शुक्रवार, 30 जून 2017

Google Chrome Browser 12 Useful Tips and Tricks 2017 Hindi

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दोस्तों क्या आप जानते है की जिस google chrome browser को आप सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते है, google web browser  दुनिया का top web browser है. आज की डेट में दुनिया के हर प्लेट फॉर्म पर यूज़ होने वाला web browser, google chrome ही है. वैसे तो मार्किट में बहुत से web browser उपलब्ध है. जैसे safari, opera, firefox, uc browser, internet exporer, microsoft edge आदि.
आज के 10-12 साल पहले हम सभी internet explorer का ही इस्तेमाल करते थे. लेकिन समय के साथ माइक्रोसॉफ्ट में इसे यूजर experience के हिसाब से अपडेट नहीं कर पाया जिससे यूजर इसे इस्तेमाल करना छोड़ कर दिए और इसके जगह पर google chrome browser का यूज़ करने लगे.
यदि मार्किट शेयर की बात करे तो डेस्कटॉप बाज़ार में google chrome का मार्किट शेयर लगभग 53.72% है. और स्मार्ट फ़ोन  के मार्किट में  भी google chrome 48.45% के साथ ही टॉप पर है. यह एक ऐसा ब्राउज़र है जिसे डेस्कटॉप और स्मार्ट फ़ोन दोनो में ही लोकप्रियता मिली हुई है.

Feature जो की google chrome को अन्य ब्राउज़र से बेहतर बनता है.

1- One click history

google chrome में बहुत ही बढ़िया फीचर है one click history इसके लिए आपको हिस्ट्री ओपन करने की जरुरत नहीं पड़ेगी. आप बस माउस को back '←' बटन पर ले जाकर क्लिक एंड होल्ड किये रहिये. जिससे chrome आपको तत्काल की कुछ हिस्ट्री की लिस्ट दिखा देगा और निचे show full history दिकाही देगा जिस पर आप क्लिक करके पूरा हिस्ट्री भी देख सकते है.

2- guest browsing in google chrome

google chrome में guest browsing का एक बेहतरीन फीचर है. इसकी खासियत यह है की यदि आपका मित्र या रिस्तेदार आपका laptop या डेस्कटॉप यूज़ करना चाहता है तो आप गेस्ट ब्राउज़िंग की मदद ले सकते है. इसके द्वारा google chrome browser में आपकी हिस्ट्री या आपकी पर्सनल इनफार्मेशन कोई नहीं देख पायेगा.
इसके लिए आपको इस फीचर को इनेबल करना होगा. इसको इनेबल करने के लिए setting⇒person⇒manage other people⇒ browse as guest पर क्लिक कर दे.

3- google chrome task manager 

chrome browser में अपना एक अलग task manager है. इसका उपयोग आप हैकिंग से बचने के लिए कर सकते है. या यदि ब्राउज़र hang हो रहा हो तो आप इसकी मदद से ब्राउज़र के कुछ प्रोसेस को किल करके hang होने से बचा सकते है.
task manager को ओपन करने के लिए MENU⇒MORE TOOL⇒ TASK MANAGER पर क्लिक कीजिये जिससे task manager ओपन हो जायेगा और जिस प्रोसेस को किल करना है उसे सेलेक्ट करके end process का क्लिक कर दे. वह प्रोसेस बंद हो जायेगा.

4- google chrome video player

आप अपने कंप्यूटर में बहुत से विडियो प्लेयर रखे होंगे लेकिन क्या आप ने अपने google chrome को एक विडियो की तरह से इस्तेमाल किया है. यदि नहीं किया है तो आज यह जन लीजिये की यह एक बेस्ट विडियो प्लेयर भी है. आप इसके द्वारा हाई दिफिनेसन फिल्म या विडियो का आनंद ले सकते है.
बस आप को जिस भी विडियो को play करना हो उसे google chrome ब्राउज़र में  ड्रैग एंड ड्राप कर दीजिये. आपका मूवी play हो जायेगा.

5- chrome music player

जिस प्रकार आप इसमे विडियो play कर सकते है ठीक उसी प्रकार से आप इसमे mp3 म्यूजिक को भी play कर सकते है. यह भी एक इसकी बहुत ही बेहतरीन खासियत में से एक है.

6- google chrome notepad 

यदि आप google chrome को एक नोटपैड की तरह से इस्तेमाल करना चाहते है तो इसके लिए आप इसके लिए आप इस ब्राउज़र में "data:text/html,<html contenteditable>" टाइप कर दीजिये अब आपका यह प्यारा ब्राउज़र एक साधारण नोटपैड की तरह से कार्य करना शुरू कर देगा. ब्लॉगर के लिए यह फीचर बहुत ही बेहतर है.

7- paste and search option

google chrome browser का यह फीचर सर्चिंग में आपका टाइम बचा सकता है. जैसे मान लीजिये सर्फिंग करते समय आप को किसी शब्द या वाक्य को search करना है तो आप सिर्फ उसे सेलेक्ट करे और माउस का राईट बटन क्लिक करे तो जो पॉप अप menu ओपन होगा, उसमे search google for "सेलेक्ट किया हुआ शब्द " दिखायेगा आप बस उस पर क्लिक करे और यह ब्राउज़र एक दुसरे टैब में उस शब्द या वाक्य को इन्टरनेट पर सर्च कर देगा.

8- google chrome as a pdf maker 

आप इस ब्राउज़र के द्वारा किसी भी वेबसाइट का pdf बड़ी ही आसानी से बना सकते है. pdf बनाने के लिए आप निम्न step फॉलो करे.

  • जिस वेब पेज को pdf बना हो उसे पहले ब्राउज़र में ओपन करे.
  • अब आप ctrl+P बटन को प्रेस करे. 
  • आपको बाये साइड में एक change बटन दिखाई देगा. उस पर क्लिक करे.
  • अब एक पॉप अप विंडो ओपन होगी इसमे से आप save as pdf को सेलेक्ट करे.
  • जैसे ही आप save as pdf को सेलेक्ट कर लेते है. तो पहले जहा पर print बटन था अब वहा पर save बटन आ जायेगा. जिसको क्लिक करके आप ओपन साईट को pdf में सेव कर सकते है.

9- chrome as a pdf reader

इस ब्राउज़र का एक और खासियत यह है की आप इसमे किसी भी pdf फाइल को रीड कर सकते है. बिलकुल किसी pdf रीडर की तरह. आप इसके द्वारा किसी भी pdf फाइल के किसी एक पेज को उसमे से कट करके अलग सेव कर सकते है. जो एक बहुत हे बेहतरीन फीचर है.

10- google chrome game

क्या आप कभी google chrome में गेम खेले है. यदि नहीं तो आप चाहे तो जरुर खेल सकते है. लेकिन यह एक offline गेम है. जब आप का नेटवर्क काम  नहीं कर रहा होता है. उस समय यदि आप आप देखते होंगे की google chrome में एक छोटा डायनासोर दिखाई देता होगा. यदि आप space bar को प्रेस करे तो यह गेम शुरू हो जाता है. इस गेम को space bar के द्वारा ही खेला जाता है.
आप internet को डिस कनेक्ट कर दीजिये और google chrome में कुछ भी search कीजिये. internet नहीं होने के वजह से आपको डायनासोर दिखाई देगा और बस आप space bar की मदद से गेम को खेलना शुरू कीजिये.

11- Spelling and grammar checker

google chrome ब्राउज़र में inbuilt spelling और grammar की जाँच करने वाला tool होता है. जिस प्रकार आप माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में टाइप करते है तो गलत वर्ड के निचे लाल रंग की लाइन शो होती है ठीक उसी प्रकार से इस ब्राउज़र में भी गलत spelling के निचे लाल रंग की लाइन शो हो जाती है.
अब यदि आप इस वर्ड को करेक्ट करना चाहते है तो इस वर्ड को सेलेक्ट कर राईट क्लिक करिए . जो पॉप अप विंडो ओपन होगी उसमे करेक्ट spelling की suggestion की लिस्ट होगी उसमे से आप सही शब्द क्लिक कर दीजिये. जिससे शब्द की spelling सही हो जाएगी.

12- Open link in new windows

जब आप सब internet पर काम करते होंगे तो उस दौरान बहुत से लिंक को ओपन करने की लिए copy पेस्ट करना पढ़ता होगा. लेकिन google chrome browser में आप यदि किसी लिंक को ओपन करना चाहते है तो उस लिंक पर ctrl बटन के साथ एक क्लिक कर दीजिये वह लिंक एक दुसरे टैब में खुद ही ओपन हो जाएगी. और आपका समय भी बच जायेगा.

Final Word

हमें उम्मीद है की आप को यह आर्टिकल Google Chrome Browser 12 Useful Tips and Tricks 2017 Hindi पसंद आया होगा. आप इसे अपने मित्रो के साथ सोशल नेटवर्क जैसे facebook, google+, twitter पर भी शेयर करे. यदि कोई सुझाव या शिकायत हो तो इसे कमेंट box के जरिये जरुर शेयर करे. 


