शनिवार, 19 अगस्त 2017

Blogging se paise kaise kamaye? 5 Popular Tarike

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दोस्तों आप लोग online business शब्द तो जरुर सुने होंगे और सोचते होंगे की यह कैसे किया जाता है. इन्ही ऑनलाइन business में से एक है blogging यदि आप के पास किसी टॉपिक  की जानकारी है और आप उस पर लिख सकते है तो यह business आपके लिए काफी पैसा कमा सकता है. लेकिन इस बिज़नस के द्वारा पैसे कमाना इतना आसान नहीं है जितना की बोलने और सुनने में लगता है. आज हम आप लोगो को बताएँगे की Blogging se paise kaise kamaye?
आप लोग सोचते होंगे की इस blogging से कितना पैसा कमाया जा सकता है तो मैं आप लोगो को बरता देता हूँ की इस blogging से आप 5k  से लेकर 100k तक कमा सकते है यह कमाई इस बात पर निर्भर करता है की आप का ब्लॉग कितना पोपुलर है.

Blog se paise kaise kamaye?

कामयाब blogger blogging से पैसे कमाने के लिए सिर्फ adsense पर ही केवल निर्भर नहीं होते है. वे इसके अलावा affiliated marketing, direct advertisement, ebook अदि के द्वारा भी पैसे कमाते है, और अपनी earning करते है.
पैसे किसको अच्छे नहीं लगते है? मतलब यह की यदि आप शौक के लिए blogging करते है और आप को पैसे मिलने लगे तो आप भी उसे पसंद करेंगे, और यदि आप blogging को पैसे के लिए कर रहे है तो आप को मेरा यह पोस्ट पूरा पढ़ लेना चाहिए.
adsense एक अकेला ऐसा साधन नहीं है जिससे ब्लॉग से पैसे कमाए जा सकते है. इसके अलावा भी बहुत से तरीके है. तो चलिए आप लोगो को एक एक करके उन तरीको को बता देता हूँ जिससे आप पैसे कम सकते है.


#1 -Affiliated Marketing

blog से पैसे कमाने के लिये यह सबसे अच्छा और बेहतर तरीका है. इसमे आपको अपने वेबसाइट या ब्लॉग के द्वारा किसी अन्य वेबसाइट के सामान को सेल करना होता है और वह वेबसाइट आपके द्वारा किये गए सेल पर आपको कुछ परसेंट कमीशन देती है.
जैसे यदि आप  अपने ब्लॉग पर मोबाइल या कंप्यूटर की जानकारी देते है तो आप flipcart, snapdeal, या amazon पर एक अकाउंट बना ले और कंप्यूटर या लेटेस्ट मोबाइल के लिए एक एफिलिएटेड लिंक generate कर ले और अपने ब्लॉग पर उस प्रोडक्ट की डिटेल के साथ उस लिंक को अपने ब्लॉग में लगा दे.
अब जो विजिटर आपके ब्लॉग पर आयेंगे और अप के आर्टिकल को रीड करेंगे और यदि उन्हें लगा की  ब्लॉग पर दिया गया लिंक उनके काम का है तो वह उसे ओपन करेंगे और यदि प्रोडक्ट पसंद आया तो वह उसे purchase कर लेंगे. जिससे आपको कुछ प्रतिशत commission प्राप्त होगा.

#2 - Direct Advertisement

ब्लॉग के पैसे कमाने का दूसरा बेहतर तरीका है की आप अपने ब्लॉग के खाली स्पेस को डायरेक्ट advertisement के लिए किसी फ़र्म से संपर्क करके उसके ad को लगा दे. इसमे आपको CPC की चिंता करने की जरुरत नहीं होती है.
इस प्रकार के ad में एक ad का कितना पैसा लेना है और उस ad को कितने समय तक लगाना है यह आपके ऊपर निर्भर करता है.  यदि आपके ब्लॉग पर ज्यादा ट्रैफिक है तो आप ज्यादा फीस चार्ज कर सकते है.

#3- Create and Sell eBook

तीसरा और बहुत से success ब्लॉगर के द्वारा भी अपनाया हुआ तरीका यह है की आप अपने ब्लॉग के टॉपिक के हिसाब से उन पोस्ट का एक पीडीऍफ़ बनाइये जिसे लोग जानना चाहते है और उन्हें लोगो को सेल कर दीजिये.
जैसे मान लीजिये की आप का ब्लॉग इन्टरनेट के टॉपिक पर है तो आप SEO, blogging, online money making पर बुक लिख सकते है और उन्हें पीडीऍफ़ बना कर अपने ब्लॉग के माध्यम से सेल कर सकते है.

# 4 - Khud ki Service dena

खुद की सर्विस देना का मतलब यह है की आप में जो टैलेंट है या आप को जो काम आता है, उसे आप अन्य लोगो के लिए करें, और उसके लिए लोगो से कुछ फीस चार्ज करे.
कुछ इन्टरनेट से जुडी हुई काम आपको example के तौर पर बता रहा हूँ. लेकिन यह जरुरी नहीं की आप यही कम करें आप वह काम कीजिये जिसमे आपका इंटरेस्ट हो. वह काम ऑनलाइन हो या ऑफलाइन.
जैसे

  • blog banaiye
  • Logo  banaiye
  • blog ke liye article likhiye
  • kisi blog ko social media par share kariye

# 5- Paid Review

यह तरीका भी बहुत बढ़िया है लेकिन इसमे कुछ requirement है जिसे आपके ब्लॉग या वेबसाइट को पूरा करना होगा. यह काम आप तब कर सकते है जब आप का ब्लॉग काफी पोपुलर हो जाये. क्योकि जब तक आपका ब्लॉग पोपुलर नहीं होगा तब तक आपको कोऊ कंपनी review करने के लिए पैसे नहीं देगी.
जैसे यदि आप का ब्लॉग software  या app की जानकारी देता है तो, जब आपके पास अच्छी ट्रैफिक आ जाएगी तो software या app डेवलपर कम्पनी आपसे संपर्क करके अपने software या app को रिव्यु करने के लिए कहेंगी और उसके लिए आपको पैसे भी देंगी.

