सोमवार, 31 जुलाई 2017

MX Player Error AC3 Audio Format Not Supported ko Fix/Solve Kaise Kare?

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दोस्तों आप में से बहुत से लोग एंड्राइड मोबाइल यूज़ करते होंगे, और इसमे मूवी भी देखते होंगे. आप सब मूवी देखने के लिए क्या Mx Player का इस्तेमाल करते है? यदि आप Mx Player का इस्तेमाल करते होंगे तो कभी कभी जब आप ड्यूल ऑडियो वाली मूवी ओपन करते होंगे तो Mx Player एक एरर AC3 Audio Format Not Supported देता होगा. और उस मूवी में साउंड नहीं आता होगा. आज हम आप लोगो को बताएँगे की आप MX Player Error (AC3 Audio Format Not Supported) ko Fix/Solve Kaise Kare?
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रविवार, 30 जुलाई 2017

TrueCaller kaam kaise karta hai? Crowd Sourcing

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TrueCaller-Crowd-Sourcing
दोस्तों आप लोग TrueCaller का नाम तो जरुर सुने होंगे और आप में से कुछ लोग इसका किये होंगे या कर रहे होंगे. इस एप्प की सबसे बड़ी खासियत यह है की इसके रहते कोइ आपको अनजान नंबर से कॉल नहीं कर पायेगा. जैसे ही कोई काल आपके मोबाइल पर आएगी वह नंबर आपके मोबाइल में सेव हो या न हो उस नंबर को उसे करने वाले का नाम आपके मोबाइल में आ जायेगा. हम आज आपको बताएँगे की TrueCaller kaam kaise karta hai? आखिर कैसे यह एक ऐसे इंसान का नाम जो हमारे फ़ोन के contact में नहीं उसके नाम  भी पहले ही बता देता है.
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शनिवार, 29 जुलाई 2017

Cloud Computing kaam kaise karta hai, iska istemal kaise kare?

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दोस्तों आप लोग cloud computing का नाम तो जरुर सुना होगा लेकिन क्या आप जानते है की Cloud computing kya hota hai? Cloud Computing kaam kaise karta hai? आज मैं इसी के बारे में आप लोगो को बताऊंगा की कैसे यह काम करता है? Cloud Computing को हम कैसे यूज़ कर सकते है? कही ऐसा तो नहीं है की कही बदलो में कुछ लगा है या यह technology कहा से आई है.
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शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

OCR Handwriting Recognition kya hai?

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दोस्तों क्या आप जानते है की OCR (optical character recognition) Handwriting Recognition kya hota hai? कैसे हमारा कंप्यूटर हाथ से लिखे हुए अक्षरों को पहचान लेता है, और उन्हें एडिट करने योग्य फोर्मेट में बदल देता है जिससे हमें वह डॉक्यूमेंट टाइप नहीं करना पड़ता है. आज हम इसी के बारे में आप लोगो को बतायेगे की यह किस प्रकार से अक्षरों की पहचान करता है.
जब हम लोग किसी भी डॉक्यूमेंट को देखते है तो उसे बहुत ही आसानी से एक एक अक्षर को पद लेते है और यह जान जाते है की इसमे क्या लिखा है. लेकिन क्या आप ने कभी सोचा है की एक कंप्यूटर कैसे हाथ से लिखे हुए अक्षरों को पढ़ कर उन्हें एडिट करने वाले अक्षरों में बदल देता है.
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गुरुवार, 27 जुलाई 2017

Augmented Reality aur Microsoft Hololens kya hai?

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दोस्तों क्या आप जानते है की Augmented Reality aur Microsoft Hololens kya hai? यदि जानते है तो ठीक है, और यदि नहीं जानते है तो आज हम आपको बताएँगे की Augmented Reality kya hai? aur isaka kya fayda hai? आप सभी यदि Augmented Reality को नहीं सुने है या नहीं जानते है तो कोई बात नहीं लेकिन virtual reality को तो जानते ही होंगे और इसके विषय में जरुर सुना होगा. और आप में से बहुत से लोग VR set का यूज़ भी करते होंगे.
virtual reality और Augmented Reality दोनों में कुछ समानताये है. लेकिन दोनों में बहुत बड़ा फर्क भी है. तो सबसे पहले हम यह जान लेते है की Augmented Reality क्या है?


Augmented Reality kya hota hai?


मान लीजिये की आप अपने घर में है और इस technology के द्वारा आप video देखना चाहते है, तो आप इसे अपने कंप्यूटर या मोबाइल screen से खीच कर दीवाल पर या फेक दे या दरवाजे में फेड दे तो यह video इस technology की मदद से दरवाजे के फ्रेम में एडजस्ट हो जाएगी. और प्ले होने लगेगी. लेकिन वह वास्तविकता में वहा नहीं होगी.
आप iron man फिल्म तो देखे ही होंगे. इसमे iron man जिस तरह से अपने लैब में काम करता है यह technology ठीक उसी तरह से काम करती है.

Microsoft Hololens kya hota hai?

Microsoft Hololens एक बहुत ही बेहतर  Augmented Reality technology का यूज़ करने वाला हेडसेट है. जो एक हेडबैंड की तरह से होता है. जिसके द्वारा आप अपने वास्तविक दुनिया से कंप्यूटर को आभासी रूप से कनेक्ट कर सकते है. ठीक iron man के लैब तरह.
चुकी यह बहुत ही महंगा है और इसकी कीमत लगभग 3000$ है. इसलिए अभी इसका हर कोई यूज़ नहीं कर पायेगा. लेकिन भविष्य में यह सस्ता हो सकता है.

Microsoft Hololens kaise kaam karta hai?

जब आप इसको इस्तेमाल करते है तो यह सबसे पहले उस जगह हो पूरी तरह से स्कैन कराती है. जैसे मान लीजिये की आप अपने कमरे में है तो यह पहले पूरे कमरे को स्कैन करेगी. और उसकी एक 3d image बनाएगी.
अब उसके बाद यदि आप कोई 3d image कंप्यूटर से तैयार करके यूज़ यह देखना चाहते है की यह कमरे में सोफे के बगल में रखने पर कैसा दिखाई देगा तो आप उस ऑब्जेक्ट को वही पर लगा कर के देख सकते है. जैसे की यह ऑब्जेक्ट वास्तविकता में ही वही हो.
microsoft hololens windows 10 operating system पर काम करता है. और इसमे windows पर रन करने वाली सभी software को चला सकते है. इसके साथ ही इसमे internet का भी इस्तेमाल कर सकते है. इसकी बैटरी लगभग 3 से 5 घंटे तक चल जाती है. और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है की यह वायरलेस है.

Virtual Reality aur Augmented Reality me antar

Virtual Reality में हम जो कुछ भी देखते है वह हमें रियल दुनिया के साथ मिलाकर नहीं दिखता है. लेकिन Augmented Reality हमें जो कुछ भी दिखता है वो हमारे रियल दुनिया के साथ मिलकर दिखता है और हमें यह अनुभव देता है की हम भी उसी के अन्दर है.

Microsoft Hololens aur Augmented Reality ke upyog

Augmented Reality का उपयोग निम्न क्षेत्रो में किया जाता है.

Conclusion

मुझे उम्मीद है की आप लोगो को यह पता चल गया होगा की Augmented Reality kya hai ? aur Microsoft Hololens kya hai? यदि आप लोगो को यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे facebook, twitter पर जरुर शेयर करे और इस blog को subscribe जरुर करे ताकि आप इसी तरह के आर्टिकल सबसे पहले पढ़ सके.

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बुधवार, 26 जुलाई 2017

Linux kya hai? Linux aur Windows Operating System me Antar

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दोस्तों क्या आप जानते है की linux kya hai? क्या आप जानते है की linux aur windows operating system me kya difference hai? आज हम आप लोगो को इसी के बारे में बताएँगे की इनमे से कौन सा operating system बेहतर है और क्यों?
इस समय windows operating system काफी मशहूर है. और अधिकतर लोग अपने pc में इसी का इस्तेमाल करते है. जबकि linux operating भी कम फेमस नहीं है. लेकिन इसे कुछ लोग पसंद नहीं करते है. क्योकि इसके control बटन्स और आइकॉन windows से थोड़े भिन्न है.  कंप्यूटर में जो कुछ भी किया जाता है वह दो प्रकार के सॉफ्टवेयर के द्वारा किया जाता है.
  1. operating system
  2. application software

Operating system (OS) kya hota hai?

हम आज के समय में जैसे ही अपने laptop या डेस्कटॉप का पॉवर बटन ऑन करते है यह कुछ ही सेकंड में काम करने की स्थिति में आ जाता है. और हम अपने एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को ओपन करके काम को पूरा कर लेते है.  चाहे वह word में डॉक्यूमेंट टाइप करना हो या vlc में कोई  मूवी देखना हो.
लेकिन यह एप्लीकेशन software जिस base सॉफ्टवेयर पर रन करते है. वही operating software कहलाते है. application software को ठीक ढंग से रन कराने और  उस software के लिए यूज़ होने वाले हार्डवेयर रिसोर्स उपलब्ध है की नहीं इसका जानकारी रखना और उस एप्लीकेशन software को देना operating system का काम है.
किस तरह से रिसोर्स का इस्तेमाल करना है. software को क्या चीज़ प्रोवाइड कराना है. और सभी application  software को मैनेज करना. यह साड़ी चीज़े operating system देखता है.


windows kya hota hai?

1980 के  समय में जब माइक्रो कंप्यूटर होते थे उस उस समय operating system नहीं होते थे. उस समय हर एक particular मशीन के लिए एक अलग से कोडिंग करके software बनाया जाता था. और उस operating system को किसी अन्य मशीन में नहीं चलाया जा सकता था क्योकि सभी मशीन के हार्डवेयर configuration अलग अलग होते थे. और आप उंको copy भी नहीं कर सकते थे.
उस समय एक नया operating system आया जिसका नाम था CPM. उस समय की कंप्यूटर कंपनी IBM ने इसे खरीदने के बारे में सोचा लेकिन यह उसे किसी कारणवश खरीद नहीं पायी. उस समय  बिल गेट्स ने IBM के लिए एक operating system लिखा जो DOS (Disk operating System) के नाम से अभी भी जाना जाता है. यह वही बिल गेट्स है जो कंप्यूटर दुनिया के जाने माने हस्ती माइक्रोसॉफ्ट के मालिक है.
dos पर ही बाद में windows operating system को लाया गया. और धीरे धीरे windows dos से भी बेहतर operating बन कर आ गया. windows 95,  windows 98,  windows ME,  windows xp, windows vista, windows 7,  windows 8,  windows 10 यह सभी windows operating के वर्शन है.