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गुरुवार, 29 जून 2017

Bounce Rate kam karane ke 5 aasan tarike

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दोस्तों आज हम आपको सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के एक महत्पूर्ण फैक्टर bounce rate के विषय में आप लोगो को बताएँगे की bounce rate kya hota hai? और bounce rateko kaise kam kare? और कैसे इस bounce rate को कम करके बढ़िया ट्रैफिक प्राप्त करे? और किस प्रकार अपने bounce rate को कम करके अपने ब्लॉग का revenue बढ़ाये?
यदि आप एक ब्लॉगर है या  आपका कोई वेबसाइट है तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. और यदि आपके blog का bounce rate ज्यादा है तो इस आर्टिकल को पढ़ कर इसमे बताये गए मेथड का यूज़ करे तो आपका bounce rate जरुर कम हो  जायेगा.  तो चलिए सबसे पहले जानिए bounce rate क्या होता है?
high quality content कैसे लिखे ?
free web hosting के फायदे और नुकसान
google keyword planner से keyword research कैसे करे?
google drive से high quality backlinks कैसे बनाये?
blog post के लिए keyword research कैसे करे?

bounce rate क्या होता है?

bounce rate उन विजिटर के संख्या का परसेंटेज है. जो आपके ब्लॉग पर आये और एक पेज देख कर ही वापस चले गए. जब कोई विजिटर किसी ब्लॉग पर आता है और उस ब्लॉग के किसी भी एक पेज को ही देख कर चला जाता है तो ऐसे विजिटर की संख्या का परसेंटेज ही bounce rate कहलाता है.
उदाहरण के लिए मान लेते  है की मेरे ब्लॉग की bounce rate 60% है. तो इसका मतलब यह हुआ की हमारे ब्लॉग के जितने भी विजिटर आये है अर्थात टोटल विजिटर की संख्या में से 60% मेरे ब्लॉग का कोई एक पेज ही देख कर उसे छोड़ गए.
जिस ब्लॉग का bounce rate जितना कम होगा वह ब्लॉग उतना ही बढ़िया होगा.

ideal bounce rate कितना होना चाहिए?

जहा तक ideal bounce rate की बात है तो यह 10% या इससे कम होना चाहिए. जबकि ऐसा बहुत ही कम वेबसाइट का होता है.  और जिन वेबसाइट का bounce rate 10% से कम होता है वह दुनिया के सफल वेबसाइट में गिने जाते है.  और यदि आप का bounce rate 90% से ज्यादा है तो आप यह मान लीजिये की आपके वेबसाइट में लोगो का कोई इंटरेस्ट नहीं है. और आपको इसमे सुधार करने की जरुरत है.
यदि आपके वेबसाइट या ब्लॉग का bounce rate 10% से 40% के बीच में है तो भी बहुत अच्छी बात है. लेकिन आमतौर पर देखा गया है  की वेबसाइट का bounce rate 40% से 70% के आसपास ही रहती है.
यदि आप एक ब्लॉगर है या किसी वेबसाइट के ओनर है तो आपको हमेशा अपने ब्लॉग या वेबसाइट के bounce rate को कम करने पर ध्यान देना चाहिए.

bounce rate ज्यादा होने का कारण

  • targeted विजिटर का न होना.
  • वेबसाइट का design अच्छा और responsive ना होना.
  • quality content का न होना
  • website का page loading time अधिक होना.
  • ब्लॉग के दुसरे आर्टिकल का internal link का ना होना.

bounce rate को कम कैसे करे?

आप लोग यह तो अच्छी तरह से जान गए है की bounce rate क्या होता है?  bounce rate ज्यादा होने के क्या  कारण होते है. हम आपको बता रहे है bounce rate kam karne ke top 5 aasan tarike. तो चलिए अब यह भी जान लेते  है की इसे कम कैसे करते है.

1- सही विजिटर को attract करना

  • यदि आप एक ब्लॉगर  है तो आपका उद्देश्य अपने blog पर अधिक विजिटर लाना नहीं होना चाहिए बल्कि targeted visitor को लाना आपका उद्देश्य होना चाहिए.
  • मान लीजिये कोई motivational स्टोरी पढ़ना चाहता है, वह विजिटर यदि आपके blog पर आ भी जायेगा तो भी वह तुरंत ही वापस चला जायेगा. इसीलिए केवल ऐसे विजिटर को ही अपने ब्लॉग पर टारगेट कीजिये जो उसमे interested  हो.
  • इसके लिए आप अपने content में उन्ही  keyword को ही इस्तेमाल कीजिये, जो आपके ब्लॉग या वेबसाइट से सम्बंधित हो.
  • सर्च इंजन में rank करने के लिए बढ़िया title और meta description का इस्तेमाल कीजिये.
  • ज्यादा targeted ट्रैफिक के लिए एडवरटाइजिंग का भी सहारा ले सकते है.

2- blog का design बढ़िया और responsive होना चाहिए

  • एक कहावत है जो दिखेगा वही बिकेगा, यदि आपके ब्लॉग का design good looking नहीं और और वह responsive नहीं है तो विजिटर एक बार तो आयेंगे लेकिन चले जाने के बाद दुबारा नहीं आयेंगे. क्योकि यदि उन्हें आपका blog अच्छा नहीं लगा तो वे तुरंत ही छोड़ कर चले जायेंगे.
  • यहाँ पर good looking design का मतलब यह है की यदि आपके साईट की नेविगेशन अच्छी नहीं है तो लोगो को menu ब्राउज करने और साईट सर्फ करने में दिक्कत होगी, जिससे विजिटर आपकी साईट को लीव कर जायेंगे.
  • इसके लिए आप बहुत ज्यादा ब्राइट और बहुत ज्यादा लाइट कलर का यूज़ ना करे. साईट में कलर और उसका थीम ऐसा होना चाहिए जो आँखों को सुकून दे.
  • साईट में फॉण्ट की साइज़ और फॉण्ट का भी ध्यान रखिये ताकि लोग पढ़ने में आसानी हो, बहुत ज्यादा बढे और बहुत छोटे फॉण्ट का चुनाव ना करे.
  • एक बात हमेशा याद  रखिये की आप ब्लॉग या वेबसाइट को बना रहे है, उसे अपने पढ़ने के लिए नहीं बना रहे है, इसे आप दूसरो को पढ़ने के लिए बना रहे है. कहने का मतलब सिर्फ इतना है की साईट का design ऐसा हो की विजिटर को पसंद आये.
  • ब्लॉग या वेबसाइट का design responsive होना चाहिए. मतलब यह की आपका ब्लॉग हर साइज़ के डिस्प्ले और डिवाइस में बेहतर तरीके से ओपन हो.
  • साईट को मोबाइल फ्रेंडली रखे क्योकि आज से समय में डेस्कटॉप  ट्रैफिक से ज्यादा मोबाइल ट्रैफिक आ रही है.

3- high quality content  प्रोवाइड करे

  • quality content के द्वारा हो आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट का reputation बना सकते है. जिससे साईट का यूजर बेस बनेगा, और साईट यूजर बेस के आधार पर ही वेबसाइट लॉन्ग टर्म के लिए सक्सेसफुल्ली रन करेगी. high quality content कैसे लिखे जानने के लिए मेरा आर्टिकल पढ़े.
  • हमेशा अपने यूजर को सही और सटीक इनफार्मेशन देने की ही कोशिश करे गलत और अधूरी जानकारी कभी ना दे. क्योकि गलत और अधूरी जानकारी देने पर विजिटर वापस नहीं आयेंगे.
  • विजिटर को quality content देने में समय लगेगा लेकिन जब एक बार विजिटर आप से जुड़ जायेगा तो वह आपकी साईट पर ज्यादा समय बिताएगा जिससे bounce rate कम हो जायेगा.
  • अपने content में प्रॉपर रूप से headings और subheadings का इस्तेमाल करे.इसमे प्रॉपर इमेजेज का भी यूज़ करे. ध्यान रखे की content में कोई कोई spelling, grammar से सम्बंधित कोई मिस्टेक ना हो.
  • high quality content का मतलब यह भी है की आप विजिटर को कभी भी धोखा ना दे, यानी की आर्टिकल के पोस्टर में और heading में आप कुछ बताये और अन्दर content कुछ और ही टॉपिक पर हो. यदि आप ऐसा करते है तो आप भूल कर कर भी ट्रैफिक के बारे में ना सोचे.

4- ब्लॉग या वेबसाइट का पेज लोड टाइम कम रखना

यदि आपके साईट का पेज लोड टाइम ज्यादा है अर्थात आपका साईट ओपन होने में या इसके अन्य पेज ओपन होने में ज्यादा समय लेता है तो विजिटर उस ब्लॉग के आर्टिकल को पढ़ने से पहले ही उसे बंद कर देगा जिससे bounce rate high हो जायेगा. SEO के लिए भी पेज लोड टाइम कम होना बेहतर माना जाता है.

  • PERFECT LOADING TIME- 1 Second or Less
  • ABOVE AVERAGE - 3 Second or Less
  • AVERAGE - 7 Second or Less
  • VERY POOR - More than 7 Second

यदि आप चाहते है की विजिटर आपकी ब्लॉग से खुश रहे तो आप को अपने blog का पेज लोडिंग टाइम perfect या above average रखना होगा.

5- internal link पर फोकस करे.

  • यदि आप अपने आर्टिकल के बीच-बीच में internal लिंक नहीं डालते है तो आपके blog का bounce rate बढ़ जायेगा.
  • इसीलिए नए आर्टिकल में पुराने आर्टिकल का लिंक हमेशा ऐड करे. जिससे विजिटर को अन्य रिलेटेड पोस्ट भी पढ़ने को मिल जाये. internal लिंक कौन सा डालना है यह आप पर निर्भर करता है.
  • यदि आपने अपने आर्टिकल में internal लिंक डाले है तो हमेंशा इस बात का ख्याल रखे की जैसे ही उस लिंक पर विजिटर क्लिक क्कारे तो वह लिंक एक नयी विंडो या टैब में ही ओपन हो. जिससे bounce rate काफी तेज़ी से कम होता है.
यही bounce rate kam karne ke top 5 aasan tarike है, जिनको आप अपना कर अपने ब्लॉग या वेबसाइट का bounce rate को काफी हद तक कम कर सकते है.
high quality content कैसे लिखे ?
free web hosting के फायदे और नुकसान
google keyword planner से keyword research कैसे करे?
google drive से high quality backlinks कैसे बनाये?
blog post के लिए keyword research कैसे करे?