Conclusion

ब्लॉग के द्वारा पैसे कमाने के तरीके है वो सबसे बेस्ट तरीको में से है. इनके वावजूद भी बहुत से ऐसे तरीके है जिन्हें अपनाकर आप अपने ब्लॉग से पैसे कमा सकते है. लेकिन यदि आप अपने ब्लॉग से ज्यादा पैसे कमाना चाहते है तो इन 5 तरीको को जरुर अपनाएं.
मुझे उम्मीद है की आप लोगो को आज का यह आर्टिकल Blogging se paise kaise kamaye? 5 Popular Tarike जरुर पसंद आया होगा. इसे आप अपने मित्रो के साथ facebook, twitter पर जरुर शेयर करें.
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शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

Famous Technical Words aur Unaka Matlab

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Famous-Technical-Words
दोस्तों आप लोग मोबाइल, कंप्यूटर और टेबलेट इस्तेमाल करते होंगे और उनके बारे में कुछ न कुछ जरुर जानते होंगे लेकिन इन गैजेट्स के जब आप किसी मैगज़ीन या internet पर पढ़ते होंगे तो कुछ ऐसे शब्द आते होंगे जैसे mAh, megapixcel, resolution, clock स्पीड  आदि जिन्हें आप पढ़ते तो होंगे और उसे अपने गैजेट का एक फीचर समझते होंगे लेकिन उसका मतलब नहीं जानते होंगे और उससे क्या फायदा है शायद यह भी नहीं जानते होंगे.  आज हम आप लोगो को इन्ही Famous Technical Words aur Unake Matlab को आप लोगो को बताएँगे.
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mAh Kya hai?

इससे बैटरी के चार्ज पॉवर का पता चलता है. mAh जितना ज्यादा होगा, उतनी ही डिवाइस को ज्यादा पावर मिलेगी और बैटरी लंबे समय तक काम करेगी।


Rear camera Kya hai?

रियर कैमरा मतलब फोन का बैक कैमरा है, या वह कैमरा जो फ़ोन के पिछले हिस्से में होता है. इसकी मदद से पोर्ट्रेट या लैंडस्केप में यूजर्स को फोटो खींचने की सुविधा देता है.

Front camera Kya hai?

किसी भी फ़ोन या टेबलेट्स  में फ्रंट कैमरा यूजर को सेल्फी खींचने और वीडियो कॉलिंग के काम आता है.

Mobile payment Kya hai?

इसका सीधा सा मतलब है की मोबाइल से पेमेंट करना. mobile payment के  द्वारा पैसा ट्रांसफर भी किया जा सकता है. mobile payment को चार तरीको से किया जाता है.

  1. SMS (Short massage service)
  2. Direct Mobile Billing
  3. Mobile Web payment (WAP)
  4. Near Field Communication(NFC)

Quad Core or Octa Core Kya hota hai?

प्रोसेसर को CPU भी कहा जाता है. Quad Core processor का मतलब है की इस processor में 4 layer है. और OCTA core processor का मतलब है की इस processor में 8 layer है. जिस processor में जितने layer होते है वह एक समय में उतने काम कर सकता है. जैसे single core  प्रोसेसर एक समय पर एक ही काम करता है, वैसे ही क्वाड-कोर प्रोसेसर एक समय में चार अलग-अलग काम कर सकते हैं. मल्टीटास्किंग के लिए ये जरूरी है कि फोन में मल्टीकोर प्रोसेसर हो.

64 bit processor Kya hai?

64 बिट प्रोसेसर का मतलब है कि जो प्रोससेर अआपके system में इस्तेमाल किया गया है, वो फोन में ज्यादा रैम, ज्यादा मेमोरी और बेहतर कैमरा फीचर्स सपोर्ट कर सकता है. 64 बिट प्रोसेसर के साथ फोन में बेहतर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर फीचर्स दिए जा सकते हैं. इससे बेहतर बैटरी बैकअप भी मिलता है. iphone में भी 64 बिट प्रोसेसर मिलता है. और यह पुराने 32 बिट processor से बेहतर स्पीड से काम करता है.

CLOCK SPEED Kya hai?

clock Speed  इस बात का माप होता है कि कोई भी प्रोसेसर एक सेकंड के दौरान कितने ऑपरेशन पूरे कर सकता है. चूंकि नए जमाने के प्रोसेसर एक सेकंड में लाखों क्लॉक साइकिल पूरे कर सकते हैं, इसलिए इन्हें आमतौर पर गीगाहर्ट्स या मेगाहर्ट्ज में मापा जाता है. प्रोसेसर की ओवरऑल परफॉर्मेंस क्लॉक स्पीड पर भी निर्भर करती है. यानी अगर प्रोसेसर में बाकी कंपोनेंट अच्छे हैं, लेकिन उसकी क्लॉक स्पीड कम है, तो वह धीमा काम करेगा.  इसलिए नया मोबाइल, लैपटॉप या कम्प्यूटर खरीदते समय उसके प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड की जानकारी भी लेनी चाहिए.