Linux Kya Hota Hai?

windows एक close source operating सिस्टम है. इसे एक तरह से कह सकते है की यह यूजर को पूरी तरह से खुली छुट नहीं देता है. इसीलिए कुछ developers ने सोचा की क्यों न हम खुद ही एक ओपन source operating system डेवेलोप कर ले जिसे कही भी कभी चला सके.  और हम अपनी मर्जी से जो भी काम करना चाहे कर सके.
इसी सोच ने linux को develop कराया. यह भी एक operating system ही है जो आपके कंप्यूटर को ठीक तरह से चलाने में मदद करता है.
सभी operating system में चाहे वह windows हो, mac हो, एंड्राइड हो, iOS हो सभी में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पार्ट kernel होता है जो कंप्यूटिंग डिवाइस के हार्डवेयर और software के बीच एक ब्रिज का कार्य करता है. ताड़ी operating सिस्टम को एक पेड़ मन जाये तो kernel उस पेड़ की मेन जड़ है. जिस पर operating सिस्टम का पूरा अस्तित्व टिका है.
debian, fedora, ubuntu, kali, red hat यह सभी linux operating system के प्रकार है.

linux aur windows operating system me kya difference (अन्तर ) hai?

linux aur windows operating system me difference (अन्तर )

  • Linux एक ओपन सोर्स operating system है. जो सभी के लिए free में उपलब्ध होता है. जबकि windows एक close source operating system है. जिसके लिए हमें पैसे paid करने पड़ते है.
  • आज से 10 दस साल पुराने कंप्यूटर हार्डवेयर पर भी इस समय का लेटेस्ट linux काफी स्मूथली रन करेगा. जबकि windows का नया वर्शन इनस्टॉल ही नहीं होगा. यदि इंस्टाल हो भी जाये तो वह hang करेगा.
  • linux हार्ड disk के unallocated हिस्से में ही इनस्टॉल होता है. जबकि windows operating system hard disk के पार्टीशन और NTFS या FAT में फॉर्मेट किये  हुए हिस्से में इंस्टाल होता है.
  • Linux operating पर virus attack का खतरा कम होता है. जबकि windows operating में virus का खतरा बहुत ज्यादा होता है.
  • windows operating सामान्य यूजर के लिए बेहतर है क्योकि इसका operating बहुत ही इजी है. जबकि linux operating को ऑपरेट करना थोडा कठिन हो सकता है.
  • windows operating पूरी तरह से ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस (GUI) पर आधारित है. जबकि Linux operating ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस (GUI)  के साथ command line interface पर भी काम करता है. इसका अधिकतर काम command line interface पर ही होता है.
  • Linux operating से ऑफिस वर्क, विडियो एडिटिंग, एवं सामान्य वर्क के अलावा hacking और software cracking के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. जबकि windows operating से ऑफिस वर्क, विडियो एडिटिंग, एवं सामान्य वर्क के लिए ही किया जाता है.
  • linux operating एक multi user and multitasking operating system है. जबकि windows एक single यूजर multi tasking operating system है.  windows का सिर्फ नया वर्शन windows 10 ही multi user and multitasking operating system है. जबकि linux के पुराने वर्शन भी multi user and multitasking की खासियत वाले होते थे.
  • backlinks kya hota hai aur SEO ke liye kyo jaruri hai
  • nofollow aur dofollow backlinks kya hota hai

Conclusion

वैसे तो दोनों operating system काफी बेहतर है और जो ब्यक्ति जिस operating पर काम किये रहता है उसके लिए वही ज्यादा आसान होता है. यदि काम की दृष्टि से देखा जाये तो linux, windows से बेहतर है.
मुझे उम्मीद है की आप लोग अच्छी तरह से जान गए होंगे की Linux kya hai? और Linux aur Windows Operating System me kya Antar hai? यदि यह आर्टिकल आप लोगो को अच्छा लगे तो इसे अपने मित्रो के साथ facebook, twitter पर जरुर शेयर करें.
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मंगलवार, 25 जुलाई 2017

Kernel kya hai poori jankari Hindi me?

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दोस्तों क्या आप जानते है की Kernel kya hota hai? और इस kernel का ऑपरेटिंग सिस्टम में क्या महत्त्व है और इसे क्यों इस्तेमाल किया जाता है? और क्या यह सभी ऑपरेटिंग सिस्टम में अनिवार्य रूप से होता है?
तो आज हम आपको देंगे इसी kernel की पूरी जानकारी हिंदी में.  कोई भी कंप्यूटिंग डिवाइस जैसे एंड्राइड फ़ोन, iphone, विंडोज फ़ोन, सिम्बियन फ़ोन, laptop, डेस्कटॉप या कोई भी ऐसा डिवाइस जिसमे हार्डवेयर के ऊपर os रन करता हो उसमे एक kernel जरुर होता है.

What is Kernel (Operating System Kernel) in Hindi?

Kernel kya hota hai?

यदि हम अपने डेस्कटॉप की बात करे तो उसमे बहुत सारे हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट लगे होते है जैसे processor, ram, gpu, harddisk इसके अतिरिक्त भी बहुत से हार्डवेयर component उसमे लगे होते है या उसमे अटैच्ड किये रहते है.  बिलकुल इसी तरह से ये सब चीज़े आपको अपने मोबाइल में भी देखने को मिल जाती है.
अब हमें एक ऐसे सिस्टम की जरुरत पड़ती है जो एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को हार्डवेयर की पूरी रिसोर्सेज को सही ढंग से इस्तेमाल करने दे.और इन सभी रिसोर्सेज को सॉफ्टवेयर तक सही ढंग से पंहुचा सके.
मान लीजिये की आपको एक लैटर टाइप करना है. तो आप msword को ओपन करेंगे. तो यह सॉफ्टवेयर यह चाहेगा की यह मेरे कीबोर्ड को इस्तेमाल कर सके. अब इस सॉफ्टवेयर को कीबोर्ड हार्डवेयर की एक्सेस देंने के लिए मेरे पास में एक अथॉरिटी होनी चाहिए जो उसको यह परमिशन दे सके. अब ऐसे में यदि टाइप किये गए लैटर को सेव करने की जरुरत है तो इस सॉफ्टवेयर को यह भी परमिशन चाहिए होगी की वह हार्ड disk का भी इस्तेमाल कर सके. यदि आप इसे प्रिंटर से हार्ड copy लेना चाहते है तो इस सॉफ्टवेयर को यह भी परमिशन चाहिए होगी की यह प्रिंटर हार्डवेयर  को पूरी तरह से इस्तेमाल कर सके.
ये जो सारा परमिशन है या जो कंट्रोलिंग ऑथिरिटी है. यह kernel है. दरअसल kernel एक सॉफ्टवेयर है और ऑपरेटिंग सिस्टम का ही एक हिस्सा है. जो हमारे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच में ब्रिज की तरह से काम करता है.  और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को जो जो हार्डवेयर की requirement होती है वो kernel को रिक्वेस्ट करते  है और kernel उस सॉफ्टवेयर को उसके रिक्वेस्ट के हिसाब से उन हार्डवेयर को इस्तेमाल करने की परमिशन देता है.


 Kernel Kitne prakar ke hote hai?

kernel मुख्यत: 3 प्रकार के होते है.

  1. anti-kernel
  2. darvin kernel
  3. linux kernel

Anti Kernel kya hota hai?

यह kernel विंडोज में होता है. और यह मोबाइल तथा कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम  विंडोज का एक हिस्सा होता है. यह एक क्लोज kernel है . अर्थात आप इसमें कोई भी मॉडिफिकेशन नहीं कर सकते है.

Darwin Kernel kya hota hai?

यह भी एक क्लोज kernel है और इसे भी नहीं बदला जा सकता है. यह apple डिवाइस में आता है.

Linux Kernel kya hota hai?

यह linux ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ और एंड्राइड ऑपरेटिंग के साथ आता है. चुकी linux एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है. इसलिए इसके kernel को बदला जा सकता है. चुकी जितने भी linux या एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम है उनके kernel में बहुत कम ही अंतर होता है. ये सभी कभी सामान होते है.
आप अपने फ़ोन  का kernel बहुत ही आसानी से बदल भी सकते है. इसके लिए आपको एंड्राइड फ़ोन का root access और boot loader का का unlocked होना बहुत ही जरुरी है. यदि यह दोनों आपके पास है तो आप अपने एंड्राइड फ़ोन का kernel को change कर सकते है.

apne phone ka kernel kyo change kare?