Conclusion

मुझे उम्मीद है की आप आज का यह आर्टिकल bounce rate kya hota hai? और bounce rateko kaise kam kare? जरुर पसंद आया होगा यदि इस post से सम्बंधित कोई प्रश्न हो तो कमेंट box के जरिये जरुर पूछे. हमारी post के प्रति प्रसन्नता दर्शाने के लिए इसे अपने सोशल नेटवर्क Facebook, Google+, और Twitter पर इसे जरुर शेयर करे.
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बुधवार, 28 जून 2017

High quality content kaise likhe

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दोस्तों यदि आप ब्लॉग्गिंग करते है या  करने की सोच रहे है तो आप को पता होना चाहिए की high quality content kya hota hai? और high quality content kaise likhe? यदि आप आर्गेनिक ट्रैफिक के बारे में सोच रहे है की कैसे अपने ब्लॉग पर बढाई जाये तो इसके लिए आपको high quality content लिखना होना. क्योकि इसके बगैर आर्गेनिक ट्रैफिक नहीं बढ़ सकती है. क्योकि  बगैर high quality content के आपका आर्टिकल सर्च इंजन में रैंक नहीं करेगा, जिसके कारण ट्रैफिक नहीं बढेगी. और यदि आप के ब्लॉग पर ट्रैफिक नहीं है तो आपका ब्लॉग सक्सेस नहीं होगा.

high quality content kya hota hai?

जब कोई भी आर्टिकल इस तरह से लिखा जाये की रीडर को उसे पढ़ के समझने में आसानी हो और वह आर्टिकल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के लिए एकदम तैयार हो तो इस प्रकार से लिखे गए आर्टिकल को ही high quality content कहते है.
मान लीजिये अपने कोई आर्टिकल लिखा है और उसे कोई रीडर पढ़ा लेकिन उसके समझ में कुछ नहीं आया. तो वह विजिटर दुबारा आपके ब्लॉग नहीं पर आयेगा. इसीलिए जब भी कोई आर्टिकल लिखे तो विजिटर को ध्यान में रख कर ही लिखे. क्योकि आप आर्टिकल अपने लिए नहीं विजिटर के लिए लिख रहे है.

 high quality content se kya fayda hai?

  • एक high quality content वाला आर्टिकल विजिटर को तो पसंद आयेगा ही इसे सर्च engine भी पसंद करता है, और यह सर्च इंजन में high रैंकिंग को प्राप्त करता है. 
  • एक high quality content ज्यादा विजिटर को आकर्षित करता है.
  • इससे नए विजिटर ब्लॉग पर दुबारा आते है. 
  • high quality content से ब्लॉग सर्च इंजन में high rank पाता है. जिससे google rank इम्प्रूव होता है.
  • Alexa rank भी इससे इम्प्रूव होता है.
  • यदि आप Adsense का यूज़ करते है तो Adsense CPC increase होता है. जिससे एडसेंस इनकम बढ़ जाता है.
  • blog के ब्रांड को इम्प्रूव करता है. जिससे ब्लोगिंग के क्षेत्र में blog को एक नयी पहचान मिलती है.

high quality content kaise likhe?

अब आप जान गए होंगे की high quality content ब्लॉग के लिए क्यों जरुरी है. क्योकि यही एक तरीका है जिससे विजिटर सीधे सर्च इंजन से आते है. और ब्लॉग का आर्गेनिक ट्रैफिक बढ़ता  जाता है.  तो चलिए हम आपको वह तरीका बताते है जिससे आप high quality आर्टिकल अपने blog के लिए लिख सकते है.

#1- Topic Research kare

आर्टिकल लिखने के पहले आप एक टॉपिक या विषय चुने जिस पर आप को आर्टिकल लिखना है. टॉपिक ऐसा हो जिसका डिमांड ज्यादा हो मतलब वह सर्च engine में ज्यादा खोजा जा रहा हो. यदि आप किसी ऐसे टॉपिक पर लिखते है. जिसकी डिमांड ज्यादा नहीं है तो आप ज्यादा आर्गेनिक ट्रैफिक नहीं प्राप्त कर पाएंगे.
टॉपिक को सर्च करने के लिए आप सर्च इंजन या सोशल नेटवर्किंग साईट का सहारा ले सकते है. और अच्छे टॉपिक पा सकते है.

#2- attractive heading likhe

यदि आपने टॉपिक सर्च कर लिया है तो अब आप उस टॉपिक से सम्बंधित एक attractive heading लिखे. heading ऐसा होना चाहिए की उसको पढ़ के ही पता चल जाये की आर्टिकल किस विषय या टॉपिक पर है.
क्योकि टॉपिक का जिक्र  heading में सही नहीं होगा तो विजिटर कंफ्यूज हो जायेंगे और वह आपके ब्लॉग से तुरंत ही वापस चले जायेंगे. जिससे ब्लॉग का बाउंस रेट high हो जायेगा जो आपके ब्लॉग के लिए सही नहीं है.

#3- badhiya format me article likhe

जब आप टॉपिक चुन लिए और उस टॉपिक के हिसाब से एक heading भी लिख लिया तो अब आप एक बढ़िया फॉर्मेट में आर्टिकल लिखना शुरू कर सकते है. आर्टिकल को सबसे पहले आप चाहे तो नोट बुक पर लिख सकते है. आर्टिकल ऐसा हो जो टॉपिक को शुरू से अंत तक कवर कर सके. और रीडर कंफ्यूज भी ना हो.

#4- article me H1, H2, H3, H4 ka use kare

आर्टिकल में जो आपका मुख्य हैडिंग  होता है उसे हमेशा ही h1 tag में ही लिखे. और पूरे आर्टिकल में सिर्फ एक ही h1 tag होना चाहिए. इसके बाद के हैडिंग के लिए आप h2, h3, और h4 का यूज़ करे.

#5- article me question ka use kare

आर्टिकल लिखते समय बीच-बीच में question का यूज़ जरुर करे. जैसे मैंने इस आर्टिकल में लिखा है. high quality content kya hota hai? high quality content kaise likhe? इसी तरह के question के द्वारा आप अपने टॉपिक को सरल शब्दों में समझाने का प्रयाश करे.

#6- basic se start kare

आप जिस भी टॉपिक पर आर्टिकल लिख रहे हो. उसे शुरू से शुरू करे.  मतलब यह की टॉपिक के बेसिक चीजो को शुरू में जरुर बताये. जैसे मैंने अपने इस आर्टिकल high quality content kaise likhe? में पहले यह बताया है की high quality content kya hota hai?

#7- use images and video

आप जिस भी टॉपिक पर लिख रहे  है उस टॉपिक से सम्बंधित इमेज आर्टिकल में जरुर इस्तेमाल करे. यदि कोई टुटोरिअल  टॉपिक है तो उस टुटोरिअल के प्रत्येक के step को इमेज से जरुर समझाए. आप तो जानते ही होंगे एक इमेज 100 शब्दों के बराबर होता है. यदि टॉपिक को समझाने के लिए विडियो का इस्तेमाल करते है तो और भी अच्छा है.

#8- write article above 700 word

यदि आप high quality content लिखने की सोच रहे है तो आप जिस भी टॉपिक पर लिखे उसे पूरा लिखे आधा अधुरा आर्टिकल कभी भी शेयर ना  करे. यदि आप एक high quality content वाला आर्टिकल लिख रहे है तो वह कम से कम 700 शब्दों का होना चाहिए. लेकिन इसका मतलब  यह बिलकुल भी नहीं है की आप बेवजह ही अपने आर्टिकल को लम्बा खिचे.

#9- read before publish

जब आपका high quality content वाला आर्टिकल रेडी हो जाये तो आप उसे पब्लिश करने के पहले एक बार जरुर पढ़ ले. ताकि यदि कही कोई grammar या spelling मिस्टेक को तो उसे ठीक किया जा सके.

#10- use long tail keywords

अपने आर्टिकल में long tail keywords यूज़ करना का एक बहुत ही बढ़िया फायदा है की इससे छोटे keyword उसी के साथ सर्च इंजन में rank कर जाते है. keyword रिसर्च के लिए आप google adwords keyword planner tool का इस्तेमाल कर सकते है. यह एक free tool है. जिसक इस्तेमाल keyword research के लिए किया जाता है.

#11- write search engine friendly articles

यदि आप अपने ब्लॉग को लेकर काफी सीरियस है और उसे एक कैरियर के रूप में चाहते है तो आपको हमेशा search engine friendly articles लिखना होगा. क्योकि बगैर इसके आप सर्च इंजन में आप अच्छी रैंकिंग नहीं प्राप्त कर सकते है. और बगैर अच्छी रंकिंग के आर्गेनिक ट्रैफिक नहीं बढेगी.