Cash memory Kya hai?

यह  डिवाइस मेमोरी में एक ऐसी जगह होती है जहां से हाल ही में एक्सेस किया गया डाटा आसानी से रिट्रीव किया जा सकता है.  यूजर्स अपने डिवाइस पर जो भी काम करते हैं उसकी कॉपी कैश मेमोरी में भी सेव रहती है, और processor  मेन मेमोरी की जगह कैश मेमोरी से डाटा लेता है. high कैश मेमोरी वाले processor high स्पीड से काम करते है.

GPS Kya hota hai?

इसका पूरा नाम Global positioning system है. GPS सर्विस एक सैटेलाइट बेस्ड सर्विस है जो डिवाइस की लोकेशन, पोजिशन और स्थान विशेष के मौसम की जानकारी आदि देती है. इसे सुरक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.

GPU Kya hota hai?

इसका पूरा नाम Graphic processing Unit है. इसके उपयोग से बेहतर विडियो quality प्राप्त किया जाता है. मोबाइल में high एंड गेम खेलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जिससे बेहतर डिस्प्ले quality मिलती है.

WCDMA Kya hai?

इसका पूरा  नाम wideband code division multiple access होता है. WCDMA का  इस्तेमाल  3G टेक्नोलॉजी में होता है. WCDMA डिवाइस और नेटवर्क आम CDMA डिवाइसेस पर काम नहीं करते हैं. इसीलिए 3G सिम और फोन अलग होते हैं.

HDMI Kya hota hai?

इसका पूरा नाम High Defination Media Interface होता है. डिजिटल ऑडियो और वीडियो ट्रांसफर करने के लिए HDMI पोर्ट और केबल का इस्तेमाल किया जाता है.  स्मार्टफोन्स के डाटा केबल में एक साइड USB होता है और दूसरी तरफ HDMI, और इसके द्वारा आप अपने smart फ़ोन के विडियो या पिक्चर अपने टीवी पर भी देख सकते है.

Resolution Kya hota hai?

किसी भी कंप्यूटर, laptop, मोबाइल टेबलेट की स्क्रीन quality उसके resolution पर ही निर्भर करती है. जिस डिवाइस का जितना ज्यादा resolution होगा उसकी डिस्प्ले quality उतनी ही अधिक होगी. कुछ resolution की लिस्ट निचे है.

  • VGA (Video Graphics Array) - 640x480
  • SVGA (Super Video Graphics Array) - 800x600
  • QVGA (Quarter Video Graphics Array) - 320x240
  • WQVGA (Wide QVGA) - XXXx240
  • HVGA (Half VGA) - 480x320
  • WVGA (Wide VGA) - XXXx480
  • FWVGA (Full Wide Video Graphics Array) - 854x480
  • Quarter HD or qHD - 960x540
  • XGA (Extended Graphics Array) - 1024x768
  • SXGA (Super Extended Graphics Array)) – 1080 x 1024
  • WXGA (Wide Extended Graphics Array) - 1366x768
  • HD Ready (High Definition Ready) – 1360 x 768
  • HD (High Definition ) – 1280x 720
  • FHD (Full High Definition ) – 1920 x 1080
  • 4k or UHD (Ultra High Definition) - 3840 x 2160
  • 8k UHD (Ultra High Definition) - 7680 x 4320

मुझे उम्मीद है की आप लोगो को आज का यह पोस्ट जरुर पसंद आया होगा. और कुछ Famous Technical Words aur Unake Matlab को अच्छी तरह से जान गए होंगे. यदि किन्ही और शब्दों का मतलब जानना हो तो आप कमेंट box के जरिये हमें जरुर बताये, हम उनकेबारे में आप को जरुर बताने की कोशीश करेंगे.
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गुरुवार, 17 अगस्त 2017

Indus OS kya hai aur iske feature kya hai?

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Indus-OS
दोस्तों आज हम आप लोगो को एक नए mobile OS के बारे में बताएँगे जिसका नाम है Indus OS. आज के समय में लगभग सभी लोग मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते है. और यह भी कनाते होंगे की इन मोबाइल फ़ोन की सभी app इंग्लिश में होते है. शहर के पढ़े लिखे लोग तो इसे बहुत ही आसानी से मोबाइल को ऑपरेट कर लेते है. लेकिन गांव देहात के कम पढ़े लिखे लोग को इंग्लिश भाषा में मोबाइल को ऑपरेट करने में थोड़ी दिक्कत महसूस होती है. और इससे उन लोगो को स्मार्ट  फ़ोन इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है.
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बुधवार, 16 अगस्त 2017

Domain Authority kya hota hai aur isse kya fayda hai?

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Domain-authority-DA
दोस्तों आज हम आप लोगो को बताएँगे की domain authority kya hai aur isase kya fayda hai? यदि आप ब्लॉगर है तो आज का यह पोस्ट आपके लिए बहुत ही लाभदायक हो सकता है. क्योकि इस इन्टरनेट की दुनिया में हर रोज हजारो वेबसाइट और ब्लॉग ओपन होते है और यह सोचते है की वे बहुत ही जल्द एक फेमस ब्रांड बन जायेंगे लेकिन सर्च इंजन में हाई रैंकिंग न प्राप्त करने के  कारण ब्लॉग पर ट्राफिक नहीं आती है और ब्लॉग फेमस नहीं हो पाते है. इसका एक कारण यह भी है की उन ब्लॉग का DA (domain authority) का low होना.