यदि आप चाहते है की आपका फ़ोन आपको बहुत अच्छी बैटरी बैकअप प्रोवाइड करे  या  आपका फ़ोन आपको अच्छी परफॉरमेंस प्रोवाइडर करे तो आपको अपना kernel जरुर change कर देना चाहिए. क्योकि इसके पास हार्डवेयर की साड़ी कंट्रोलिंग होता है.
जैसे मान लीजिये की बैटरी बैकअप बढ़ाना है तो आपको अपने kernel में थोडा सा change कर दे की processor की पॉवर सप्लाई थोड़ी कम कर दे.  जिससे बत्तरी life और बैकअप काफी बढ़ जाएगी.
एंड्राइड फ़ोन के लिए बहुत ही लोकप्रिय कर्नेल frenko kernel है. इसके अलावा भी आपके फ़ोन के लिए बहुत से kernel है.  जिसे आप इंस्टाल कर सकते है. लेकिन यह एक बहुत ही रिस्की प्रोसेस है. जिसमे आपका फ़ोन हमेशा  के लिए  डेड भी हो सकता है. और यदि आप किसी kernel को download कर रहे है तो इस बात का जरुर ध्यान रखे की यह एक trusted सोर्स से हो नहीं तो कस्टम kernel डालने के बाद आपका फ़ोन एक डब्बा बन कर रह जायेगा और आप उसमे कुछ भी नहीं कर पाएंगे.

conclusion

यह kernel बहत ही कमाल की सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटिंग डिवाइस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच एक संतुलन बनाये रखता है और पूरे हार्डवेयर रिसोर्स को सही ढंग से सॉफ्टवेयर को इस्तेमाल करने देता है.
मुझे उम्मीद है की आज का यह आर्टिकल  Kernel kya hai poori jankari Hindi me? जरुर पसंद आया होगा. यदि यह आप लोगो को पसंद आया है तो इसे अपने मित्रो के साथ जरुर शेयर करें.
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सोमवार, 24 जुलाई 2017

MasterCard kya hai? RuPay card vs MasterCard

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MasterCard
दोस्तों क्या आप जानते है की MasterCard kya hai? RuPay card aur MasterCard me kya antar hai? आज के digital पेमेंट के दौर में हम सभी चाहते है की जो भी  पेमेंट करे वह online हो या कैशलेस हो. ऐसे में हम अक्सर अपने debit card या credit card का इस्तेमाल करते है.  लेकिन क्या आपने कभी अपने debit card या credit card को ध्यान से देखा है. यह हम किसी भी बैंक से लिए हो उस MasterCard या Visa card या RuPay card लिखा रहता है. आज हम आप लोगो को बताएँगे की आखिर यह MasterCard kya hota hai?

Plastic Money Kya hota hai ?

जब हम हार्ड कैश की जगह पर किसी भी तरह के transaction में atm card, debit card, credit card का इस्तेमाल करते है तो यह card ही plastic money के नाम से जाना जाता है और इससे होने वाला  transaction कैशलेस कहलाता है.
अब जो atm card, debit card, credit card होते है वो MasterCard हो सकते है, Visa card हो सकते है, या RuPay card भी हो सकते है.

MasterCard kya hota hai?


भारत में जो भी बैंक debit card या atm card देते है वो अक्सर MasterCard  या Visa card या RuPay card ही होता है.  आखिर यह तीनो क्या है? दरअसल यह तीनो एक पेमेंट गेटवे है. आप जब इन्हें इस्तेमाल करते है चाहे वह debit card हो या credit कार्ड हो, आप इन्हें atm में इस्तेमाल करे या किसी को पेमेंट करने के लिए POS मशीन में इस्तेमाल करें. तो यह जरुरी नहीं की जिसको आप पेमेंट कर रहे हो वह भी उसी same बैंक में अकाउंट होल्डर हो वह किसी भी बैंक का अकाउंट होल्डर हो सकता है.
इस स्थिति में हमें एक middleman की जरुरत पड़ती है जो इन transaction को आसानी से हैंडल कर सकें, और transaction को आगे फॉरवर्ड कर सके.  अब यह गेटवे आपके बैंक और आप जिस बैंक को पैसे भेज रहे है उस बैंक के बीच एक चैनल की तरह से काम करती है. और अपना commission ले लेती है.
mastercard एक विदेशी payment gateway है जो विश्व के अधिकांश देशो के बैंक को अपने कार्ड के द्वारा payment gateway की सुविधा मुहैया करता है.

RuPay Card kya hota hai?

RuPay card एक भारतीय payment gateway है या यह एक domestic payment gateway है, और इसका पूरा नाम Rupee payment.  इसे NPCI (National Payment Corporation of India) ने सिर्फ भारत में इस्तेमाल करने के लिए बनाया है और यह  same वही काम करती है. जो MasterCard और Visa card करतीं है. चुकी MasterCard और Visa card विदेशी कंपनी या अमेरिकन कम्पनी है. और इनका कमीशन ज्यादा है. लेकिन RuPay card भारतीय कंपनी होने के कारण इसका कमीशन भी कम है.

MasterCard aur Rupay card me Difference (अंतर)

  • MasterCard एक अमेरिकन कंपनी है और जब हम इसके card का इस्तेमाल करते है तो डाटा प्रोसेसिंग और वेरिफिकेशन के लिये उस कंपनी के सर्वर में जाती है. जिससे प्रोसेसिंग स्लो हो जाती है. जबकि RuPay card का इस्तेमाल करने पर डाटा प्रोसेसिंग और  वेरिफिकेशन के लिए अपने ही देश में रहती है. जिससे इसकी प्रोसेसिंग फ़ास्ट होती है.
  • RuPay card के द्वारा आप सभी तरह के online payment कर सकते है. लगभग 10000 वेबसाइट है जो RuPay card से payment accept कर रही है.  चुकी यह संख्या MasterCard की तुलना में कम है लेकिन धीरे धीरे बढ़ रहा है. क्योकि जब प्रधानमन्त्री जी के द्वारा जनधन योजना के तहत जो भी अकाउंट ओपन हुए उन सभी में RuPay card को ही दिया गया है.
  • जब बैंक MasterCard को प्रोवाइड करते है तो उस बैंक को एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ता है. जबकि जब बैंक RuPay card को देते है तो उन्हें किसी भी प्रकार के एक्स्ट्रा चार्ज को नहीं देना होता है.
  • MasterCard का इस्तेमाल आप विश्व क्व किसी भी देश में कर सकते है. जबकि RuPay card का linkup discover network के साथ होने के कारण आप इसका इस्तेमाल सिर्फ उन्ही देश में कर सकते है जहा वे कार्ड एक्सेप्ट किये जाते है. मतलब  यह की RuPay card का इस्तेमाल आप विश्व के सभी देशो में नहीं कर सकते है. इसे कुछ ही देशो में इस्तेमाल कर सकते है.
  • MasterCard  debit card और credit card दोनों फोर्मेट में मिल जाता है. जबकि RuPay card में अभी credit card नहीं आया है. यह सिर्फ अभी debit card में ही उपलब्ध है.
  • within India यदि आप MasterCard  से कोई भी बिल payment करते है जैसे विजली का बिल, पानी का बिल या फिर पेट्रोल भरवाते है तो आप को कोई भी छुट नहीं मिलता है. जबकि इन्ही कामो को यदि आप RuPay card से करे तो आपको कुछ छुट भी मिल जायेगा.
  • backlinks kya hota hai aur SEO ke liye kyo jaruri hai
  • nofollow aur dofollow backlinks kya hota hai

Conclusion

वैसे देखा जाये तो MasterCard  की बजाय RuPay card का इस्तेमाल हम लोगो के लिए फायदेमंद हो सकता है. क्योकि इसे सरकार भी बढ़ावा दे रही है. और RuPay card भारत में हर जगह एक्सेप्ट भी हो रहा है.
मुझे उम्मीद है की आप लोग यह अच्छी तरह से समझ गए होंगे की Plastic money kya hota hai? और MasterCard kya hai? RuPay card aur MasterCard me kya antar hai? यदि कोई सुझाव या सिकायत हो तो आप इसे कमेंट बॉक्स के जरिये जरुर बताये हमें ख़ुशी होगी. अगर यह आर्टिकल आप लोगो को पसंद आया हो तो इसे facebook, twitter पर शेयर करें.
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रविवार, 23 जुलाई 2017

Surface web, Deep web, Dark web me Kya Difference Hai?

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Surface-web-Deep-web-Dark-web
दोस्तों आप सभी internet का इस्तेमाल तो हर रोज करते होंगे और search इंजन की मदद से न जाने कितनी website को search करते होंगे, और उन website को सर्फ करते होंगे. लेकिन आप ने कभी सोचा है की क्या सभी website search इंजन में इंडेक्स होती है. और क्या सभी website या सभी जानकारी को internet पर search इंजन के माध्यम से खोजा जा सकता है. आज हम आप लोगो बताएँगे की surface web, deep web, dark web me kya difference hai? और यह deep web kya hota hai?

The Black world of Internet in Hindi

What is Surface web Vs Deep web Vs Dark web Hindi

चुकी internet पर जितने भी website या blog मौजूद है, वो सभी world wide web के अंतर्गत ही आते है. यानि यह सभी www के ही हिस्सा है. और इन सभी को हम search इंजन के मदद से search भी कर सकते है. लेकिन कुछ ऐसे भी कंटेंट इन्टनेट पर मौजूद है जिन्हें हम search नहीं कर सकते है.  इसके आधार पर इन्हें 3 पार्ट में बांटा गया है.

  • Surface web
  • Deep web/Hidden web
  • Dark web



Surface web kya hota hai? (सरफेस वेब क्या होता है ?)

जिन कंटेंट या website को या internet की ऐसी जानकारी जो search इंजन के माध्यम से search किया जा सके surface web के अंतर्गत आती है. और यह पूरे internet का केवल 5 प्रतिशत ही है. लेकिन surface web ही पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.
अर्थात हम search इंजन के माध्यम से जो कंटेंट या जानकारी internet के माध्यम से प्राप्त करते है वो internet पर मौजूद कंटेंट या जानकारी का केवल 5 प्रतिशत ही होता है. बाकि का 95 प्रतिशत ऐसा है जिन्हें हम नार्मल ब्राउज़र या search इंजन के मदद से भी नहीं प्राप्त कर सकते है.

Deep web/ Hidden Web kya hota hai? (डीप वेब / हिडन वेब क्या होता है ?)

deep web/ hidden web www का ही वह हिस्सा है जो किसी भी search इंजन में इंडेक्स नहीं हुआ रहता है.  या कह सकते है की इसमे वो website आती है जो NO Index का इस्तेमाल करके search इंजन में आने से बच जाती है.
जीतनी भी cloud storage की website होती है, online banking info, email ये सभी deep web के अंतर्गत आती है. इन्हें ओपन करने के लिए स्पेशल url के साथ स्पेशल परमिशन की जरुरत होती है. दुनिया में सबसे ज्यादा deep web की website रूस के पास है.
Surface-web-Deep-web-Dark-web-2

deep web ka use kyo hota hai? 

internet पर बहुत से ऐसे कंटेंट है जिन्हें सर्च इंजन में इंडेक्स करने की कोई जरुररत नहीं होती है. और यदि इन्हें search इंजन में इंडेक्स कर दिया जाये तो कई लोगो को काफी दिक्कत हो जाएगी. और लोगो की ऑनलाइन security hacker से compromise हो जाएगी.
जैसे मान लीजिये की यदि आप का ईमेल id search इंजन में इंडेक्स हो जाये तो आपके ईमेल id पर इतने spamm email आने लगेंगे की आप परेशां हो जायेंगे या यदि आपके ईमेल के कंटेंट search इंजन में इंडेक्स हो जाये तो सोचिये की क्या हो सकता है.
या यदि आपके पास internet बैंकिंग account है और उसका डिटेल search इंजन में इंडेक्स हो जाये तो आपको कितना प्रॉब्लम हो सकती है आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है.
government employees, army, police, banks secrets, intelligence bureau, central bureau of investigation की website भी deep web में ही होती है.