SEO friendly article kaise likhe

  • अपने आर्टिकल में हमेशा meta tag यूज़ करे.
  • article में long tail keywordsका इस्तेमाल करे.
  • h1, h2, h3, h4 इन heading tag का सही से उसे करे. 
  • आर्टिकल के प्रत्येक इमेज में alt tag का इस्तेमाल करे.
  • यदि आप अपने ब्लॉग को वर्डप्रेस पर होस्ट किये है तो आप yoast SEO plugin का इस्तेमाल कर सकते है. 

conclusion

मुझे उम्मीद है की आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे की एक High quality content kaise likhe. और यह आर्टिकल आप लोगो को जरुर पसंद आयेगा.  यदि इस बारे में आप लोगो को कोई चीज़ न समझ में आई हो तो आप कमेंट box के जरिये हमें जरुर बता सकते है. 
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मंगलवार, 27 जून 2017

blog or facebook page ka qr code kaise banaye

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दोस्तों आज हम बताएँगे की आप अपने blog or facebook page ka qr code kaise banaye.  How to generate qr code for Blog or facebook page In Hindi? आज इस आर्टिकल के माध्यम से आप लोगो को दो  फेमस वेबसाइट के बारे में बताएँगे जिससे आप अपने blog या facebook page के लिए qr code generate कर सकते है. और इनके द्वारा आप केवल अपने blog और facebook page का ही नहीं वरना youtube, location, text message, phone number, visitng card, wifi password के लिए भी qr code generate कर सकते है.

qr code किन -किन चीजों का बना सकते है.

blog और website का  qr code generate कर सकते है.

इसे अपने advertise के बैनर या बिज़नस कार्ड में यूज़ कर सकते है.  जिससे कोई भी इसे स्कैन कर सीधे आपके ब्लॉग या वेबसाइट पर पहुच सकता है.

location/address/map का qr code generate कर सकते है.

यदि आप चाहे तो अपने लोकेशन, address या map का qr code बना कर के इसका इस्तेमाल कर सकते है.
icard or visiting card का qr code बना सकते है.
यदि आप अपने एम्प्लोयी या स्टूडेंट के के लिए icard या विजिटिंग कार्ड बनाना चाहते है और यह भी चाहते है की उस कार्ड की साइज़ भी छोटा रहे तो आप अपने एम्प्लोयी या स्टूडेंट की साड़ी डिटेल के साथ पिक्चर को एक qr code में रख सकते है.


wifi password के लिए qr code

यदि आप अपने घर या ऑफिस में wifi hotspot लगा रखे है तो आप अपने wifi के पासवर्ड को qr code में स्टोर कर के रख सकते है. जिससे आप को उस पस्स्स्वोर्ड को बताना ना पड़े और उसका सभी यूज़ भी आसानी से कर ले.

Phone Number और message के लिए qr code

यदि आप चाहते है की आपके मेसेज या फ़ोन नंबर प्राइवेट रहे तो आप उसके लिए भी qr code generate कर सकते है. जिससे उसे हर कोई नहीं पढ़ पायेगा.

social media or Youtube

यदि आप यह चाहते है की अपने सोशल मीडिया जैसे facebook, twitter, google plus आदि के लिए भी qr code generate कर सकते है. यहा तक की आप अपने youtube चैनल या उसके किसी विडियो के लिए भी qr code को generate कर सकते है.  इस का प्रयोग करके विडियो को वायरल भी किया जा सकता है.

qr code kaise generate kare.  या  qr code kaise banaye

वैसे तो बहुत से वेबसाइट है जो qr code को generate करती है लेकिन दो ऐसी वेबसाइट है जो काफी फेमस है. और काफी बेहतर सुविधा भी देती है.

  1.  https://www.qr-code-generator.com
  2.  https://www.qrcode-monkey.com

1- https://www.qr-code-generator.com

Step 1- www.qr-code-generator.com  एक बहुत ही फेमस वेबसाइट है जिससे आप जिसकी सहायता से आप url, vcard, images, pdf, mp3, message, sms सभी का qr code generate कर सकते है.  सबसे पहले इसे ओपन करे
blog-or-facebook-page-ka-qr-code-kaise-banaye-2

Step 2- website जब ओपन हो जाएगी तो आप को जिस चीज़ का qr code generate करना है उसे सेलेक्ट कर ले जैसे मुझे अपने ब्लॉग का qr code generate करना है तो मैं URL को सेलेक्ट करूंगा.
Step 3- अब अपने ब्लॉग या वेबसाइट का यूआरएल टाइप कर दे.
Step 4- यदि आप चाहते है की आपका qr code स्थैतिक हो तो आप static को क्लिक करे . और यदि आप चाहते है की आपका qr code कुछ सेकंड में बदलता रहे तो आप dynamic को सेलेक्ट करे लेकिन इसके लिए आपको पहले इस वेबसाइट पर signin करना पड़ेगा.
Step 5- create qr code बटन पर क्लिक कर दे.  अब आपका qr code दाहिने तरफ बन कर तैयार है.
Step 6-  अब दाहिने तरफ दिखाई दे रहे download बटन पर क्लिक कर दे. जिससे आपका qr code एक इमेज की तरह jpg फॉर्मेट में download हो जायेगा.
यदि आप eps या svg फॉर्मेट को download करना चाहते है तो आप पहले इस साईट में अकाउंट बनाकर signin कर ले.

2- https://www.qrcode-monkey.com

Step 1- सबसे पहले आप  https://www.qrcode-monkey.com को ओपन करे. इनमे बहुत से टैब  जैसे url, vcard, images, message, sms, location  दिखाई देंगे.
blog-or-facebook-page-ka-qr-code-kaise-banaye-3

Step 2- इनमे से जिसका आप qr code generate करना चाहते है उस पर क्लिक करे. जैसे आप को अपने ब्लॉग का qr code generate करना है तो आप यूआरएल को सेलेक्ट करे.
Step 3- अब यहाँ पर आप अपने वेबसाइट या ब्लॉग का यूआरएल address को टाइप करे.
Step 4- यदि आप qr code को कलरफुल बनाना चाहते है तो  यहाँ से कलर को सेलेक्ट कर सकते है.
Step 5- अब आप यदि चाहे तो इसमे अपने ब्लॉग का logo भी लगा सकते है. उसके लिये आपको पहले Include Logo/Image in QR-Code को टिक करना होगा उसके बाद Own logo Image पर क्लिक कर के upload image पर क्लिक करके इमेज को सेलेक्ट कर लेंगे. या पहले से predefined logo को भी लगा सकते है.
Step 6- सरे प्रोसेस को सही पूर्वक पूरा करके दाहिने तरफ के हरे रंग के बटन create qr code पर क्लिक कर देंगे. हमारे ब्लॉग का qr code generate हो जायेगा.
Step 7- अब download png बटन पर क्लिक करके इसे download कर लेंगे. और इसे जहा  चाहे यूज़ कर सकते है.

qr code kaise scan kare? या read kaise kare?

  1. qr code को स्कैन करने के लिए हम अपने स्मार्ट फ़ोन का इस्तेमाल कर सकते है बस हमें google play store से एक software qr scanner या qr code reader को अपने मोबाइल में इंस्टाल करना होगा. 
    blog-or-facebook-page-ka-qr-code-kaise-banaye-4
  2. qr code scanner को इनस्टॉल करने के लिए google play स्टोर में  qr code scanner को search कर लेंगे. 
  3. अब search लिस्ट से qr scanner जो kaspersky lab का है उसे download कर लेंगे और इनस्टॉल कर लेंगे यह लगभग 10 mb का सॉफ्टवेयर है. 
  4. अब आप इसकी सहायता से कोई भी qr code स्कैन कर सकते है.

uc browser se qr code kaise scan kare?

  1. यदि आप के मोबाइल में uc browser है तो आप को कोई भी software इंस्टाल करने की जरुरत नहीं है. आप uc ब्राउज़र की ही सहायता से किसी भी qr code को scan कर सकते है.
    blog-or-facebook-page-ka-qr-code-kaise-banaye-5
  2. uc  ब्राउज़र के दाहिने उपरी कोने पर बने आइकॉन पर क्लिक करने पर उसमे  qr scanner दिखाई देता है उसे टच करते ही आपका uc ब्राउज़र qr code scanner बन जायेगा. और आप qr code को स्कैन करने में सक्षम होंगे.
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तो आज का यह आर्टिकल blog or facebook page ka qr code kaise banaye आप लोगो को कैसा लगा. मुझे उम्मीद है की जरुर पसंदआया होगा. इसे आप अपने मित्रो के साथ जरुर शेयर करे. ताकि वे लोग भी इसका लाभ उठा सके. यदि कोई दिक्कत हो तो हमें कमेंट बॉक्स के जरिये जरुर बताइए. हमें ख़ुशी होगी.  यदि आपका कोई सुझाव या शिकायत हो तो भी आप कमेंट बॉक्स के जरिये हमसे संपर्क कर सकते है.
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सोमवार, 26 जून 2017

barcode & qr code kya hota hai? quick response code kaise scan kare

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barcode & qr code kya hota hai? quick response code kaise scan kare
आज मैं आप लोगो को बताऊंगा की  barcode & qr code kya hota hai? वैसे तो आप सभी कभी न कभी इन barcode और qr code को जरुर देखे होंगे. और अक्सर इन्हें किसी भी प्रोडक्ट के ऊपर बना हुआ देखते है. इन code को कुछ अजीब तरीके से बनाया गया होता है. और जैसे ही इन्हें स्कैन करते है ये हमें उस प्रोडक्ट के सम्बन्ध में कुछ सूचना उपलब्ध कराती है. आज हम इन्ही barcode aur qr code  के  बारे में आप लोगो को बताएँगे की कैसे यह काम करता है? barcode aur qr code ko kaise scan kare? तो आप इस आर्टिकल barcode & qr code kya hota hai? quick response code kaise scan kare को पूरा जरुर पढियेगा.

barcode aur qr code kya hota hai?