Domain Authority kya hai?

दरअसल DA (domain authority) एक वेबसाइट या ब्लॉग के domain का measurement है जिसे moz कंपनी ने डेवेलोप किया है. यह domain age, backlink quality, और उस domain पर कंटेंट quality और क्वांटिटी पर निर्भर करता है. SEO के लिए domain authority को बढाना बहुत ही जरुरी होता है. क्योकि यह सर्च इंजन में रैंकिंग को प्रभावित करता है. DA को बढ़ा कर सर्च इंजन में हाई रैंकिंग प्राप्त किया जा सकता है और सर्च इंजन में हाई रैंकिंग से हाई ट्रैफिक भी प्राप्त किया जा सकता है.
अलग अलग वेबसाइट का DA भी अलग अलग होता है. नयी वेबसाइट या ब्लॉग का DA शुरू में बहुत ही कम होता है. और जैसे जैसे वेबसाइट पर कंटेंट और backlinks बढते जाते है वेबसाइट का DA भी बढ़ता जाता है. लेकिन किसी किसी  वेबसाइट का ही DA 100  हो पाता है.

Domain Authority ko kaise check kare?

इन्टरनेट पर बहुत से टूल है जिनसे आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट के DA की जाँच कर सकते है. लेकिन आप https://moz.com/researchtools/ose/ इस टूलका प्रयोग करके अपने वेबसाइट के  DA की जाँच कर सकते है.  जैसे ही आप इसे ओपन करेंगे इसमे domain कोपे करने के लिए एक इनपुट बॉक्स दिखाई देगा वहा पर आप अपने domain को टाइप कर दे यह आपके domain का DA और page authority को दिखा देगा.
moz सिस्टम किसी भी वेबसाइट को रैंकिंग देने के लिए 40 फैक्टर को चेक करता है जैसे वेबसाइट के backlinks क्या है. और वेबसाइट पर किस प्रकार की कंटेंट है और कितने कंटेंट है और उन्ही 40 फैक्टर के आधार पर यह वेबसाइट की रैंकिंग करता है.
किसी भी वेबसाइट का DA स्थिर नहीं रहता है यह या तो बढ़ता है या फिर घटता है. यदि यह बढ़ रहा है तो आपके वेबसाइट लिये बहुत ही अच्छी बात है लेकिन यदि घाट रहा है तो यह बहुत ही खराब संकेत है और उन कारणों का पता लगा कर दूर करना ही सबसे बेहतर है.


Website/ Blog ka domain authority kaise badhaye?

चुकी page का domain authority कई बातो पर निर्भर करता है. और अपने ब्लॉग का DA बढ़ने का मतलब है की सर्च इंजन से हाई ट्रैफिक पाने का चांस का ज्यादा हो जाना.
  • जो वेबसाइट ब्राउज़र में जल्दी ओपन हो जाती है. अर्थात जिस वेबसाइट या ब्लॉग का page लोड टाइम जितना ही कम होगा.  उसका DA हमेशा हाई होता है. इसीलिए ब्लॉग का page load टाइम पर हमेशा ध्यान देना चाहिए की यह कम से कम रहे.
  • social media आज हर क्षेत्र में उपयोगी साबित हो रही है. social media पर वेबसाइट कंटेंट को पब्लिश करने से वेबसाइट पर रेफरल ट्रैफिक मिलता है. और यह वेबसाइट की ब्रांड वैल्यू को बढाता है. यह बहुत ही बेहतर तरीका है ज्यादा से ज्यादा विजिटर के पास पहुचने का और अपनी जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तह पहुचने का. इस पर जितने ज्यादा follower होंगे उतने ही ज्यादा domain authority हाई होगा.
  • domain authority को हाई करने का एक तरीका यह भी है की आप अच्छी वेबसाइट पर से backlinks प्राप्त करे. क्योकि High PR backlinks से domain authority को हाई किया जा सकता है. और इससे page authority भी बढ़ जाता है.
  • जब भी आप नया आर्टिकल लिखे तो उसमे ब्लॉग के हाई रैंकिंग प्राप्त पुराने आर्टिकल का लिंक भी जरुर दे. इससे ब्लॉग का बाउंस रेट काम हो जायेगा और domain authority भी हाई हो जायेगा. इससे नए आर्टिकल से पुराने आर्टिकल पर भी विजिटर जायेंगे. जिससे बाउंस रेट कम हो जायेगा. और आर्टिकल पर ज्यादा विजिटर आने लगेंगे.

  • अपने ब्लॉग के टॉपिक से सम्बंधित दूसरी ब्लॉग पर कमेंट करें. और वहा से do follow backlinks प्राप्त करे. इससे वेबसाइट की ट्रैफिक तो बढाती ही है साथ में इसकी domain authority भी बढती है. दो  तीन फोरम भी ज्वाइन करें और वहा पर भी अपने ब्लॉग के बारे में लोगो को बताये और उनकी समस्याओ को हाल करें. वहा से भी ट्रैफिक आप की वेबसाइट पर आणि शुरू ही जाएँगी.
  • अपने ब्लॉग के टॉपिक से सम्बंधित दूसरी ब्लॉग पर गेस्ट पोस्ट लिखे और उस वेबसाइट से dofollow backlinks पा सकते है. लेकिन गेस्ट पोस्ट लिखने से पहले उस वेबसाइट का  domain authority और page authority को जरुर चेक कर ले. low DA वाली साईट पर कभी भी गेस्ट पोस्ट न लिखे.