Dark web kya hota hai?

internet पर जितने भी illegal काम किये जाते है, वो dark web के अंतर्गत आते है. इसकी कोई भी जानकारी पब्लिक के लिए नहीं रखी जाती है. और सभी search इंजन को भी इसकी जानकारी रखने की इजाजत नहीं होती है.
dark web पर कोई भी कानून नहीं होता है, इसमे हैकिंग, मर्डर, गैर क़ानूनी ढंग से हथियारों की खरीद, जुआ, ड्रग की खरीद फरोक्त आदि शामिल होते है. इन सब चीजों को हम सामान्य ब्राउज़र से नहीं देख सकते है.
इसके लिए एक अलग ब्राउज़र tor browser होता है. और इसके साथ एक proxy का भी इस्तेमाल करना पड़ता है. ताकि वह हमारे ip को और हमारे पहिचान को गवर्मेंट से या internet पर नज़र रखे हुए सरकारी संस्था से छुपाया जा सके.
लेकिन मैं यह नहीं चाहूँगा की आप लोग dark web में जाये भले ही आप एक थोडा सा एक्सपीरियंस के लिए ही जाना चाहते हो. क्योकि यह आपके लिए काफी खतरनाक हो सकता है.

Conclusion

internet जीतनी अच्छी है यह उससे कही ज्यादा बुरी भी है. हमें इसके सिर्फ अच्छे पहलू को देखना चाहिए और उसी से जितना हो सके लाभ उठा लेना चाहिए. और मुझे उम्मीद हैऊ की आज का मेरा यह पोस्ट surface web, deep web, dark web me kya difference hai? आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. और आप या अच्छी तरह से surface web, deep web, dark web को समझ गए होगे. यदि यह आर्टिकल आपको पसंद आया तो आप इसे facebook, twitter पर अपने मित्रो के साथ जरुर शेयर करें. 
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शनिवार, 22 जुलाई 2017

Myspace se High Quality Dofollow Backlinks Kaise Banaye

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Myspace-se-High-Quality-Dofollow-Backlinks
दोस्तों आप लोग myspace का नाम तो सुना ही होगा यह एक सोशल मीडिया website है. और यह बहुत से देश में भी इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते है की  इस वेबसाइट के द्वारा कैसे high quality dofollow backlinks बना सकते है. आज हम आप लोगो को Myspace se High Quality Dofollow Backlinks Kaise Banaye बताएँगे.
आप लोग backlinks बनाना जानते होंगे लेकिन आप अपने ब्लॉग या website के लिए सिर्फ backlinks बनाने पर  ध्यान मत केन्द्रित कीजिये बल्कि आप high quality backlinks बनाने पर अपना ध्यान केन्द्रित कीजिये.

Myspace se High Quality Dofollow Backlinks kyo Banaye?

यदि आप एक ब्लॉगर है तो यह जरुर जानते होंगे की की website के लिए high quality backlinks कितना जरुरी है. क्योकि यदि आप यह चाहते है की आप का ब्लॉग SERP में अच्छी रैंक पाए और search इंजन ले ज्यादा ट्रैफिक मिले तो आपको high quality backlinks की जरुरत पड़ेगी. और  इसके लिए आप लोगो को अपने ब्लॉग के लिए high PR dofollow backlinks बनाना पड़ेगा.
myspace website की domain authority 98 और पेज authority 96 है. यदि हम इसके trust flow और citation flow की बात करे तो यह 72 और 78 है. जहा तक बात myspace के backlinks की है तो इसके External Backlinks 2,216,734, Referring Domains 28169, Referring IPs 21222 और Referring Subnets 14036 है जो backlinks quality के हिसाब से बहुत ही बेहतरीन  है.
यदि आप का ब्लॉग technical है और आप यह सोच रहे है की यह आपके blog के niche से सम्बंधित नहीं है. तो आप गलत है. यह एक सोशल website है. और इस पर आपके blog के niche से सम्बन्ध होना जरुरी नहीं है.


Myspace se High Quality Dofollow Backlinks Kaise Banaye  full guide?

इस website पर आप सिर्फ अपना एक प्रोफाइल बनाकर बहुत ही high quality PR backlinks पा सकते है. और यदि अपने ब्लॉग के आर्टिकल को पोस्ट भी करते है तो बहुत ही अच्छी बात है.  इस पर भी

STEP 1

  1. सबसे पहले आप Myspace website को ओपन करे.
  2. SignUp बटन पर क्लिक करें.
    Myspace-se-High-Quality-Dofollow-Backlinks-1

STEP 2

  1. अब यहाँ आप आपको तीन आप्शन  दिखाई देंगे
  2. यदि आप चाहे तो facebook account के द्वारा भी लॉग इन कर सकते है.
  3. twitter के द्वारा भी लॉग इन कर सकते है.
  4. यदि आप चाहते है की email Id से नया account बनाकर लॉग इन करे तो आप इस तीसरे आप्शन को चुने.
    Myspace-se-High-Quality-Dofollow-Backlinks-2

STEP 3

Myspace-se-High-Quality-Dofollow-Backlinks-3
  1. FULL NAME  में आप अपना पूरा नाम लिखे
  2. Select gender में आप Male या female सेलेक्ट करे.
  3. USERNAME में आप अपना कोई ऐसा यूजरनाम डालिए जो यूनिक हो.
  4. PASSWORD में अपना एक password डालिए.
  5. EMAIL में अपनी ईमेल ID डाल दीजिये.
  6. DATE OF BIRTH में अपनी जन्मतिथि भर दीजिये.
  7. I’m not a robot पर क्लिक करके verify कीजिये.
  8. Term and condition पर क्लिक करके यूज़ एक्सेप्ट कीजिये.
  9. Create account पर क्लिक कर दीजिये.
अब आपका account बन कर तैयार हो जायेगा. और यह आपका प्रोफाइल पेज ओपन कर देगा.

STEP 4

  1. जब आपका account बनकर तैयार हो जायेगा तब आपके सामने connection के बारे में पूछा जायेगा की आप किस तरह के लोगो से connection चाहते है.
    Myspace-se-High-Quality-Dofollow-Backlinks-4
  2. अब आप यहाँ पर writer को सेलेक्ट कीजिये.

STEP 5

  1. अब आप अपने myspace के डैशबोर्ड पर आ जायेंगे. अब आप सबसे पहले एक प्रोफाइल image को अपलोड करें. उसके बाद एक background image जो 800 x 600 का होना चाहिए उसे अपलोड  करें.
    Myspace-se-High-Quality-Dofollow-Backlinks-5

STEP 6

अब दाहिने तरफ myspace के प्रोफाइल में -
  1. about yourself में अपने बारे के कुछ लिखिए.
  2. add your current location में अपने कंट्री को सेलेक्ट कीजिये.
  3. add your website में अपने blog या website का url टाइप करे दीजिये.
  4. add a bio में अपने बारे में पूरी डिटेल में जानकारी दीजिये.
    Myspace-se-High-Quality-Dofollow-Backlinks-6
अब आपका myspace सोशल website से high quality dofollow backlinks बन कर तैयार हो गया है. लेकिन इसका प्रभाव दिखने में लगभग महिना दिन लग जायेगा. इसलिए आप धैर्य बनाये रखे और अपना काम करते रहे.

Final word-

अंत में मैं आप लोगो से यही कहना चाहूँगा की यदि आप ने अपने myspace के प्रोफाइल में अपने ब्लॉग का url दिया है तो आपको प्रोफाइल image को जरुर अपलोड कर दे और अपने ईमेल id में आये हुए वेरिफिकेशन email  को ओपन कर के अपना ईमेल जरुर verify कर दे. नहीं तो आपका account delete भी किया जा सकता है.
मुझे उम्मीद है की आज का यह आर्टिकल Myspace se High Quality Dofollow Backlinks Kaise Banaye आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. आप इसे अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करे.
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शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

face recognition payment system aur selfie authentication kya hai?

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Selfie-Authentication
दोस्तों आप लोग तो selfie लेते ही होंगे और उसे शेयर भी करते होंगे, क्या आपने कभी यह सोचा है की यह selfie ही आपके online अकाउंट का password बन जाये या selfie के द्वारा ही आप किसी को भी online पेमेंट करे तो कैसा होगा. और आपके सभी प्रकार के अकाउंट का authentication आपके सिर्फ एक selfie से हो जाये तो कैसा रहेगा.
आज हम आपको इसी selfie password या selfie authentication के बारे में बताएँगे औए यह भी बताएँगे की कैसे कम्पनीज selfie payment के बारे में भी सोच रही है.  The Rise of the Selfie Authentication as a New Security Factor (Hindi) 

face recognition payment system kya hai?

face recognition payment के लिए mastercard और amazon जैसी कंपनी selfie को इस्तेमाल करने के बारे में सोच रही है और सार्थक प्रयाश भी कर रही है. ताकि भविष्य में face recognition के आधार पर selfie से ही ऑथेंटिकेशन और पेमेंट किया जा सके.

Selfie Password or Selfie Authentication kya hota hai?

authentication के लिए हम बहुत से तरीके अपनाते है जैसे iris scanning, finger print scanning या पासवर्ड को लेकिन क्या भविष्य में भी हम इन्ही तरीको को अपनाते रहेंगे.  लेकिन हम यहाँ बात कर रहे है selfie की भविष्य में यह selfie हम लोगो का पासवर्ड हो सकता है क्योकि mastercard और amazon जैसे बहुत बड़ी बड़ी कम्पनीज  इस पर विचार कर रही है की किस प्रकार से हम किसी के selfie के ही उसके अकाउंट का पासवर्ड बना दे.