barcode kya hota hai

यह बहुत सी ब्लैक और वाइट पट्टी से बनी होती है. जो नुमेरिक फॉर्म में इनफार्मेशन को स्टोर किये होती है. यह नंबर 0 से 9 तक की कोई भी नंबर हो सकता है. लेकिन यह बहुत ही छोटी सूचना को अपने में स्टोर कर पाती है. जिसे barcode scanner की मदद से रीड करते है.
barcode scanner या barcode reader में हर लाइन की मोटाई के हिसाब एक अंक डिफाइन रहता है. और जैसे ही हम उसे स्कैन करते है तो बाइनरी नंबर सिस्टम से यह पता लगाता है की  इस  barcode में कौन सा नंबर है.
barcode का इस समय अधिकांश इस्तेमाल इन्वेंटरी मैनेजमेंट के लिए प्रयोग किया जाता है. उदहारण के लिए आप  लोगो ने देखा होगा की शोपिंग मॉल में सभी प्रोडक्ट के ऊपर एक barcode लगा होता है, और उसी के द्वारा हमें बिल भी पे करना होता है. असल में सभी प्रोडक्ट के barcode  में उन प्रोडक्ट का प्राइस रहता है.
और वह पर जो कंप्यूटर लगा होता है उसमे लगे सॉफ्टवेयर में उस प्रोडक्ट के स्टॉक और प्राइस की जानकारी होती है. और जैसे ही हम प्रोडक्ट का barcode स्कैन किया जाता है. सिस्टम अपने इन्वेंटरी में एक प्रोडक्ट को विक्री में दिखा देता है. और बिल बनाकर प्रिंट दे देता है.

qr code kya hota hai

इसका पूरा नाम quick responce code होता है. इसे जापान में डेवेलोप किया गया था इसको टोयोटा कम्पनी ने अपने कंपनी द्वारा बनाये गए ओरिजिनल पार्ट्स को ट्रैक करने के लिए 1994  .  में डेवेलोप किया. लेकिन समय के साथ साथ इसका उपयोग बढ़ता गया और आज यह advertisement, बिलबोर्ड, आधार कार्ड, सॉफ्टवेयर डाउनलोड के लिए भी किया जाने लगा है.  barcode से बिलकुल ही अलग होता है. और इसमे barcode से ज्यादा इनफार्मेशन को स्टोर किया जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है की इसमे एरर करेक्शन किया जा सकता है.

qr code का design

qr code का design बहुत ही काम्प्लेक्स होता है. यह एक चौकोर आकार का होता है. इसमे 3 एलाइनमेंट ब्लाक, टाइमिंग लाइन, एरर करेक्शन ब्लाक होता है. एलाइनमेंट ब्लाक स्क्वायर शेप में होते है. और डाटा को स्टोर करने के लिए 2*2 के 8 ब्लाक बने होते है. जिसमे डाटा स्टोर किया गया होता है.

qr code को कैसे स्कैन करें?

qr code को स्कैन करने के लिए barcode की तरह अलग से कोई scanner की जरुरत नहीं होती है. आप चाहे तो अपने android या किसी भी smartphone से भी इस qr code को स्कैन कर सकते है. इसके लिए आप google play store से से qr scanner, red laser नामक software download कर ले. और अब आपका स्मार्ट फ़ोन एक qr code scanner में बदल जायेगा. ये सॉफ्टवेयर बड़ी ही आसानी से फ़ोन के कैमरा का इस्तेमाल करके code को स्कैन करते है और उसे डिकोड करके आपको उसमे स्टोर डाटा को दिखा देते है या उसमे स्टोर यूआरएल पर पहुचा देते है.

qr code में क्या स्टोर किया जा सकता है?

हम सभी अपने pc में qr code के द्वारा ही whatsapp को यूज़ कर पाते है. या यदि किसी ब्यक्ति के आधार कार्ड की जाँच करना हो की यह सही है या नही तो आधार कार्ड पर बने qr code को स्कैन करके उसकी सही जानकारी भी पता कर सकते है.
qr code एक image based hyper link है. जिसका इस्तेमाल हम online और offline दोनों तरह से कर सकते है. इसमे हम चाहे तो किसी भी यूआरएल को एनकोड कर सकते है जिससे जब कोई ब्यक्ति उस qr code को स्कैन करेगा तो वह उस address पर चला जायेगा.
हम चाहे तो तो अपने वेबसाइट का  address या अपने फेसबुक पेज का address या youtube के किसी विडियो का लिंक, या किसी के मोबाइल नंबर को भी इसमे स्टोर कर सकते है. और जैसे ही कोई इसे स्कैन करेह्गा वह उस स्टोर लिंक पर redirect होकर पहुच जायेगा.

qr code के प्रयोग

  • इसका इस्तेमाल  एक बिज़नस कार्ड की तरह किया जा सकता है.
  • यदि किसी विडियो को वायरल करना हो तो इसे qr code में एनकोड कर दिया जाता है जिससे इसके वायरल होने के चांस बढ़ जाता है. या हम इसके द्वारा किसी प्रोडक्ट को भी प्रमोट किया जा सकता है.
  • online शोपिंग में इसका उपयोग डिस्काउंट code के तौर पर भी किआ जा सकता है.
  • इसके द्वारा मेसेज को शेयर किया जा सकता है.
  • इसके द्वारा आप अपने blog की साड़ी जानकारी इसमे एनकोड करके अपने contact us पेज पर भी रख सकते है ताकि जब कोई इसे स्कैन करे तो उसे आपके blog की पूरी जानकारी मिल सके.और वह उसे अपने फ़ोन में सेव कर सके.
  • qr code के द्वारा किसी वेबसाइट के यूआरएल को redirect किया जा सकता है.
  • qr code के द्वारा हम अपने लोकेशन को google maps लोकेशन के साथ लिंक भी कर सकते है.
  • मोबाइल में लॉग इन करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे बार बार मोबाइल में पासवर्ड नहीं डालना पड़ेगा.

qr code में security issue क्या है?

इसमे सबसे बड़ी समस्या यह है की यह security के हिसाब से बहुत ही कमजोर है इसे आसानी से बदला जा सकता है. यदि कोई हैकर चाहे तो इसे बदल कर इसमे कुछ भी यूआरएल बदल सकता है, और इसके द्वारा किसी यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर में बड़ी ही आसानी से घुस सकता है.

barcode aur qr code में अंतर

पहला अंतर तो इनके design में ही है. जहा barcode वर्टीकल लाइन में होती है. वहा qr code एक चौकोर box के रूप में होता है.
अब यदि स्टोरेज कैपेसिटी की बात करे तो barcode में 30 नंबर स्टोर हो सकते है वही qr code में 7089 नंबर को स्टोर किया जा सकता है. इसी कारण इसमे बिग फाइल्स और विडियो फाइल्स की भी स्टोर किया जा सकता है जबकि barcode में यह नहीं किया सकता है.
अब यदि स्कैन करने के तरीके की बात करे तो barcode को एक डायरेक्शन से ही स्कैन किया जा सकता है, जबकि qr code को किसी भी डायरेक्शन करे स्कैन किया जा सकता है. qr code को स्कैन करने के लिए किसी दिशा की बाध्यता नहीं है.

conclusion

मुझे उम्मीद है की आज का मेरा यह पोस्ट barcode & qr code kya hota hai? quick response code kaise scan kare जरुर पसंद आया होगा. यदि आप को यह आर्टिकल पसंद आया है तो इसे अपने मित्रो के साथ शेयर करे. जिससे उन लोगो को भी इसका लाभ मिल सके. और मुझे कमेंट बॉक्स के जरिये जरुर बताइयेगा की यह पोस्ट कैसा लगा. आपके विचार हमारे लिए बहुत महत्व रखते है. 
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रविवार, 25 जून 2017

free web hosting ke fayde aur nuksan

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free web hosting ke fayde aur nuksaan
क्या आपने कभी सोचा है की सभी बड़े ब्लॉगर free web hosting पर ब्लॉग शुरू करने का सलाह क्यों नहीं देते है और एक टॉप लेवल डोमेन के साथ ही ब्लोगिंग करने की सलाह क्यों देते है. जब हम blog या वेबसाइट को शुरू करने की सोचते है तो सबसे पहले दो चीजों की जरुरत होती है. पहला डोमेन नाम और दूसरा hosting की लेकिन आज के समय में ये दोनों चीज़े फ्री मिल रही है फिर भी बड़े ब्लॉगर के द्वारा paid सर्विस की ही सलाह दी जाती है आखिर क्यों? तो आज हम आपको बताएँगे की  इस free web hosting ke fayde aur nuksaan क्या है?

Free Web Hosting Kya Hota hai?

free web hosting किसी कंपनी के द्वारा किसी वेबसाइट के लिए hosting स्पेस और एक subdomain दिया जाता है. इस पर कोई यूजर अपना blog या वेबसाइट होस्ट कर सकता है. वो भी बिलकुल free. आज के समय में आप लोगो को internet पर ऐसी बहुत सी company मिल जाएँगी जो free web hosting उपलब्ध कराती है.  लेकिन क्या आप ने कभी यह सोचा है की ऐसा करने के पीछे कारण क्या है. क्यों कोई कंपनी आपको free web hosting देगी.