Conclusion

कुल मिलकर यह कहा जा सकता है की यदि आप अपने ब्लॉग के लिए अच्छी quality का backlinks बनाते है और अपने आर्टिकल को social media पर शेयर करते है और इसके साथ साथ यदि आप अन्य ब्लॉग पर कमेंट भी करते है तो आपके ब्लॉग की domain authority को बढ़ने लगती है.
यदि आपके ब्लॉग की domain authority 100 नहीं है तो चिंता मत कीजिये क्योकि बहुत काम ही ऐसी वेबसाइट है जिनका domain authority 100 है जैसे google.com.
मुझे उम्मीद है की आज का यह आर्टिकल Domain Authority kya hota hai aur isase kya fayda hai? आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. इसे आप अपने मित्रो के साथ social media facebook, twitter पर जरुर शेयर करें.

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मंगलवार, 15 अगस्त 2017

Mobile Phone Sensor aur Unake Kaam kya hai?

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Smart-Mobile-Phone-Sensor
दोस्तों हम सभी mobile phone इस्तेमाल करते है, और internet पर जब किसी भी मोबाइल का configuration चेक करते है तो उसमे phone कंपनी द्वारा बताया गया होता है की इस phone में फलां फलां sensor है. क्या आपने कभी सोचा है की यश smartphone sensor kya hai? और  इन sensor का smartphone में क्या काम है? आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आप लोगो को बताएँगे की smartphone sensors kya hai aur inka kaam kya hai?
विंडोज run कमांड software को start करने का आसान  रास्ता
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एंड्राइड मोबाइल के 50 सीक्रेट कोड

SmartPhone Sensors kya hota hai? or Mobile Phone Sensors Kya Hota hai?

दरअसल  mobile phone sensors इसके नाक, कान और आँख की तरह होते है और इसी दे द्वारा यह smartphone यूजर के इनपुट की भाप लेता है और उसी के अनुसार आउटपुट देता है.
चुकी mobile phone या smartphone एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है. और यह यूजर के सभी एक्टिविटी को ओब्सेर्व करके उसके अनुसार यूजर को आउटपुट देता है.


Kaun se Sensor SmartPhone me Use Hote hai?

#BSI Sensor

BSI सेंसर या back iluminited sensor एक डिजिटल इमेज सेंसर है जो फोटो क्वालिटी को बेहतर बनाता है. इस सेंसर के द्वारा  ही खींची जा रही फोटो में बेहतर लाइट आती है और कम लाइट की कंडीशन में भी बेहतर क्वालिटी मिलती है। आसान शब्दों में कहें तो फोटो में कितनी ब्राइटनेस होगी, इसे BSI सेंसर कंट्रोल करता है।

#Accelerometer

Mobile Phone का स्क्रीन landscape या पोर्टेट इसी सेंसर का इस्तेमाल करके होता है.  मोबाइल को हम जिस भी दिशा में घुमाते हैं, ठीक उसी दिशा में मोबाइल की स्क्रीन भी घुम जाती है. मोबाइल में 'Auto rotate' सेटिंग इसी सेंसर पर काम करती है. इसका इस्तेमाल image rotation के लिए भी किया जाता है.

#Proximity Sensor

यह मोबाइल में front camera के पास लगा होता है. यह सेंसर फ़ोन और उसके सामने की वस्तु के बीच की दुरी की पहचान करता है. फ़ोन कॉल के दौरान कई बार कान मोबाइल के टच स्क्रीन को छू लेता है तो उस स्थिति में कई बार फ़ोन कट जाता है या कोई अन्य एप्प ओपन हो जाता है. ऐसी स्थिति से बचने के इस सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है.

#Light ambient sensor

यह सेंसर भी फ़ोन के front पर लगा होता है इस सेंसर से फ़ोन स्क्रीन के ब्राइटनेस को आटोमेटिक एडजस्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जब मोबाइल के ब्राइटनेस को ऑटोमेटिक मोड में सेट कर दिया जाता है तो यह फ़ोन यूजर के वातावरण के लाइट के हिसाब से मोबाइल का ब्राइटनेस को एडजस्ट कर देता है.

#Gyroscope or Gyro Sensor

यह Accelerometer सेंसर का एडवांस वर्शन है, और यह मोबाइल के हलके से मूवमेंट को भी बड़ी ही आसानी से ट्रेस कर लेता है. इसका इस्तेमाल मोबाइल गेम खेलने में किया जाता है। जब हम रेसिंग वाला गेम खेलते हैं और कार को दाएं या बाएं मोड़ने के लिए मोबाइल फोन को भी दाएं या बाएं घुमाते हैं तब यह इसी सेंसर की वजह से होता है. इसका उपयोग 360 photo में भी होता है.

#Magnetometer Sensor

यह Compass का काम करता है. और इसी sensor के द्वारा map में किसी जगह का पता लगाया जाता है और नार्थ और साउथ का पता लगता है. यह सेंसर मेटल डिटेक्टर का भी काम करता है.

#Barometer Sensor

इसका प्रयोग करके जीपीएस में एक्यूरेट लोकेशन का पता लगाया  जाता है. और इसकी मदद से आप अपनी समुद्र तल से उचाई का भी पता कर सकते है, और इसकी सहायता से atmosphere pressure को भी माप सकते है.