चुकी यह कोई बहुत नया नहीं है. एंड्राइड फ़ोन के शुरू में आपने देखा होगा की उसमे एक फेस अनलॉक का फीचर आया था, जो face recognition के आधार पर काम करता था. लेकिन यह बहुत शुरूआती दौर में था. और अब इसे ही अन्य कम्पनीज एक ऐसा फीचर लाने वाले है जिससे आप अपने एक फोटो को अपने मोबाइल से किसी भी  साईट पर अपलोड कर दे और आप उसमे आप अपना सारा काम कर ले.
apple जैसी बड़ी कंपनी भी फेस ट्रेकिंग पर काम कर रही है की कैसे किसी भी ब्यक्ति के फेस को पेर्फेक्ट्ली ट्रैक कर के फ़ोन को अनलॉक किया जाये. हो सकता है की आप लोगो को आगे अपने online दुनिया में कुछ ऐसा ही देखने को मिल जाये. की आप किसी वेबसाइट पर जाये और आप पाने फ़ोन से अपने फोटो को वेबसाइट पर अपलोड करे और उस वेबसाइट में लॉग इन कर पाए.

selfie payment kya hota hai.

face recognition के आधार पर selfie के द्वारा पेमेंट के तरीके को ही selfie पेमेंट कहा जाता है.ठीक ऐसे ही आप किसी वेबसाइट पर कुछ online खरीदते है और पेमेंट के समय आप अपने selfie के द्वारा उस वेबसाइट को पेमेंट कर देते है.  जैसे ही आप अपना फोटो खीच कर उसमे लगा देते है. तो उस कंपनी का सर्वर उसे वेरीफाई कर के पेमेंट कर देगा.
amazon selfie payment पर भी काम कर रहा है जिसमे हो सकता है की यह आपके पासवर्ड के साथ काम करे या यह भी हो सकता है की यह बिना पासवर्ड के सिर्फ आपके selfie से ही authenticate हो जाये.
amazone ने इस पर एक पेटेंट भी फाइल कर चूका है, संभवत: अब भविष्य selfie password या selfie authentication का आने वाले है.

verification method in selfie authentication or password

इस तरीके में कुछ संदेह है की जब हम फोटो को खीच कर अपलोड करेंगे तो लॉग इन करेंगे या पेमेंट करेंगे तो यह तो कोई भी हम लोगो का फोटो खीच कर अपलोड कर देगा और लॉग इन कर जायेगा. लेकिन इसमे इसका भी समाधान है की वेबसाइट का सर्वर आप से कह सकता है की आप एक आंख बंद कर फोटो लीजिये या चेहरे को ऊपर कीजिये या चहरे को निचे कीजिये या इसी तरह के कुछ ऐसे मोशन जिससे वह जान जाये की आप वही है जो दिखा रहे है या कोई और है जो किसी का इमेज यूज़ कर रहा है.
वो यही track करने की कोशिश करेंगे की जो सामने है वो ही सही ब्यक्ति है.  यह थोडा सा अटपटा लग सकता है की फोटो क्लिक करो सेंड करो. इससे अच्छा है की सात आठ अंको का पासवर्ड टाइप करो और लॉग इन कर लो.
लेकिन selfie authentication वास्तव में काम में लाने के लिए प्रयाश किये जा रहे है. और हो सकता है की आज के पांच-दस साल में हमारा password पुराने जमाने की बात हो जाये और इनकी जगह selfie authentication आ जाए तो कोई नयी बात नहीं होगी.

Conclusion

अभी तो हम यही पुराना authentication का तरीका ही इस्तेमाल करेंगे क्योकि अभी तक ऑथेंटिकेशन का बहुत ही बेहतरीन तरीको मे से एक है यह पासवर्ड ऑथेंटिकेशन. लेकिन भविष्य अब selfie password का ही आने वाला है.
मुझे उम्मीद है की आज का यह आर्टिकल Selfie Password or Selfie Authentication or Selfie Payment kya hai? या  face recognition payment system kya hai? जरुर पसंद आया होगा. आप सभी रीडर से एक निवेदन है की आप सभी post को अपने मित्रो के साथ सोशल नेटवर्क facebook, twitter पर जरुर शेयर करें. 
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गुरुवार, 20 जुलाई 2017

kya Rooting and Jailbreaking illegal hai?

1 comment
Rooting-and-Jailbreaking
दोस्तों क्या आप सब जानते है की kya Rooting and Jailbreaking illegal hai? आप सभी तो rooting के बारे में तो सुना ही होगा. और एंड्राइड को अक्सर उसके यूजर चाहते है की इसको root कर दे. और iPHONE यूजर यह चाहते है की वह अपने फ़ोन को jailbreaking कर दे. लेकिन क्या आप जानते है की यह लीगल  है या illegal है. Rooting aur Jailbreaking अपने फ़ोन में करना चाहिए या नहीं?
हम सभी अपने computer में जो चाहे कर सकते है. जैसे चाहे कर सकते है. लेकिन हम अपने फ़ोन में ऐसा कुछ नहीं कर सकते है. जहा तक एंड्राइड फ़ोन की बात है तो इसमे बहुत से app है जिनका यूज़ करके अपने कुछ कामो को कर सकते है लेकिन जब बात iphone की आती है तो इसमे एंड्राइड से ज्यादा दिक्कत होती है.

Rooting aur Jailbreaking Kya hai?



Rooting क्या होता है?

जहा तक इन फ़ोन के हार्डवेयर की बात है वो तो कमाल का होता है. लेकिन software की ऐसी बंदिशे जो हमें पसंद नहीं होती है वो इनके साथ ही फ़ोन कंपनी हमें देती है. चुकी हमें computer के तरह फोन की operating system हमें हर जगह जाने की परमिशन नहीं देती है. की हम वहा जा कर इसमे कुछ भी कर पाए.
फ़ोन में हम एक नार्मल यूजर की तरह इसमे दिए गए solution के द्वारा ही अपने कार्य को कर सकते है. इसमे बहुत ज्यादा कण्ट्रोल हमारे पास नहीं होता है. चुकी कोई भी software पूरी तरह से complite नहीं होता है उसमे कुछ न कुछ bug जरुर होते है या फ्लाग होते है और यदि आप उन्ही फ्लाग के  द्वारा इन software को क्रैक करने की कोशिश करे की इसकी सारी कण्ट्रोल  अपने पास लेने की तो इसे ही हम rooting कहते है.

Jailbreaking क्या होता है?

जिस प्रकार एंड्राइड में उसके bug या फ्लाग का फायदा उठाकर उसके सारे कण्ट्रोल को आप अपने हाथ में ले ते है. ठीक उसी प्रकार iOS के bug का फायदा उठाकर यदि आप उसके सारे कण्ट्रोल अपने हात में ले लेते है तो यह jailbreaking कहलाता है.

क्या rooting या jailbracking illigal है?

वैसे तो देखा जाये तो rooting या jailbreaking illigal नहीं है. लेकिन यदि आप अपने फ़ोन को root कर देते है तो फ़ोन कंपनी आपके वारंटी को समाप्त कर देती है. क्योकि फ़ोन कंपनी यह मानती है की आप ने अपने मोबाइल के operating में जो मॉडिफाई किया है उसकी वजह से कोई भी गड़बड़ी फ़ोन में हो सकती है. तो इसकी हमारी कोई गारंटी या वारंटी नहीं होगी.

kya rooting ya jailbreaking karna asaan hai?

rooting या jailbreaking करना आसन है या मुश्किल तो यह पूरी तरह से आप के device पर निर्भर करता है की आपका device कौन सा है.
बहुत से ऐसे पोपुलर device है जिनके लिए one click rooting software मिल जाते है. लेकिन कुछ device को root करने के लिए software जल्दी नहीं मिल पाते है.
जो device मर्केत्मे अभी अभी आये है या आप किसी device को latest updates किये है तो उनको root करना इजी नहीं होता है. क्योकि उसके developer बग्स को हटा दिए रहते है.
तो उस नए operating में फिर से नए बग्स को खोजना होता है की कहा से आप उसमे घुस पाएंगे और किस प्रकार से आप उसमे घुस के उसके सारे कण्ट्रोल को ले पाएंगे.
rooting के बाद कुछ ऐसे software है जिनको इस्तेमाल करने पर वे आपके फ़ोन को हानि पंहुचा सकते है. इसीलिए अगर आप अपने फ़ोन को root कर दिए है तो ऐसे software को बड़ी ही सावधानी से अपने फ़ोन में यूज़ करना चाहिए.

क्या हमें अपने फ़ोन को root या jailbreak करना चाहिए. 

यदि आप अपने फ़ोन में हमेशा नए नए custome rom डालना चाहते है, या एक आप अपने फ़ोन के CPU को ओवर clock करना चाहते है तो आपको rooting या jailbreak करना चाहिए. लेकिन यदि आप एक नार्मल यूजर की तरह से ही फ़ोन का इस्तेमाल करते है या करना चाहते है तो आपको rooting या jailbreak करने की कोई जरुरत नहीं है.
पुराने फ़ोन में जो सुविधाए root करने के बाद मिलती थी वो अब नए फ़ोन में बिना root के ही मिल रही है. इसीलिए मेरे हिसाब से यदि आप को फ़ोन सिर्फ नार्मल यूज़ करना है तो आपको इसे root करने की कोई जरुरत नहीं है.