जब कोई beginner अपना blog शुरू करना चाहता है तो पहले वह free web hosting को ही खोजता है. ताकि शुरू में वह अपनी blog को कम खर्च में शुरू कर सके.  लेकिन जैसे जैसे blog पर ट्रैफिक आने लगता है वह खुद ही paid hosting के तरफ चला जाता है. तो चलिए जानते है की कंपनी free web hosting क्यों देती है और ब्लॉगर एक समय के बाद इसे क्यों छोड़ देते है.

free web hosting ke fayde aur nuksan

पहले हम बात करते है free web hosting ke fayade का.
  • इसका सबसे पहला फायदा है की आप बिना एक पैसा खर्च किये hosting पा  जाते है.
  • बिना पैसा खर्च किये आप अपने वेबसाइट या blog के लिए  एक web address भी कंपनी के द्वारा दिया जाता है.
  • आप की online identity बन जाती है वो भी बिलकुल free में.
अब हम बात करेंगे free web hosting के 11 नुकसान का.

TLD(Top Level Domain) का न होना

जितने भी free hosting वाली कम्पनीज होती है वो सभी आपको आपके वेबसाइट के web address के लिए top level domain नहीं देती है. वे आपको अपने वेबसाइट के लिए subdomain देती है. जो एक unprofessional web address होती है.  जिससे विजिटर आपके blog को सीरियसली नहीं लेते है. और यदि आप कस्टम domain के लिए कहेंगे तो वे बताते है की कस्टम domain की सर्विस paid है, free नहीं.

blog पर पूरी तरह से आपका control नहीं होता है.

जो free web hosting पर blog या वेबसाइट बनता है उसका उस वेबसाइट पर पूरी तरह से कंटोल नहीं होता है. उस पर पूरा कंट्रोल web hosting कंपनी का होता है. कंपनी अपने टर्म एंड कंडीशन में यह स्पस्ट लिखा होता है की उसे पूरा अधिकार है की वह आपकी वेबसाइट या blog को कभी भी बिना किसी नोटिस के बंद कर सकती है. और blog के डाटा का बैकअप देने के लिए भी बाध्य नहीं है. यहाँ तक की आप अपने वेबसाइट को redirect भी नहीं कर पाएंगे. मतलब यह की आपके वेबसाइट को आप खुद भी एक्सेस नहीं कर पाएंगे.

अनचाहे विज्ञापन का होना

free web hosting कम्पनीज आप के बनाये हुए ब्लॉग या वेबसाइट में अपने ads लगाकर पैसा बनती है. इन  ads से आपका सुन्दर वेबसाइट भद्दा दिखने लगता है, और यदि आप इससे पैसा कमाने चाहते है तो ये कम्पनी आपको अपना ads लगाने की सुविधा नहीं देती है. वेबसाइट आपका कंटेंट आपका, पैसा free web hosting कमाती है.

आपका इनफार्मेशन बेचा जा सकता है

सभी कम्पनीज को मार्किट में बने रहने के लिए पैसे की जरुरत होती है.  लेकिन आप उसके free web hosting का उसे करते है तो वे आपके email id, contents को बेच कर और आपके वेबसाइट पर ads लगाकर पैसा बना लेती है. क्योकि अधिकतर लोग इन कम्पनीज की टर्म एंड कंडीशन को पढ़ते नहीं और अग्री हो जाते है.

No or Less Security

free web hosting पर सिक्यूरिटी के नाम पर शायद ही कुछ हो जिससे हैकर का डर बना रहता है.  जिससे डाटा के चोरी होने का डर हमेशा बना रहता है. डाटा के चोरी होने पर इसका उत्तरदाई ये कम्पनीज नहीं होती है.

Limited bandwidth का होना

ऐसे free  web hosting में आपको अपने वेबसाइट के लिए बहुत ही कम बैंडविड्थ मिलता है जिससे इसके ऑपरेशन में काफी दिक्कत आती है. जो एक वेबसाइट के लिए सही बात नहीं है.

low disk space

free web hosting कम्पनीज हज़ारो की संख्या में वेबसाइट की एक ही सर्वर में होस्ट कराती है जिससे हर एक वेबसाइट के हिस्से में बहुत ही कम disk space होता है.  जिससे शुरू में तो सब कुछ सही रहता है लेकिन वेबसाइट के बढ़ने पर जब आप एक्स्ट्रा space की बात करते है तो वे अधिक पैसा मंगाते है.

वेबसाइट के design की सुविधा का कम होना.

जब आप किसी कंपनी  के free web hosting प्लान को लेते  है तो हर एक चीज़ में लिमिट होता है. यह बात आपके design पर भी लागू होता है. जिससे आप अपने वेबसाइट के लिए एक professional लुक नहीं पा सकते है.
इसमे रेस्पोंसिवे डिजाईन की भी उम्मीद करना भी एकदम बेकार है.  और यदि आप का वेबसाइट responsive नहीं है तो आप विजिटर नहीं पा सकते है. और जब तक विजिटर आप के वेबसाइट पर नहीं है तो आपका सारा मेहनत बेकार ही है. क्योकि कोई भी वेबसाइट पर ट्रैफिक का होना जरुरी है.

Customer Service का न होना

paid hosting सर्विस की तरह यहाँ पर आपको कोई कस्टमर सर्विस नहीं मिलता है यदि आप को hosting में कोई दीक्कत आती है तो आप को उस तकलीफ का उपाय खुद ही खोजना होगा. कोई सपोर्ट free web hosting की तरफ से नहीं मिलता है.

वेबसाइट लोडिंग टाइम ज्यादा होना

free web hosting सर्विस में जो भी वेबसाइट होती है उनका लोडिंग टाइम काफी ज्यादा होता है जिससे विजिटर परेशान होकर  पेज ओपन होने के पहले ही उसे क्लोज कर देते है और दुबारा उस पर नहीं आते है. जिससे आप वैल्युएबल विजिटर खो देते है. जो किसी भी वेबसाइट के लिए अच्छी बात नहीं है.  वेबसाइट के की लोडिंग टाइम ज्यादा होना search engine optimization के दृष्टी से भी अच्छी बात नहीं है.

free web hosting पर विजिटर का भरोसा  ना होना

जब आप अपने वेबसाइट को किसी free web hosting पर होस्ट किये होते है तो लोग उस पर भरोशा नहीं करते है, क्योकि उन्हें डर होता है की free web hosting कम्पनी उनके इनफार्मेशन को कही लीक कर सकती है जिससे आपके विजिटर आपके अपने इनफार्मेशन को आपके साथ शेयर नहीं करते है.

Final word

यदि आप ब्लॉग्गिंग के क्षेत्र में आगे जाना चाहते है और इससे पैसा कमाना चाहते है तो आप को कभी भी free web hosting लेने की सलाह मई नहीं दूंगा क्योकि यह सेफ और हैंडी नहीं है और इसे बढ़ने में काफी वक्त लग जायेगा. इसी लिए मेरा सलाह है की आप कभी भी यदि ब्लॉग्गिंग को एक कैरिएर के रूप में देखना चाहते है तो हमेशा paid hosting पर ही ब्लॉग्गिंग करनी चाहिए.  paid webhosting भी कम पैसे में बहुत सी कम्पनीज ऑफर कर रही है. cheap web hosting के द्वारा भी आप अपने वेबसाइट को शुरू कर सकते है.
मुझे उम्मीद है की आप लोगो को मेरा आज का यह पोस्ट free web hosting ke fayde aur nuksaan जरुर पसंद आया होगा. यदि मेरा यह पोस्ट आप लोगो को पसंद आये तो  इसे अपने मित्रो के साथसोशल मीडिया पर जरुर शेयर करे.
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गुरुवार, 22 जून 2017

google adwords keyword tool se keyword kaise search kare

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आज मै आपको  बताने वाला हूँ की google adwords keyword tool se keyword kaise search kare आप  इसका इस्तेमाल करके अपनी blog post को search engine में rank करा सकते है. आज हम आपको बताएँगे की google keyword planner tool se keyword kaise search kare. google keyword planner tool kya hota hai. google keyword planner tool kaise use kare. google keyword Planner फ्री tool है जिसके द्वारा आप बड़ी आसानी से keyword research  कर  अपने blog post को rank करा सकते है.

google-keyword-planner-se-keyword-search

चुकी google keyword planner, google adwords में होता है. जिसके द्वारा आप अपने blog या वेबसाइट के लिए विज्ञापन तैयार करके google के द्वारा प्रचार कराते है. मेरा एक सुझाव है की google adword में signin करने के पहले एक नया email id  बना कर उस नए email id से ही signin करे.
यदि आप बढ़िया आर्टिकल लिखते है और फिर भी आप के blog पर ट्रैफिक नहीं आ रही है तो आप इस post को जरुर पढ़े. यदि आप एक बढ़िया आर्टिकल लिखते है और वह search engine में rank नहीं कर रहा है तो search engine के मुताबिक आप के आर्टिकल में कोई ना कोई कमी जरुर है. जिससे आप उसमे rank नहीं कर पा  रहे है.

keyword kya hota hai. 

दरअसल keyword वे छोटे छोटे वर्ड होते है जिन्हें लोग search engine में खोजते है. और उन शब्दों के द्वारा किसी Blog post या वेबसाइट तक पहुचते है. on page seo  में इन शब्दों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है. इन keyword के द्वारा ही blog post को search engine में rank कराया जाता है.

google adwords keyword planner tool kya hota hai.

  • यह keyword planner tool हमें यह बताता है की कौन सा particular word, search engine में लास्ट इयर कितनी बार search किया गया है. या हर महीने कितनी बार search होता है.
  • जो keyword सबसे ज्यादा बार search किया जाता है उसको अपने blog post में यूज़ करने पर वह post ज्यादा लोगो तक पहुचता है. जिससे blog पर organic traffic आती है.
  • जैसे लास्ट इयर black rose बहुत से लोगो ने search किया. तो यदि इस black rose शब्द को मै अपने किसी blog post में इस्तेमाल करू तो वह post search engine के द्वारा ज्यादा लोगो तक पहुचाया जा सकता है. 
  • यह एक on page seo है, जिसके द्वारा organic traffic लाया जाता है.

google adwords keyword planner tool kaise use kare.