#Fingerprint sensor

इस समय का यह सबसे लोकप्रिय सेंसर है. इसका इस्तेमाल फ़ोन को ज्यादा सिक्योर बनाने की लिए किया गया है. इससे  फ़ोन को lock/Unlock किया जाता है. फिंगरप्रिंट को स्कैन करके यह उसे फ़ोन के लिए एक पासवर्ड की तरह से इस्तेमाल करता है.
fingerprint sensor kya hai?

Conclusion

यह सभी smartphone sensor जरुरी नहीं की एक ही फ़ोन में मिल जाये. यह मोबाइल फ़ोन कंपनी के ऊपर निर्भर करता है की कौन सा सेंसर किस मॉडल के फ़ोन के साथ दे रहा है. फिर भी हमें यह जानकारी होनी चाहिए की mobile में कौन सा sensor क्या काम करता है.
हमें उम्मीद है की आज का यह आर्टिकल Mobile Phone Sensor aur Unake Kaam kya hai? आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. इसे आप अपने मित्रो के साथ facebook, twitter और अन्य सोशल मीडिया पर इसे जरुर शेयर करें. यदि कोई सुझाव या शिकायत हो तो आप कमेंट box के जरिये हमें जरुर बताएं.
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रविवार, 13 अगस्त 2017

USB kya hai? Universal Serial Bus

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USB
दोस्तों आप सब USB (Universal Serial Bus) का नाम हो जरुर सुने होंगे और युएसबी केबल का इस्तेमाल भी करते होंगे. लेकिन क्या आप जानते है की जो उसब केबल आप इस्तेमाल कर रहे है वो कौन सी टाइप की है, और उसकी स्पीड क्या है? आज हम आप लोगो को बताएँगे की USB Type A, USB Type B, USB Type C kya hota hai. और  USB 1.0, USB 2.0 aur USB 3.0 Kya hai. साथ में यह भी बताएँगे की युएसबी कनेक्टर अलग अलग क्यों होते है.

USB kya hota hai?

USB का पूरा नाम Universal Serial Bus है. और इसका आविष्कार Ajay V. Bhatt ने 1994 में किया था. यह उस समय Intel corporation में कार्यरत थे.
सन 1998 में सबसे पहले Apple ने अपने कंप्यूटर iMac G3 से सीरियल और पैरेलल पोर्ट को हटा दिया और उसकी जगह युएसबी  पोर्ट को लगा दिया. उस समय का यह पहला कंप्यूटर था जिसमे युएसबी की सुविधा थी.
यह एक डिजिटल इक्विपमेंट के बिच डाटा ट्रान्सफर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसकी मदद से कंप्यूटर, मोबाइल, पेन ड्राइव, या कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर आदि को आपस में जोड़ा जाता है, जिससे डाटा का आदान प्रदान आसानी से किया जा सके.


USB Version kya hota hai?

Universal serial Bus को उनके विकास और स्पीड के आधार पर निम्न वर्शन में बांटा गया है.

युएसबी 1.0

यह January 1996 में रिलीज़ किया गया यह युएसबी का पहला वर्शन था और इसका डाटा ट्रान्सफर की स्पीड 12Mbps होती है. चुकी इसकी स्पीड बहुत ही कम होती है इसलिए आज के समय में इसका इस्तेमाल नहीं होता है.

युएसबी 2.0

इसे High Speed युएसबी भी कहते है. इसकी अधिकतर डाटा ट्रान्सफर कि स्पीड  480Mbps (Megabit per second) होता है. इसलो माइक्रोसॉफ्ट, कॉम्पैक, इंटेल ने मिल कर डेवेलोप किया था.

युएसबी 3.0

इसको SuperSpeed युएसबीके नाम से भी जाना जाता है. इसकी डाटा ट्रान्सफरकी स्पीड 5 Gbps होती है. युएसबी 2.0 को ही इम्प्रूव करके ही इसे बनाया गया है. इसमे सेंडिंग और रिसीविंग के लिए अलग अलग पाथ दिए गए होते है.

युएसबी 3.1

इसको SuperSpeed+ युएसबी के नाम से भी जाना जाता है. इसकी डाटा ट्रान्सफरकी स्पीड 10 Gbps होती है. युएसबी 3.0 को ही इम्प्रूव करके  इसे बनाया गया है.

युएसबी 3.2

इस प्रकार के युएसबी में डाटा ट्रान्सफर की रेट सब से ज्यादा लगभग 20 Gbps होती है. और इसमे डाटा का ट्रान्सफर करने के लिए ज्यादा पिंस और वायर लगे होते है. इसका मतलब यह एक साथ बहुत ज्यादा डाटा को ट्रान्सफर कर सकते है.
और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है की यह युएसबी Type C में मिलेगा मतलब यह की इसको पोर्ट में लगाते वक्त यह नहीं देखना पड़ेगा की यह सीधा है या उल्टा है. इसको किसी भी तरह से पोर्ट में प्लग किया जा सकता है.

USB connector kitne prakaar ke hote hai? or Connector ke aadhar par USB ke prakaar.

connector के हिसाब से देखा जाये तो यह मुख्यत: 3 प्रकार के होते है.

युएसबी Type A

सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला युएसबी Type A ही है. माउस, कीबोर्ड, पेन ड्राइव आदि इस तरह के इक्विपमेंट में इसका इस्तेमाल किया जाता है.