Conclusion

rooting या jailbreaking इंडिया में तो illegal नहीं है. लेकिन rooting तभी करे जब आप यह जानते हो की आप क्या कर रहे है. नहीं तो आपको फायदा की जगह नुक्सान भी हो सकता है.
मुझे उम्मीद है की आज का यह पोस्ट kya Rooting and Jailbreaking illegal hai? आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. तो आप इसे अपने मित्रो के साथ जरुर शेयर करे. 
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मंगलवार, 18 जुलाई 2017

Water Cooling Computer kya hai? or Liquid cooling in Gaming Pc (Hindi)

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Water-Cooling-Computer
दोस्तों क्या आप सभी जानते है की कंप्यूटर और मोबाइल्स को ठंडा रखने के लिए अब हीट सिंक और फैन की जगह water cooling system या liquid cooling system  का भी इस्तेमाल कर सकते है. आज  हम आप लोगो को बताएँगे की Water Cooling Computer kya hai? और आप अपने computer me Water Cooling System kaise install kare?
हो सकता है की यह आप लोगो को सुनने में थोडा अजीब लगे क्योकि किसी कंप्यूटर या मोबाइल में water cooling सिस्टम का यूज़ कैसे किया जा सकता है. जब भी किसी इलेक्ट्रॉनिक सामान में थोड़ी सी भी पानी गिर जाता है तो वहा पर शोर्ट सर्किट हो जाता है और वह इक्विपमेंट खराब हो जाता है. यही सोच रहे होंगे आप लोग.
सामान्यत: water cooling system या liquid cooling system का इस्तेमाल तो हम सभी ट्रक, कार, जीप या यह कहे की 4 पहिये गाडियों में होता है. उनको ठंडा रखने के लिए तो उस सिस्टम को हम कैसे अपने मोबाइल या कंप्यूटर में इस्तेमाल कर सकते है.

Computer aur Mobile me Water Cooling kya hai? 

Liquid cooling in Gaming PC and Water Cooling in Mobiles Hindi Explained

हम सभी लोग यह सोचते है की किस प्रकार से अपने कंप्यूटर पर बेहतर हार्डवेयर इंस्टाल करके हैवी गेम्स या high एंड गेम्स खेलते है तो वह काफी गर्म हो जाता है और उसके बर्न होने का भी डर लगा रहता है. तब हम सोचते है की अपने इस गेमिंग pc में कौन सा जुगाड़ कर दे की हमारा गेमिंग pc गर्म भी ना हो और हम गेम भी खेल ले.

water cooling kya hota hai. या liquid cooling kya hota hai

किसी भी कंप्यूटर को काफी लम्बे समय तक इस्तेमाल करते रहने पर उसके पार्ट गर्म हो जाते है. या हम अपने कंप्यूटर को ओवर क्लॉक करके यूज़ करते है तो भी वह गर्म हो जाता है. जिससे उसकी परफॉरमेंस कम हो जाती है.
तो हमको यहाँ पर एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो हमारे कंप्यूटर पार्ट को ठंढा रख सके ताकि हमें बेहतर परफॉरमेंस मिल सके और उस पर हम लम्बे समय तक कार्य कर सके.
सामान्यत: कंप्यूटर में फैन लगा होता है. जो गर्म हवा हो बाहर की तरफ फेकने का कार्य करता रहता है, और उसे ठंडा रखने का कार्य करता है.
जबकि water cooling या liquid cooling में कंप्यूटर के cpu और gpu की ठंढा रखने के लिए water या liquid का इस्तेमाल किया जाता है. यह ठीक उसी प्रकार से कार्य करता है जिस प्रकार से गाडियों में.
इस प्रकार के cooling सिस्टम के इस्तेमाल से कंप्यूटर की उम्र और परफॉरमेंस काफी बढ़ जाती जाती है.


water cooling system kits

  • water block
  • radiator and fans
  • reservoir
  • pump
  • tubes & fitting

water block

इसे CPU या GPU के ऊपर माउंट कर दिया जाता है. यदि आप चाहे तो ram और हार्ड disk drive के लिए भी इसे यूज़ कर सकते है.

radiator and fans

radiator और fan system cpu box के अन्दर लगाया जाता है और यह गर्म water को ठंडा करने का कार्य करता है. यह ठीक उसी प्रकार से बना होता है और कार्य करता है जिस प्रकार से गाडियों में लगा रेडियेटर कार्य करता है.

Reservoir

यह water cooling system में फ़िल्टर की तरह से कार्य करता है और इसे smps के निचे माउंट किया जाता है.

pump

इसे reservoir और water block के साथ जोड़ा जाता है और इसका काम water को pump करना होता है.

tubes & fitting

tubes water cooling सिस्टम में हर कॉम्पोनेन्ट से जुड़ा रहता है और इसी के द्वारा water या liquid रेडियेटर, water ब्लाक, रिजर्वायर में आता जाता रहता है.
सभी कंपोनेट को आपस में सही ढंग से जुड़ने के लिए fitting का इस्तेमाल किया जाता है. और इस बात का ख्याल जरुर रखा जाता है की कोई भी fitting लूज़ ना हो. यदि fitting लूज़ हुई तो आपको परेशानी हो सकती है. क्योकि बिजली और पानी मिलाने पर प्रॉब्लम तो होती है.
पानी जो है वो बेसिक cooling है. यदि कंप्यूटर में एयर condition जैसा कुछ लगा हो तो कितना कमाल का होगा की कंप्यूटर गर्म ही नहीं होगा. और हम लगातार काम करते जायेंगे.

Mobile me Water Cooling System

samsung ने अपने मोबाइल s7 और lg ने अपने मोबाइल g6 में water cooling का थोडा प्रयोग किया गया है. इन दोनों मोबाइल में tubing किया गया है. ताकि processor के हीट हो कम किया जा सके और मोबाइल कम से कम गर्म हो.
फिलहाल यह अभी बहुत ज्यादा यूज़ में नहीं है. इसे high end user ही इस्तेमाल कर रहे है लेकिन यह धीरे धीरे विस्तार कर रहा है.

Conclusion

यह water cooling या liquid cooling सिस्टम का इस्तेमाल यदि आप करना चाहे तो इस पूरे सिस्टम को आप online खरीद कर इसे अपने कंप्यूटर में इम्प्लीमेंट करवा सकते है.
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रविवार, 16 जुलाई 2017

Breathalyzer Kya Hai aur Yah Kaise Kaam Karta Hai?

3 comments
breathalyzer
दोस्तों क्या आप जानते है की breathalyzer kya hota hai aur yah kaise kaam karta hai? या blood alcohol ki janch kaise ki jati hai? कोई अल्कोहल का सेवन करके गाड़ी ड्राइव करता है और उसे पुलिस पकड़ लेती है तो वह आखिर कैसे जान जाती है की गाड़ी ड्राइव करने वाले ब्यक्ति ने कितनी मात्र में अल्कोकोल का सेवन किया है.
ड्रिंक एंड ड्राइव कभी नहीं करना चाहिए. यह खुद अपने लिए ही घातक है. ड्रिंक करने के बाद गाड़ी ड्राइव करने पर हो सकता है की आप उसे ढंग से ड्राइव न कर पाए और कही टक्कर लग जाये.

Blood Alcohol concentration poori jankari HIndi me

breathalyzer kya hota hai

यह कैसे पता लगाया जाये की कोई भी ड्रिंक करके गाड़ी ड्राइव कर रहा है. किसी भी इंसान को देख कर या उसके हाव भाव देख यह नहीं जज किया जा सकता है की वह इसान ड्रिंक किया हुआ है.
Robert Frank Borkenstein जो Indiana State Police में कप्तान थे और बाद में Indiana University Bloomington में प्रोफेसर रहे. उन्होंने 1954 में breathalyzer का अविष्कार किया और 13 may 1954 को इसे ट्रेड मार्क की तरह registerd कराया. उन्होंने ब्लड अल्कोहल का पता करने के लिए chemical oxidence और फोटोमेट्री का प्रयोग किया था.
बाद में इन्होने breathalyzer में ब्लड अल्कोकल का पता करने के लिए इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी का प्रयोग करने लगे.
सन 1967 में tom parry jones जो UWIST के लेक्चरर थे और William 'Bill' Ducie जो एक चार्टेड इलेक्ट्रिक इंजिनियर थे, ने मिलकर पहला इलेक्ट्रॉनिक breathalyzer  बनाया और Lion लेबोरेटरी की स्थापना किया.
blood alcohol का पता करनेके लिए ब्लड सैंपल से भी पता किया जा सकता है लेकिन इसमे ब्लड सैंपल लेकर उसे लैब में भेजना पड़ेगा. तब तक गाड़ी driver अपने घर चला जायेगा.
इसीलिए हमें एक ऐसे device की जरुरत है जो तुरंत ही यह पता लगा ले की ब्यक्ति कितनी मात्र में अल्कोहल का सेवन किया है.

breathalyzer kaise kaam karta hai?

चुकी जैसे ही हम अल्कोहल का सेवन करते है हमारी body उसे तुरंत ही अब्सोर्वे  करना शुरू कर देती है. मतलब यह की हम इसे जहा से इनपुट लेते है और जहा से आउटपुट देते है उसके बीच में ही यह अब्सोर्वे हो जाती है. और यह हमारे फेफड़ो से absorve होकर हमारे ब्लड में मिल जाती है. सांसो के द्वारा पता लग जाता है.
breathalyzer ब्यक्ति के साँस से यह पता लगा लेता है की ब्यक्ति के ब्लड में कितना अल्कोहल है. या ब्यक्ति कितना ड्रिंक किया है.  अब इसमे जो रिजल्ट आता है वो 0.015, 0.08, 0.025 देखने में यह कभी कम है लेकिन यह पता लग जाता है की आपके body में कितना अल्कोकल है.
breathalyzer-table
अब जो रिजल्ट आ रहा है 0.05, 0.08 या जो भी इसका मतलब यह है की यह रिजल्ट आपके per 100 ml ब्लड में अल्कोकल की मात्र को दर्शाता है.  जैसे यदि रिजल्ट आता है की 0.08 तो इसका मतलब यह है की आपके body में 8 ग्राम अल्कोहल प्रति 100 ml ब्लड में है.
breathalyzer-table-2
यह अलग अलग देश में अलग अलग रेंज में होता है.या यह कहे की सभी देशो की अपनी अपनी limit रेंज है. और आप यदि ऊस limit के ऊपर ड्रिंक करके ड्राइव करते है तो वह illigal हो जायेगा.

breathalyzer kitane prakaar ke hote hai.

breathalyzer 3 तरह के होते है.

