी पावर सेविंग एप्प ना यूज करें। यदि आपके स्मार्टफोन में पावर सेवर मोड है तो आप उसका इस्तेमाल कर सकते है।

  • बैकग्राउन्ड एप्प को बंद करने से फोन की स्पीड और बैटरी बैकअप बढ जायेगा।

सच्चाई - आज कल मल्टीटास्किंग का प्रचलन बढ रहा है जिसके चलते कम्प्यूटर ही नही मोबाईल में भी यह फीचर आने लगे है, जिसके द्वारा आप एक ही समय में अपने स्मार्टफोन में एक साथ बहुत से कार्य कर सकते है। तो कोई औचित्य नही बनता कि आप अपने बैकग्राउन्ड एप्प को बंद कर देंगें तो आपका फोन तेजी से काम करने लगेगा। आप अपने फोन के बैकग्राउन्ड एप्प को बंद करे या ना करें इसके स्पीड पर कोई भी असर नही पडेगा। बैकग्राउन्ड एप्प के वजह से कभी भी आपकी बैटरी जल्दी डाउन नही होती है। बैकग्राउन्ड एप्प को बंद करने के बाद भी आपका बैटरी बैकअप नही बढ सकता है। बल्कि बैकग्राउन्ड एप्प को बंद करके उसे पुनः शुरु करने में वह बैटरी ज्यादा लेता है। क्योकि फोन के मेमोरी में दुबारा लोड होता है।


सच्चाई- आटोमेटिक ब्राइटनेस से ज्यादा बैटरी डेªन होता है। क्योकि सेन्सर हमेशा प्रकाश को सेन्स करता रहता है ताकि स्क्रीन के ब्राटइनेस को मैनेज कर सके। बैटरी को डेªन होने से बचाने के लिये मैनुअल ब्राइटनेस की सेटिंग सही रहती है क्योकि इसमें सेन्सर आॅफ रहता है और स्क्रीन ब्राइटनेस हमेश एक समान रहता है और अपने जरुरत के मुताबिक उसे मैनुअली सेट करना पडता है।

  • मैगनेट के साथ रखने से मेमोरी चिप खराब हो जाते है

सच्चाई - इसमें भी कोई सच्चाई नही है क्योकि मेमोरी कार्ड और मैगनेट को साथ रखने पर मेमोरी कार्ड पर कोई प्रभाव नही पडता है और न ही उसमें स्टोर डाटा रिमूव या करप्ट होता है। इसलिये निश्चिन्त रहे। स्पीकर से निकाला हुआ मैगनेट या 10-20 रुपये का खरीदा हुआ मैगनेट मेमोरी कार्ड का कुछ नही कर सकता।

सच्चाई - यह भी एक मिथ ही है कि एन्ड्रयाड फोन कम सेक्योर है। जबकि सच्चाई यह है कि एपल के आईफोन तथा एन्ड्रायड फोन दोनो ही काफी सेक्योर है। एन्ड्रायड एक ओपन सोर्स आपरेटिंग सिस्टम हैए लेकिन सेक्योरिटी के मामले में आईफोन से कम नही है। अगर ऐसा होता तो दुनिया की बेहतरीन मोबाईल कंपनिया इसे नही अपनाती, और सबसे बडी बात की यह गूगल का प्रोडक्ट है। जिस पर भरोसा कर सकते है।

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