  1. जब आप पहली बार adwords में signin करेंगे तो वह आप से कुछ डिटेल मांगेगा. जिसे आप skip करके आगे बढ़ सकते है.
  2. सबसे पहले adwords.google.com को ओपन कीजिये.
  3. अब अपने gmail id से लॉग इन कीजिये. 
  4. जब welcome to google adwords का मेसेज दिखेगा तब आपको skip the guided setup पर क्लिक कर दे.  
    google-keyword-planner-se-keyword-search-1
  5. अब एक नया पेज ओपन होगा जहा पर save and continue पर click कर देना है.
  6. अब इसमे आप tool menu में keyword planner पर क्लिक करके इसे ओपन करे.
    google-keyword-planner-se-keyword-search-2
  7. जब यह ओपन हो जाता है तो आप Find new keyword and get search volume data के पहले आप्शन search for new keyword using a phrase website or category पर क्लिक कर इसे ओपन करते है.
    google-keyword-planner-se-keyword-search-3
  8. अब enter one or more of the following वाले box में अपने keyword को टाइप कर देते है. जैसे आप ने टाइप कर दिया black rose अब इसके बाद get idea बटन पर क्लिक कर देते है. जैसे ही रिजल्ट दिखाता है उसमे keyword, monthly search, competition, और suggested bid दिखाता है.
    google-keyword-planner-se-keyword-search-4

    google-keyword-planner-se-keyword-search-5

मान लीजिये की इसकी monthly search 10000 है, और competition medium है तो इसका मतलब यह की इस keyword को लोग search engine के द्वारा हर महीने 10000 बार search कर रहे है और competition medium का मतलब है की इस keyword को कितने लोग अपने blog post में इस्तेमाल कर रहे है. यदि competition High होता तो इसका मतलब है की इस keyword को बहुत सारे लोग अपने आर्टिकल या blog post में इसे इस्तेमाल कर रहे है और search engine में rank कर रहे है. यदि competition low होता तो इसका मतलब की इस keyword को बहुत कम लोग इस्तेमाल कर रहे है.

keyword planner में  search समय कुछ ध्यान रखने योग्य बातें.

  • google keyword planer में जिस keyword को अपने search किया यदि उसका competition high है तो उस रिजल्ट की निचे उस keyword से सम्बंधित बहुत सारे दुसरे keyword की लिस्ट भी दिखाता है. जिसमे से आप कोई low competition का keyword चुन सकते है.
  • यदि आप google keyword planer में दिख रहे low competition वाले keyword का इस्तेमाल  करके आप कोई blog post लिखते है तो SERP (search engine result page) me जल्दी ही rank कर जायेगा.
  • एक high competition के keyword की जगह आप यदि low competition वाले 4 या 5 keyword का इस्तेमाल करके यदि कोई blog post लिखते है तो आपका आर्टिकल हर keyword से search engine में rank कर जायेगा और पर्याप्त ट्रैफिक भी मिल जाएगी.

google adwords keyword planner tool ki विशेषता

  1. इसकी मदद से आप किसी keyword के search volume का पता कर सकते है, की search engine में इससे रिलेटेड वर्ड को कितनी बार search किया गया है.
  2. आप किसी particular keyword का कम्पटीशन चेक कर सकते है की यह high, low, या medium है.
  3. इससे आप यह भी पता कर सकते है की इस particular keyword पर advertiser एक क्लिक के लिए कितना पैसा खर्च कर रहे है. 
  4. आप किसी एक देश के लिए भी keyword का search volume, competition, bid rate पता कर सकते है. 
  5. यदि आप इंग्लिश के अलावा अन्य लैंग्वेज जैसे हिंदी में blog post लिखते है तो हिंदी के लिए भी keyword खोज सकते है. 
  6. कोई keyword google के अलावा bing, yahoo, msn में हर महीने कितने बार search किया जा रहा है. इसका भी पता कर सकते है.


Conclusion

मुझे उम्मीद है की आप लोगो को मेरा यह पोस्ट google keyword planner tool se keyword kaise search kare, आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. अब आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे की  google keyword planner tool kya hota hai. google keyword planner tool kaise use kare. और आप लोग इसका इस्तेमाल करना भी जान गए होंगे. यदि कोई दिक्कत हो तो आप कमेंट box के जरिये हमसे संपर्क करे हमें आपकी सहायता करने में ख़ुशी होगी. आप इसे अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर करे.
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बुधवार, 21 जून 2017

oem kya hota hai? original equipment manufacturers

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oem-kya-hota-hai-odm-kya-hota-hai-rebranded-product-kya-hota-hai
अक्सर आप लोग सोचते होंगे की किसी ब्रांडेड कंपनी का फ़ोन महंगा और लोकल कम्पनीज या chines phone इतने सस्ते क्यों होते है. तो यह oem aur odm के कारण होता है. और हम आप लोगो को बताएँगे की oem kya hota hai? original equipment manufacturers. odm kya hota hai? original design  manufacturers. Electronics की दुनिया में कैसे product बनाये जाते  है. original equipment manufacturers कौन होता है. original design manufacturers कौन होता है. कैसे आपको  rebranded और copy फ़ोन देखने को मिल जाते है.

oem kya hota hai?

दुनिया की कोई भी कंपनी जिस चीज़ का प्रोडक्शन करती है उसके सभी पार्ट को नहीं बनाती है. या दुसरे शब्दों में कहे तो कोई भी कंपनी अपने प्रोडक्ट के सभी चीजों को खुद नहीं बना सकती है.  उदहारण के लिए मान लीजिये की आपके पास एक dell का laptop है. तो आपको क्या लगता है की उस laptop के अन्दर लगे सभी पार्ट जैसे motherboard, ram, हार्डडिस्क, processor, सभी को dell company ने ही बनाया है.
या यह मान लीजिये की iPhone जो apple कंपनी का एक बेहतरीन फ़ोन है. उसे apple कंपनी ने अपने फैक्ट्री में बनाया है. कोई भी कंपनी अपने प्रोडक्ट के सभी पार्ट को नहीं बना सकती है. वह कुछ पार्ट को अन्य कम्पनीज से मंगाती है.
यहाँ पर आपको दो बातो का ध्यान रखना होता है. एक oem concept और दूसरा odm concept

oem concept-

oem का पूरा नाम original equipment manufacturers होता है मान लीजिये मुझे एक प्रोडक्ट बनाना है, जैसे कोई स्मार्ट फ़ोन, या कोई motherboard, या कोई भी चीज़. लेकिन मेरे पास ऐसी facilities नहीं है की मैं उन्हें अपने पास बना सकू. लेकिन मेरे पास complete idea है, एक complete concept है. मैं और मेरी पूरी टीम उस पर काम करती है. पूरी रिसर्च करती है. उसे अपने कंप्यूटर में पूरी तरह से design किया. लेकिन manufacture नहीं कर सकता. अब ऐसी स्थिति में मैं उसे किसी और company को देता हूँ की ताकि वह मेरे design का या मेरे specification पर एक प्रोडक्ट manufacture करके रेडी कर दे.
यह ठीक वैसे ही है जैसे आपको एक chair बनवानी है, और आप किसी कारपेंटर के पास गए और उसे यह बताया की यह chair कैसी दिखेगी, कितनी height की होगी. और कारपेंटर आपके बताये design पर आपको एक chair बना कर दे देता है.
oem में भी इसी प्रकार कोई कंपनी प्रोडक्ट को design करती है, और किसी अन्य कंपनी से अपने design पर प्रोडक्ट को तैयार कराती है. लेकिन उस प्रोडक्ट के सारे अधिकार जिस कंपनी ने design किया है उसके पास होता है. जैसे apple का oem foxcon है जो apple के दिए गए design पर उसके लिए प्रोडक्ट को तैयार करती है लेकिन उस प्रोडक्ट का सारे अधिकार apple के पास होता है.
oem में एक चीज़ यह भी है की मान लीजिये आपके कंप्यूटर में harddisk tosiba की लगी है. ram आपका dlink का है, और processor intel core i5 का है तो इन particular पार्ट के oem उनके कंपनी ही होंगे जो उन्हें बनाये है. अर्थात intel core i5 के लिए oem है.

odm concept

odm का पूना नाम original design  manufacturers होता हैodm में क्या होता है की आपके पास एक idea है, की आप एक ऐसा प्रोडक्ट बनाना है. लेकिन आप उसे design नहीं कर सकते है, और न ही उसे आप manufacture कर सकते है. क्योकि आपके पास इस प्रकार की कोई facilities नहीं उपलब्ध है. जैसे आपको एक फ़ोन manufacture करना है लेकिन सिर्फ एक idea है.
उस स्थिति में आपने क्या किया की आप एक कंपनी को कांटेक्ट किया की मुझे एक phone बनवाना है. और उस कंपनी को आप ने अपने सारे specification बता दिए. अब यहाँ पर odm जो है वो पूरा काम करते है और वही आपको design suggest करते है की इस स्पेसिफिकेशन पर इस design का ऐसे phone बना सकते है.
उसके बाद आप आर्डर दीजिये, logo दीजिये, जो box बोलिए और odm उस चीज़ में वह प्रोडक्ट तैयार करके आपको दे देगा. लेकिन यहाँ पर client company के पास ज्यादा control नहीं होता है, यहाँ पर उस फ़ोन में उस सारे ip उस odm के ही होते है. सारे पेटेंट भी उस odm के पास ही होते है.
laptop की दुनिया में दो odm quanta और compale है. ये दोनों कम्पनीज दुनिया के बड़े बड़े कम्पनी के लिए लिए laptop बनाती है. जैसे Dell को एक allienware बनवाना है, तो वह quanta से संपर्क करेगा और कहेगा की मेरे पास यह idea है और इस पर कैसे कोई allienware बन सकता है.  अब quanta dell के idea के हिसाब से एक system का design तैयार करेगा. और उसे manufacture कर के dell को डिलीवर कर देगा और dell उसको मार्किट में अपने नाम से बेचने का काम करेगा.
यहि कम्पलीट oem aur odm का concept है.