  1. simple/color breathalyzer
  2. intoxilyzer
  3. alco censor 

simple/color breathalyzer

इसमे जब ड्रिंक किया हुआ ब्यक्ति जब फूक है तो इसका कलर बदल जाता है. और उस बदले हुए कलर के ही हिसाब से यह पता लग जाता है की इस ब्यक्ति के ब्लड में कितना अल्कोकल है.
simple/color-breathalyzer

intoxilyzer

इस प्रकार के breathalyzer में इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी के द्वारा यह पता लगाया जाता है की साँस में अल्कोहल में मोलिकुल्स कितने है. इसमे इन्फ्रारेड किरणों के द्वारा साँस की जाँच करके एक एररलेस  रिजल्ट प्राप्त किया जाता है. और उससे यह पता लग जाता है की ब्यक्ति के ब्लड में अल्कोकल की कितनी मात्र है.
intoxilyzer

alco censor 

यह एक इलेक्ट्रॉनिक breathalyzer device है. इसमे एक फ्यूल सेल का इस्तेमाल किया जाता है. और जब कोई ब्यक्ति इसमे फूक मारता है तो फ्यूल सेल activate हो जाता है और यह तुरंत ही कैलकुलेट करके यह बता देता है की ब्लड में कितना अल्कोकल है.
alco-censor

क्या breathalyzer को cheat क्या जा सकता है?

यदि आप यह सोच रहे है की आप breathalyzer को cheat कर सकते है तो आप गलत है. इसे किसी भी तरह से cheat नहीं किया जा सकता है. यदि इसे cheat करें तो इसमे हम लोगो का ही नुकसान है.
यदि पुलिस हमें ड्रिंक एंड ड्राइव से रोकती है तो पुलिस को हमारी सुरक्षा की चिंता है. तो हमें भी अपने सुरक्षा के बारे में जरुर सोचना चाहिए.

Conclusion

breathalyzer एक बहुत ही बेहतर device है जिसके द्वारा तत्काल ही पता लग सकता है की कोई इंसान ड्रिंक किया है या नहीं और यदि ड्रिंक किया है तो कितना. मैं एक बार फिर से दोहराना चाहता हूँ की हमें कभी भी ड्रिंक एंड ड्राइव नहीं करना चाहिए.

मुझे उम्मीद है की मेरा आज का यह पोस्ट breathalyzer kya hai aur yah kaise kaam karta hai? जरुर पसंद आया होगा. इसे आप अपने मित्रो  के साथ facebook, twitter पर जरुर शेयर करे.

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शनिवार, 15 जुलाई 2017

cyber war kya hai? kya hum The digital war ke liye taiyar hai

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cyber-war-kya-hai
दोस्तों आप सब war के बारे में तो सुना ही होगा. लेकिन क्या आप जानते है की cyber war kya hota hai? या Digital war kya hota hai? war में तो fighter plane, militry, army से लड़ी जाती है. लेकिन यह cyber war kaise ladi jati hai?
चुकी आज के समय में हम लोग जो भी काम कर रहे है वो सब online है.  अर्थात हम जो भी कार्य कर रहे है वो सारे कार्य internet के माध्यम से कर रहे है. तो संभव है की भविष्य में युद्ध भी internet के माध्यम से ही लड़े जायेंगे.  तो आज हम इसी के बारे में बताएँगे की यह Digital war kya hota hai?

Digital war kya hota hai? क्या हम इसके लिए तैयार हैं?

Cyber war kya hota hai?

चुकी सारे काम कंप्यूटर और internet के माध्यम से ही हो रही है तो संभव है की भविष्य में war भी कंप्यूटर और internet के द्वारा ही हो.
सामान्यत: युद्ध में एक देश के सैनिक दुसरे देश के सैनिक से युद्ध करते है. लेकिन इस cyber war में दो देश कंप्यूटर और internet के माध्यम से एक दुसरे के गोपनीय और अति संवेदनशील जानकारी को चुराने की कोशिश या उनके कंप्यूटर को internet के माध्यम से जैम कर देता है.
एक देश दुसरे देश के सारे कंप्यूटर को internet के माध्यम से जाम कर दे या उन पर कब्ज़ा कर ले. तो दूसरा देश वैसे ही तबाह हो जायेगा.
जैसे कुछ दिन पहले ही आप ransomeware virus attack के बारे में जरुर सुना होगा की किस प्रकार उसने कई देश के कंप्यूटर को जैम कर दिया और फिरौती की रकम के लिए धमकी देने लगा.
cyber war में क्या होता है की एक देश छुप कर किसी दुसरे देश के खिलाफ उसके कंप्यूटर नेटवर्क को जैम करने या उस पर कब्ज़ा करने के लिए तरह-तरह के जुगाड़ लगता है. ताकि वो बिना किसी के नज़र में आये अपने दुशमन देश को तबाह कर दे.


cyber war का क्या मकसद है?

दरअसल इस cyber war का मकसद कभी किसी देश के कार्य प्रणाली को मानिटर करना होता है तो कभी किसी दूसरे देश के नागरिकों को मानिटर करने के लिए होता है की आखिर वे कर क्या रहे है.
कभी कभी इनका उद्देश्य किसी अफवाह को किसी देश के नागरिको में फैलाकर उन्हें परेशान करने के लिए होता है.  जिस प्रकार से ISIS करता है.
कभी कभी सिर्फ यह मॉनिटर करने के किये किया जाता है की हमारा दुश्मन मुल्क आखिर हमारे विषय में क्या सोच रहा है.

United nation का cyber security इंडेक्स में इंडिया का स्थान.

यूनाइटेड नेशन ने cyber security का एक इंडेक्स निकला हैे जिसमे भारत 25 वें स्थान पर है.  इस समय India बड़ी ही तेज़ी से digital होता जा रहा है. यहाँ पर बहुत से ऐसे यूजर भी है जो जिओ के आने के बाद internet का यूज़ करना शुरू किये है और उन्हें अभी यह पता नहीं होगा की उनके बारे में internet पर क्या क्या सूचना मौजूद है.
लेकिन cyber war होता है और देश का एक सामान्य यूजर अपने डाटा को सुरक्षित कर ले तो यह भी काफी बड़ी बात होगी.

cyber war के लिए कैसे तैयार हों?

  • हमें अपने डाटा का बैकअप रेगुलर लेते रहना चाहिए.
  • काफी स्ट्रोंग पासवर्ड यूज़ करना चाहिए. और उसे कुछ समय के बाद चेंज करते रहना चाहिए.
  • online scam जैसे आपकी लाटरी निकल गई है आप अपने सारी डिटेल email कर दीजिये. तो इस तरह के scam से बचे रहना चाहिए, और ऐसे मेसेज को डिलीट कर देना चाहिए.
  • अपने internet security को मेंटेन किये रहिये. कंप्यूटर में एक अच्छा सा एंटीवायरस जो internet पर फ़ायरवॉल का काम करे उसे जरुर यूज़ करे. उसे समय समय पर अपडेट करते रहे.
  • internet पर आप जो भी करे उनका काफी ध्यान से करे. साईट की सर्फिंग काफी सावधानी से करें.

इस प्रकार के यह कुछ सिंपल step है जिसे हम अपना कर cyber war में contribute कर सकते है. यदि यह सारे step हम फॉलो करते है और हमारे देश पर कोई cyber attack हुआ तो हम लोग उससे काफी हद तक बच सकते है. जिससे देश पर कोई विशेष असर नहीं होगा.

Conclusion

हो सकता है की भविष्य में cyber war हो तो उसके लिए हमें पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए. यदि किसी एक ब्यक्ति के कंप्यूटर से डाटा निकल कर आता है की वह क्या करता है तो यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है.
लेकिन यदि किसी देश के करोडो लोगो के कंप्यूटर से डाटा कोई निकाले की उस देश के लोग क्या क्या करते है तो यह एक गंभीर बात है. या आपके ही कंप्यूटर को कोई देश आपके देश के खिलाफ इस्तेमाल करे तो यह बहुत ही खतरनाक बात है.
यहा पर सम्भावनाये तो बहुत है. मुझे उम्मीद है की यह cyber war kya hai? या  cyber attack kya hai? आप लोग समझ गए होंगे. मुझे उम्मीद है की यह आर्टिकल आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. इसे facebook, twitter पर जरुर शेयर करे. 
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शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

digital signature kya hai aur kaise kaam karta hai?

2 comments
digital-signature
दोस्तों क्या आप जानते है की digital signature kya hota hai? और यह digital signature kaise kaam karta hai? इस समय सब कुछ डिजिटल हो रहा है. तो हमारा signature क्यों नहीं?
किसी भी document पर signature का मतलब होता है की हम उस पर लिखे गए जानकारी से सहमत है. और उस को  हमने पूरा पढ़ कर signature किया है. लेकिन digital signature का नाम आते ही मन में एक संदेह लगा रहता है की क्या यह पूरी तरह सुरक्षित है. और क्या यह पुराने signature के बेहतर है.तो इस चर्चा करने से पहले हम यह जान लेते है की digital signature aur paper signature me antar kya hai?

digital signature vs paper signature in Hindi


यदि बात की जाये paper signature की तो इसको बड़ी ही आसानी से किसी एक्सपर्ट के द्वारा कॉपी किया जा सकता है. और किसी भी फर्जी काम को अंजाम दिया जा सकता है. और बहुत  से लोग इसका काफी फायदा उठा चुके होंगे.
लेकिन जब बात digital signature की आती है तो इसको कभी भी कॉपी नहीं किया जा सकता है. और ना ही इसके साथ छेड़छाड़ किया जा सकता है.  आजकल सरकार के द्वारा सभी सेवाए इ गवर्नेस के माध्यम से लोगो को मिल रही है.
आय, जाति निवास प्रमाण पत्र, वोटर कार्ड, अधर कार्ड, pan कार्ड पर पहले अधिकारियो के signature होते थे. लेकिन अब यह सारा काम digital signature  के द्वारा किया जा रहा है. तो इस पर संदेह की कोई गुंजाईश ही नहीं है.

digital signature kya hota hai.

