रविवार, 9 अप्रैल 2017

Mobile Radiation SAR and Human Life

नमस्कार मित्रो कैसे है आप सब। आज हम बात करेगें मोबाइल के SAR वैल्यू की। आजकल लगभग सभी लोग मोबाईल फोन का इस्तेमाल करते है। और जब मोबाईल फोन खरीदने जाते है तो हम उसके प्रोसेसर, रैम, स्टोरेज कैपासीटी, स्क्रीन साइज, लुक  आदि के बारे में जानकरी लेते है, और उसके आधार पर मोबाईल लेने का निर्णय करते है लेकिन एक महत्वपूर्ण बात जो हम भूल जाते है कि क्या यह फोन हमारे लिये सेफ है। यहाॅ सेफ का मतलब मोबाईल से
होने वाले रेडियेशन से है कि क्या हम जिस मोबाईल को खरीद रहे है इससे निकलनेवाला  रेडियेशन लेवल हमारे शरीर के लिये हानिकारक तो नही है।
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What is SAR (Specific absorption rate)

मोबाईल डिवाइस में लगा एन्टीना सिग्नल को मोबाईल डिवाइस से टावर तक और टावर से मोबाईल डिवाइस तक लाने कार्य करता है। और यह जो सिग्नल होता है वह इलेक्ट्ोमैग्नेटिक वेब या रेडियो फिक्वेंसी होते है। मोबाईल डिवाइसो से निकलने वाले रेडियो फिक्वेंसी को मापने के लिये जो मात्रक प्रयोग किया जाता है वही SAR (Specific absorption rate  कहलाता है। किसी भी मोबाईल डिवाइस से तय सीमा से अधिक रेडियो फिक्वेंसी नही निकलनी चाहिये।  भारत में यह तय सीमा 1.6 वाट/किलोग्राम है। अर्थात आपका 1 किलोग्राम टिश्यू 1.6 वाट पावर एबर्सोब करेगा। यदि आपके फोन सी सार लिमिट इससे अधिक है तो आप तुरन्त अपने फोन को बदल दे क्योकि यह आपके दिमाग और शरीर के कोशिकाओं के लिये काफी हानिकारक होती है।

How To Know SAR Limit of Our Mobile 

अपनपे मोबाईल के सार लिमिट को जानने के लिये अपने मोबाईल पर ’रु07रु डायल करें। यदि आपका मोबाईल सार लिमिट 1.6 वाट/किग्रा से अधिक दिखा रहा है तो आप तुरन्त उस मोबाईल को बदल दे क्योकि सार लिमिट अधिक होने से आपका शरीर पावर ज्यादा अबर्सोब करेगा जिससे आप बिमार हो सकते है।

Mobile रेडियेशन से बचने के उपाय

कम रेडियेशन वाला फोन खरीदे

हम जब भी फोन खरीदे तो  इस बात का जरुर ध्यान दे कि उसका सार वैल्यू 1.6वाट/किग्रासे अधिक न हो।

ईयरफोन का प्रयेाग करें।

आप ईयर फोन का प्रयोग सिर्फ गाना सुनते समय या विडियो देखते समय ही न करें बल्कि फोन पर बात करते समय भी असका प्रयोग करें ताकि फोन से निकलने वाली आरएफ (रेडियो फिक्वेसी) शरीर से दूर रहे। और आप सुरक्षित रहे।

बेहतर नेटवर्क कवरेज वाली कम्पनी की सेवा लिजिये

सबसे बडी बात यदि आपके फोन नेटवर्क कवरेज कम है तो मोबाईल नेटवर्क को बार बार सर्च करता रहेगा जिससे रेडियो फिक्वेंसी ज्यादा निकलेगी और आपके शरीर पर हानिकारक प्रभाव डालेगी। मोबाईल का नेटवर्क फुल रहने पर मोबाइ्रल का रेडियेशन कम रहता है।

मोबाईल कवर

मोबाईल को हमेशा एंटी रेडियेन्ट कवर में रखे , तथा खास तौर सेोते समय अपने फोन को अपने से हमेशा दूर रखे  तकिये के नीचे फोन रख कर नही सोना चाहिये। इससे मेमारी कमजोर होती है।

टहल-टहल कर बात न करे।

यदि आप कम नेटवर्क वाले क्षेत्र में है तो कभी भी टहल-टहल कर बात ना करें क्योकि नेटवर्क कमजोर होन पर मोबाईल सिग्नल के लिये स्कैनिग शुरु कर देता है जिससे ज्यादा रेडियेशन उत्सर्जित होता है। जो मानव शरीर के लिये हानिकारक है। इसलिये कभी भी मोबाईल फोन पर बात करते हुये ना टहले जब भी बात करें तो बैठ कर या एक जगह खडे होकर बात करे।
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कई साल पुराने फोन का प्रयोग ना करें।

यदि आप कई साल पुराने फोन का इस्तेमाल कर रहे है तो आप तुरन्त इसको बदल दें। क्योकि कइ्र साल पहले के फोन में सार वैल्यू ज्यादा होती थी। यदि आपके पास पुराना फोन है तो उसे सबसे पहले ’रु07रु से उसका सार वैल्यू की जानकारी ले और यदि सार वैल्यू मानक से अधिक है तो उस फोन को तत्काल बदल देंवे।

फोन पर बहुत लम्बी बातचीत ना करें

मोबाईल फोन पर बहुत ज्यादा लम्बी बातचीत ना करें। क्योकि लम्बी बातचीत करने से मस्तिष्क का तापमान बढ जाता है और हमें थकावट महसूस होने लगती है। जब मोबाईल पर लगातार 20 मिनट तक बात करते है तो हमारे मस्तिष्क का तापमान 2 डिग्री सेन्टीग्रेड बढ जाता है। मोबाईल पर लम्बी बातचीत करने से यादास्त कमजोर होता है।

डाटा कनेक्शन आन होने पर मोबाईल से बात ना करे।

डाटा कनेक्शन के आन होने पर  मोबाईल से बातचीत नही करना चाहिये क्योकि दोनो को एक साथ प्रयोग करने से रेडियेशन ज्यादा होगा। जो हमारे स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होगा।
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