odm से हानि

odm से जहा तक हानि का सवाल है तो हानि तो पब्लिक का होता है. क्योकि इसमे कोई भी research एंड development का कोई कार्य नहीं होता है. पहले से ही बनी बनाई चीजों को बस अपने नाम का ठप्पा लगा के बेच दिया जाता है. और फायदा कंपनी का होता है.
research and development
जब कोई कंपनी किसी प्रोडक्ट को बनाने से पहले  research करने के बाद किसी कंपनी से उसे डेवेलोप कराती है तो इसे ही research and development या R&D कहा जाता है.

rebranded  or copy products क्या होता है?

odm में कोई भी research client साइड में नहीं किया जाता है. बस आप किसी odm के पास गए और उसे आपने बताया की आपको एक फ़ोन बनवाना है तो odm ने पहले से तैयार design और मॉडल को आप से दिखाया आपने जिस भी design पर उंगली रखी. odm आपके बताये logo और box में प्रोडक्ट को आपके पास डिलीवर कर देंगे.
यदि कोई दूसरी कंपनी भी जाती है और उसे भी वही फ़ोन पसंद आ गया तो odm उसी फ़ोन को फिर दूसरी कंपनी के logo और box में तैयार करके डिलीवर कर देंगे.  इस प्रकार के ही प्रोडक्ट को rebranded प्रोडक्ट या copy प्रोडक्ट कहते है. जो बाहर से से अलग दिखाते है लेकिन  अन्दर से सब एक जैसे होते है.

conclusion

मुझे उम्मीद है की आप logo को oem kya hota hai? odm kya hota hai? rebranded products or copy products kya hota hai. complete oem aur odm ka concept kya hai? आप लोगो को पूरी तरह से समझ में आ गया है. आज के इस भौतिक युग में अधिकतर companies पैसा बनाने के चक्कर में research and development को छोड़ कर rebranded या copy प्रोडक्ट को अपने नाम से मार्किट में उतारकर पैसा बना रही है.  
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मंगलवार, 20 जून 2017

oneplus 5 ki puri jankari hindi me

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One-Plus-5-Launch-Date-Specification-Price-Detail-Hindi

oneplus 5 ki puri jankari hindi me

आप सब में से कुछ लोगो को One Plus 5 फ़ोन का इंतजार होगा. या जो लोग इस फ़ोन का इंतजार कर रहे है उनके लिए एक खुश खबरी है. India में One Plus 5 को Amazon कंपनी के इस फ़ोन के ऑफिसियल लांच डेट को बताया है की यह फ़ोन भारत में 22 June 2017 को लांच किया जायेगा और इस online shopping website पर सेल्स के लिए उपलब्ध भी होगा. One Plus Company ने अपने फ़ोन One Plus 5 को international मार्किट में लांच करने के बाद 22 June 2017 को भारत में भी लांच करेगा.लेकिन इस फ़ोन की कीमत के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है. लेकिन जहा तक उम्मीद है की इस फ़ोन की कीमत लगभग 39000.00 INR होगी.

One Plus 5 Full Specification detail Hindi

मिली जानकारी के मुताबिक इस फ़ोन के दोनों कैमरा 16 मेगा पिक्सेल के हो सकते है. कुछ रिपोर्ट के मुताबिक इस फ़ोन में 20 megapixel का ड्यूल कैमरा का सेटअप हो सकता है. इसके कैमरा के डिजाईन iPhone 7 से inspired है. जो इस फ़ोन की एक बड़ी खासियत है. इस फ़ोन के जहा तक Ram और Storage की बात करे तो संभावना है की Ram 8GB और Internal Storage 128 GB की हो सकती है. यदि इसके बैटरी की बात करे तो इसमे 4000 mAh की बैटरी कैपेसिटी मिल सकती है. जो एक Non removable बैटरी होगी.
यदि फ़ोन के स्क्रीन की बात की जाये तो One Plus 5 में  5.5 inches की Super Amoled स्क्रीन आ सकती है. यदि One Plus 5 के processor की बात करे तो इसमे Qualcomm Snapdragon 835 processor मिलेगा जो 2.35GHz की फ्रीक्वेंसी पर काम करती है.यह एक octa core processor hai. यदि सोनी कंपनी के एक्सपेरिया z प्रीमियम फ़ोन को छोड़ दिया जाये तो किसी भारत में किसी चीनी कंपनी के द्वारा Qualcomm Snapdragon 835 processor पर लाया गया यह पहला फ़ोन होगा.
यह android के 7.1 पर बेस्ड होगा और Oxygen OS के स्किन पर काम करेगा. अपने इस नए फोन one plus 5 में यह सारी चीज़े देती है तो आने वाला फ़ोन बहुत ही बेतरीन साबित होगा. यदि इसके कीमत की बात करे तो यह थोड़ी सी महँगी है. लेकिन इसके अब तक मिली full specification के हिसाब से देखा जाये तो बेहतर कीमत में एक बढ़िया फ़ोन है.
फिलहाल देखते है की कंपनी कैसा फ़ोन ला रही है. लेकिन जहा तक सोशल मीडिया का पर इस फ़ोन के चर्चे की बात है तो यह काफी लोकप्रियता पा चूका है. बाद इंतजार है इसे भारत में लांच होने की. आइये हम आपको इसके संभावित specification के बारे में बताते है-
General

Form factor -Touchscreen
Dimensions (mm) -152.70 x 74.70 x 0.00
Weight (g) -7.00
Battery capacity (mAh)- 4000
Removable battery- No
SAR value -NA
DISPLAY Screen size (inches)- 5.50
Touchscreen- Yes
Resolution 1440x2560 pixels

HARDWARE
Processor- 2.35GHz octa-core Processor make Qualcomm Snapdragon 835
RAM -8GB
Internal storage -64GB
Expandable storage- No
Expandable storage up to (GB)- 128
Rear camera- 23-megapixel
Flash- Yes
Front camera -16-megapixel
SOFTWARE
Operating System Android 7.1 Skin OxygenOS

CONNECTIVITY
Wi-Fi - Yes
Wi-Fi standards supported 802.11 a/b/g/n/ac
GPS- Yes
Bluetooth -Yes, v 4.20
NFC- No
Infrared- No
USB OTG- Yes
Headphones -3.5mm
FM- No
SIM
Number of SIMs- 2
 SIM1 Type Nano-SIM
GSM/CDMA GSM 3G Yes
4G/ LTE Yes Supports 4G in India (Band 40)
No SIM 2 SIM Type Nano-SIM GSM/CDMA GSM 3G Yes 4G/ LTE Yes
Supports 4G in India (Band 40) No

SENSORS
Compass/ Magnetometer Yes
Proximity sensor Yes
Accelerometer Yes
Ambient light sensor Yes
Gyroscope Yes

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गुरुवार, 15 जून 2017

OTG kya hota hai? OTG Cable ke top 10 uses (Hindi)

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OTG kya hota hai? OTG Cable ke top 10 uses (Hindi)
दोस्तों क्या आप जानते है की OTG kya hota hai ?  What is OTG in Hindi. आज  हम     आप  लोगो को OTG के बारे में जानकारी देंगे की यह क्या होता है? इस OTG के हम क्या क्या कर सकते है. अर्थात OTG Cable ke TOP 10 Uses के बारे में आप लोगो को बताएँगे. अगर आपके पास android मोबाइल है,
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मंगलवार, 13 जून 2017

Airbag kya hota hai aur kaam kaise karta hai

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Airbag kya hota hai

Airbag kya hota hai. Airbag kaam kaise karta hai.

हम सभी car में सफ़र तो करते ही है. आप सब airbag का नाम तो जरुर सुना होगा. लेकिन क्या आप जानते है की airbag kya hota hai aur kaam kaise karta hai. आज का हमारा यह आर्टिकल इसी विषय पर है की airbag kya hota hai aur kaam kaise karta hai. और हम आपको यह बताएँगे की कैसे यह accident होने पर हमारी सुरक्षा करता है. आखिर इसके पीछे की science क्या है.
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iOS 11 Feature Updates 2017 in Hindi

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iOS-11-Feature-Updates-2017

Apple iOS 11 Feature Updates 2017 in Hindi

जो लोग Apple iPhone का इस्तेमाल करते है उनके लिए आज एक खुश खबरी है.  Apple एक इवेंट के द्वारा अपने Oprating system iOS 11 Feature Updates के बारे में जानकारी दिया है. लेकिन यह iOS 11 India में  कब लांच होगा इसकी कोई जानकारी नहीं दिया है.  इस Apple Event के होने से और iOS 11 Feature Updates के आने से हमें यह तो पता चल गया की बहुत जल्द ही हमें iOS के latest updates मिलाने वाले है.
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