इसमे public key algorithm  के इस्तेमाल से computer code या key generate किया जाता है. जो एक पब्लिक होता है और दूसरा प्राइवेट होता है. और दोनों एक दुसरे से लिंक्ड होते है. और फिर साइनिंग software की मदद से signature का one way hash बनाया जाता है. इसके पश्चात प्राइवेट key की सहायता से इस हैश को encrypt कर दिया जाता है. और इसे ही हम digital signature कहते है.
यह paper signature के साथ टेम्परिंग किया जा सकता है लेकिन digital signature के साथ ऐसा संभव नहीं है. यदि कोई ब्यक्ति इसके साथ टेम्परिंग की कोशिश भी करेगा तो यह पकड़ में आ जायेगा.

digital signature kaise kaam karta hai?

यह paper signature से काफी भिन्न होता है जहा paper signature में हम पेन और  paper का इस्तेमाल करते है. वही digital signature में software generated पब्लिक key का इस्तेमाल करते है. अर्थात digital signature एक प्रकार का computer code होता है. जिसे सिर्फ कोई अधिकृत ब्यक्ति ही इस्तेमाल कर सकता है. इसके उपयोग करने के लिए एक यूजर आईडी और पासवर्ड की जरुरत होती है. इसके साथ एक डोंगल की भी जरुरत होती है.
चुकी हैश का वैल्यू यूनिक होता है, और यदि कोई इसके हैश वैल्यू के साथ टेम्परिंग करने  की कोशिश करेगा तो इसका वैल्यू change हो जायेगा. और वेलिडेशन के समय डाटा मैच नहीं होने के कारण यह पता लग जायेगा की इसके साथ टेम्पिंग किया गया है. और यह भरोसे के लायक नहीं है.

क्या digital certificate का इस्तेमाल safe है?

digital signature का इस्तेमाल पूरी तरह से safe है. इसमे कोई संदेह नहीं होना चाहिए. क्योकि इसका प्राइवेट key cryptographic टोकन से बनता  है और यह उसी के अन्दर हमेशा रहता है.
इसको एक्सेस करने के लिए cryptographic टोकन के साथ PIN की भी जरुरत होती है. यदि आप अपना  cryptographic टोकन और  PIN किसी के साथ शेयर नहीं करते है तो आपका digital signature पूरी तरह से सुरक्षित है.

digital signature के मुख्य फायदे 

  • चुकी हम पहले ही बता चुके है की digital signature प्राइवेट key के साथ लिंक्ड होता है. और इसे कोई दूसरा नहीं इस्तेमाल कर सकता है. तो इससे यह पता लग जाता है की document का असली मालिक कौन है.
  • यदि कोई ब्यक्ति किसी document में digital signature करता है तो वह इससे बाद में मुकर नहीं सकता है की यह signature उसका नहीं है. या यह नहीं कह सकता है की signature फर्जी है. 
  • यदि इसमे कोई छोटी से भी टेम्परिंग की जाती है तो वह पता लग जाता है. और इसका कॉपी करना नामुमकिन है. 

digital certificate और digital signature में difference.

digital certificate का इस्तेमाल  किसी website के trust को verify करने के लिए किया जाता है. की यह website कितना त्रुस्तेद है. जबकि digital signature का यूज़ किसी document को verify करने के लिए किया जाता है.

Conclusion

आज के समय में सरकारी दस्तावेज से लेकर ईमेल तक में digital signature का इस्तेमाल हो रहा है. क्योकि इसके द्वारा किसी भी document के सत्यता, इसके साथ टेम्परिंग आदि का पुख्ता प्रमाण मिलता है.
मुझे उम्मीद है की मेरा आज का यह आर्टिकल digital signature kya hai aur kaise kaam karta hai? आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. और मेरा आप लोगो से निवेदन है की आप लोग इसे अपने मित्रो के साथ facebook, twitter पर इसे जरुर शेयर करे.

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गुरुवार, 13 जुलाई 2017

TF aur CF kya hai? Trust Flow and Citation Flow in Hindi

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दोस्तों  क्या आप जानते है की  TF aur CF kya hai? Trust Flow and Citation Flow kya hota hai.  यदि आप एक ब्लॉगर है, तो आप अपने ब्लॉग के लिए जरुर backlink बनाते होंगे.  लेकिन क्या आप जानते है की यह backlinks यदि high quality का न हो तो यह आपके blog को पोपुलर होने से पहले ही बर्बाद कर देगा. और यदि आप backlinks नहीं बनाते है तो यह आपका ब्लॉग कम समय में लोकप्रिय नहीं हो सकता है.
सिर्फ इतना ही नहीं यदि आप का ब्लॉग का high quality backlinks नहीं है तो वह search engine में भी हाई रैंकिंग नहीं पायेगा. इसीलिए backlink एक बहुत ही जरुरी seo techniques है.  और इसी backlinks का एक हिस्सा TF और CF है.

Blog ka TF and CF ratio kya hona chahiye?

Trust Flow क्या होता है?

जब भी आप अपने ब्लॉग के लिए backlinks बनाये तो आपको trust flow यानि TF  का  ध्यान रखना होगा.
किसी भी blog का TF या trust flow ब्लॉग के backlinks की quality और relevancy को बताता है.  आप trust flow metrics की मदद से यह जान सकते है की आप के द्वारा बनाये गए backlinks high quality के है या low quality के.
यदि आप ने backlinks तो बहुत बनाये लेकिन TF जीरो है तो आपके ब्लॉग का backlinks low quality का है.  और यह आपके search रैंकिंग को प्रभावित कर सकती है.
कभी भी backlinks को high अथॉरिटी website से ही बनाना चाहिए. और ज्यो ज्यो ब्लॉग का TF हाई होता जायेगा आपका ब्लॉग SERP में उतनी ही हाई रैंकिंग प्राप्त करेगा.

Citation Flow क्या होता है?

citation flow यानि CF आपको यह बताता है की आपके blog पर कितना links को पॉइंट किया गया है. यह केवल वेब पेज पर पॉइंट किये गए links और root domain की सख्या बताता है.
यदि आपके ब्लॉग का TF काफी कम है और CF बहुत ही ज्यादा है तो हो सकता है की भविष्य में आपको google पेनाल्टी का सामना करना पड़े. क्योकि google algorithm के हिसाब से TF और CF का ratio 1 : 2 से ज्यादा नहीं होना चाहिए.
अर्थात यदि आपके ब्लॉग का TF 15 है और CF 80 है तो आप यह जान लीजिये की आपके ब्लॉग पर नेगेटिव SEO इफ़ेक्ट है.


ब्लॉग का  TRUST FLOW और CITATION FLOW  की  कैसे जाँच करें ?

ब्लॉग का TF और CF की जाँच करने के लिए सबसे बेहतरीन टूल majestic site explorer है. इसके द्वारा आप बहुत ही आसानी से TF और CF की जाँच कर सकते है.  इस website के द्वारा आप अपने ब्लॉग का trust flow, citation flow, external backlinks, reffering domains, reffering IPs, Referring Subnets की जानकारी पा सकते है.

Website का Trust Flow बढाने का तरीका

  • जब कोई ब्लॉग्गिंग शुरू करता है तो वह सबसे बड़ी गलती यह करता है की बिना वेबसाइट की अथॉरिटी की जाँच किये ही वह backlinks बना देता है. जिससे उनको नुक्सान उठाना पड़ जाता है.
  • यदि आप high अथॉरिटी वेबसाइट से dofollow links बनाये तो ब्लॉग का TF बढ़ जायेगा.
  • यदि आप पहले ही बहुत ज्यादा मात्रा में  low quality backlinks बना लिए है तो आप पहले उनको रिमूव कीजिये. जैसे आप bad quality backlinks को रिमूव करते है तो आपके blog का trust flow बढ़ सकता है.
  • कभी भी बहुत ज्यादा मात्र में nofollow backlinks नहीं बनाना चाहिए क्योकि इससे रेफ्फेरल ट्रैफिक तो मिलता है लेकिन citation flow भी बढ़ जाता है. जो seo के हिसाब से ब्लॉग के लिए बिलकुल सही नहीं है.
  • आप हमेशा backlinks बनाने के लिए ऐसी website का चुनाव कीजिये जिनकी अथॉरिटी अच्छी हो. चाहे यह backlinks comment के द्वारा बनाये या गेस्ट पोस्ट के द्वारा.
  • कभी भी ऐसे website पर backlink को न  बनाये जो dofollow link प्रोवाइड  न करे.और जिसका DA बेहतर न हो. क्योकि ऐसी website से backlinks लेने पर आपके ब्लॉग का Trust Flow बढ़ने के बजाय Citation Flow  बढ़ जायेगा. जिससे आपके blog को नुकसान हो सकता है.
  • कभी कभी  unwanted वेबसाइट से भी backlinks मिल जाती है. जो आपके blog के niche से रिलेटेड नहीं होती है.  इससे भी blog का tust flow बढ़ने की बजाय citation flow बढ़ जाता है. अगर इस प्रकार के backlinks आपके blog के है तो आप उन्हें जीतनी जल्दी हो सके रिमूव कर दीजिये.
  • यदि किसी वेबसाइट पर गेस्ट पोस्ट लिखते है तो इस बात का ध्यान रखिये की वह website high अथॉरिटी वाली हो. और वह आपको dofollow backlinks प्रोवाइड करे.
किसी भी ब्लॉगर के लिए किसी high authority website से dofollow backlinks पाना मुस्किल हो सकता है. लेकिन नामुमकिन नहीं. यह एक चैलेंज की तरह है जिसे कोशिश करके ही पाया जा सकता है.
यदि कोई ब्लॉगर अपने blog के लिए high trust flow या high authority वाली website से 2 या 3 backlinks बना ले तो वह एक समय brand बन कर सबके सामने आ जायेगा.

Conclusion

यदि आप backlinks बनाते है तो उसका प्रभाव लगभग एक महीने के बाद ही दिखाई देता है.  लेकिन किसी भी ब्लॉग का trust flow और citation flow हर रोज बदलता रहता है.  यदि आप trust flow और citaion flow पर कण्ट्रोल कर लिए तो आप का blog बहुत जल्द ही फेमस हो जायेगा.
मुझे उम्मीद है की आज का रह आर्टिकल TF aur CF kya hai? Trust Flow and Citation Flow आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा और इसे आप अपने मित्रो के साथ facebook, twitter पर जरुर शेयर करे. 
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