युएसबी Type B

इस तरह के युएसबी का इस्तेमाल अक्सर प्रिंटर में देखा जाता है. प्रिंटर में जो युएसबी जो प्लग किया जाता है वो Type  B प्रकार का होता है. आज कल मोबाइल में जो मिनी युएसबी का इस्तेमाल हो रहा है वह भी Type B प्रकार का होता है.

युएसबी Type C

इस तरह के कनेक्टर  का इस्तेमाल अभी बहुत ज्यादा नहीं हो रहा है लेकिन भविष्य में यही सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जायेगा. इसको दोनों तरफ से यूज़ किया जा सकता है. यह अभी युएसबी 3.2 में आता है.

Mini and Micro USB Connector kya hote hai?

Mini USB Connector

आज के समय में जो कनेक्टर मोबाइल में चार्जिंग और डाटा ट्रान्सफर के लिए इस्तेमाल हो रहा है वह Mini USB Connector के नाम से जाना जाता है. यह Type B प्रकार का होता है.
ज़े में बहुत छोटा होने के कारन इसे मिनी युएसबी के नाम से जानते है.

Micro USB Connector

पुराने डिजिटल कैमरा में जो कनेक्टर इस्तेमाल होता था, और कुछ मोबाइल कंपनी भी इस प्रकार के कनेक्टर को अपने मोबाइल में देती थी. यह देखने में मिनी कनेक्टर की तरह ही दिखाती है लेकिन साइज़ में थोड़ी बड़ी होता है और यह Type A प्रकार का होता है.

Conclusion

USB के वर्शन और टाइप दोनों अलग अलग है. जैसे USB Type C वर्शन 2.0 और 3.0 में भी आ सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है की कंपनी किस Type के साथ कौन सा वर्शन इस्तेमाल करना चाहती है.
मुझे उम्मीद है की आज का यह आर्टिकल USB kya hai? Universal Serial Bus आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा.और अब आप यह अच्छी तरह से जान गए होंगे की Mini and Micro USB Connector kya hote hai?  यदि यह पोस्ट आप लोगो को पसंद आया हो तो इसे आप facebook, twitter पर अपने मित्रो के साथ जरुर शेयर करें.
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शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

HashTag Kya Hai aur ise social media par kaise use karen?

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HashTag
दोस्तों आप लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते होंगे और इन पर अपने post भी करते होंगे और दुसरे के post भी देखते होंगे. लेकिन इन post में आप # इस सिंबल का यूज़ भी देखे होंगे. आखिर यह सिम्बल का इस्तेमाल अपने पोस्ट में क्यों किया जाता है? इससे क्या फायदा है? यदि इसके इस्तेमाल से कोई फायदा है तो वह क्या है? और सबसे बड़ी बात की इसका इस्तेमाल क्यों और कैसे करे? तो आज हम आप को इसी # सिंबल जिसे सोशल मीडिया में hashtag के नाम से जाना जाता है. उसके बारे में बताएँगे.
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बुधवार, 9 अगस्त 2017

Sim (Subscriber Identity Module) Card Cloning Kya Hai?

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SIM
दोस्तों आज के इस समय में सभी लोगो के पास मोबाइल है. शायद ही कोई ऐसा होगा जिसके पास मोबाइल नहीं होगा. भारत में इस समय लगभग  90 प्रतिशत लोगो के पास smartphone है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की फ़ोन में SIM ना हो तो क्या होगा. आखिर यह SIM card kya hota hai? और यह काम कैसे करता है.  क्या आप बिना SIM के भी कॉल कर सकते है? आज हम आप लोगो को इसी SIM card के विषय में बताएँगे. तो चलिए सबसे पहले यह जान लेते है की यह SIM card क्या होता है?
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SIM Card kya hota hai? yah kaise kaam karta hai?

दरअसल Subscriber Identity Module को शोर्ट में SIM कहते है. यह एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक chip होती है, जिसे मोबाइल में इन्सर्ट करने पर मोबाइल  GSM नेटवर्क से कनेक्ट हो सकने में सक्षम हो जाता है. अब यह sim जिस कंपनी के द्वारा प्रोवाइड किया गया  होता है यह उस कंपनी के ही नेटवर्क से कनेक्ट होता है, और यह उस कंपनी के सबसे नजदीकी टावर में अपने आइडेंटिटी को डिस्प्ले करता है.
प्रत्येक SIM में एक IMSI (International Mobile Subscriber Identity) नंबर स्टोर होता है जो 64 बिट का होता है. और इसके साथ एक authentication Key होता है. अब जैसे ही सिम को हम मोबाइल में लगाकर उसे ऑन करते है तो वह नजदीकी मोबाइल टावर को IMSI नंबर को भेजता है. चुकी मोबाइल टावर मव पहले से ही सभी IMSI नंबर और authentication Key  की लिस्ट मौजूद होती है. अब टावर एक रैंडम नंबर को सेलेक्ट करके authentication Key  की मदद से एक नया नंबर generate करता है और उसी रैंडम नंबर को  मोबाइल को भेज देता है.

अब उस  रैंडम  नंबर के द्वारा सिम ऑथेंटिकेशन key की मदद से एक नया नंबर generate करता है. अब टावर के द्वारा generate किया गया नंबर और आपके मोबाइल सिम के द्वारा generate किया गया नंबर जब same होता है तो आप उस particular प्रोवाइडर की सर्विसेज को इस्तेमाल कर पाते है.
आप sim card के ऊपर एक लम्बा सा नंबर लिखा हुआ देखते होंगे यह ICCID (Intigrated Circuit Card Identity) Sim card को identify करता है. यदि आप देश के बहार कही भी जाते है तो यह पता लगता है की यह एक वैलिड सिम कार्ड है.

SIM Card ka kya kaam hai?


  1. यह सबसे पहले IMSI (International Mobile Subscriber Identity) number के द्वारा सब्सक्राइबर की पहचान करता है. और प्रतेक IMSI नंबर को एक मोबाइल नंबर पर map किया जाता है. ताकि ग्राहक की पहचान हो सके.
  2. IMSI नंबर के द्वारा यह sure किया जाता है की ग्राहक ने नेटवर्क पर लीगल तरीके से लॉग इन किया है. और यह अब इस कंपनी के सभी सेवाओ का लाभ ले सकता है.
  3. इसमे मोबाइल नंबर और SMS को भी स्टोर किया जा सकता है.

SIM card kitne prakar ke hote hai?

साइज़ के आधार पर 3 प्रकार के होते है

  1. Mini
  2. Micro
  3. Nano

Network  के आधार पर 4 प्रकार के होते है.

  1. 2g
  2. 3g
  3. 4g
  4. LTE
अधिक जानने के लिए लिंक पर क्लिक करे - 2G vs 3G vs 4G vs VoLTE vs LTE

Technology के आधार पर 2 प्रकार के होते है.

1- GSM

इसे Bell laboratories के द्वारा सन 1970 में बनाया गया था. इसका पूरा नाम Global System for Mobile होता है. यह 800 MHz से लेकर 1.2 Ghz तक काम करता है. यह सिम  Time division access multiplexing के narrow band transmission तकनीक पर काम करती है. इसमे डाटा transfer की rate 16 Kbps से लेकर 120 Kbps तक होती है.यह prepaid और postpaid दोनों तरह के हो सकते है.

2- CDMA

इसका पूरा नाम Code Division Multiple Access  है. यह Communication spread spectrum तकनीक का इस्तेमाल करती है. और यह GSM हैंडसेट में सपोर्ट नहीं करते है. यह भी prepaid और  postpaid दोनों तरह के हो सकते है.

पेमेंट system के आधार पर 2 प्रकार के होते है

1- Prepaid

जिस प्रकार के सिम में बात करने के लिए पहले रिचार्ज करना पडता है और बात करने के बाद इसी बैलेंस में से पैसा कट जाता है prepaid सिम कहलाता है.और जितना बैलेंस होता है आप उतना ही बात कर सकते है. बैलेंस ख़तम हो जाने पर आप बात नहीं कर सकते है. यह ठीक उसी प्रकार से जैसे atm या debit card.

2- PostPaid

इस प्रकार के सिम card में प्लान के हिसाब से हर महीने बिल आता है और उसको paid करना पड़ता है.इसमे आप जितनी चाहे बात कर सकते है, इसमे बैलेंस का चिंता नहीं होता है. महीने के लास्ट में बिल के द्वारा उसका पेमेंट किया जाता है. यह ठीक उसी प्रकार से है जैसे credit card.

e-sim kya hota hai?

चुकी भविष्य में हम e sim को ही इस्तेमाल करेंगे क्योकि यह सिम कार्ड कुछ बड़ा काम नहीं करता है. यह सिर्फ कुछ इनफार्मेशन को स्टोर करके रखता है और ऑथेंटिकेशन का काम करता है, आप इस particular प्रोवाइडर की इस सर्विस को इस्तेमाल कर रहे है.
कम्पनीज इस e सिम में कुछ ऐसा सोच रही है की सेटिंग को मोबाइल में ही download करके सेव कर लिया जाये और ऑथेंटिकेशन का काम वही से हो जाये. जैसे मान लीजिये की आप vodafone की सर्विस का इस्तेमाल करना चाह रहे है तो उसकी सेटिंग अपने फ़ोन में सेव कीजिये और यह सर्विस प्रोवाइडर आप को authenticate कर देंगे और आप उसका  इस्तेमाल कर सकेंगे. यदि आप प्रोवाइडर change करते है तो आप उसकी सेटिंग सेव कर लीजिये.

Sim Card Cloning Kya Hai?

एक ही नंबर को दो सिम पर एक्टिवेट करना सिम क्लोनिंग कहलाता है. चुकी इंडिया में सिम क्लोनिंग लीगल नहीं है. और आप इसे नहीं कर सकते है. लेकिन कुछ देशो में सिम क्लोंनिंग की सुविधा सर्विस प्रोवाइडर खुद देते है कैसे मान लीजिये की आप एक ही नंबर को अपने फ़ोन , टेबलेट और मॉडेम में यूज़ करना चाहते है तो सर्विस प्रोवाइडर कंपनी एक ही नंबर पर मल्टीप्ल सिम प्रोवाइड करते है, ताकि आप बड़ी ही आसानी से उसे इस्तेमाल कर सके. लेकिन भारत में आप ऐसा नहीं कर सकते है.
सिम की क्लोंनिंग करने के लिए बहुत से software internet पर मौजूद है. इन सॉफ्टवेयर और सिम रीडर के द्वारा आप सिम के ऑथेंटिकेशन key और IMSI इनफार्मेशन को लेकर एक दुसरे ब्लेंक सिम में दाल कर क्लोन कर सकते है यह बहुत ही आसान है लेकिन सर्विस प्रोवाइडर company इसे तत्काल पकड़ लेगी और वह आपके सिम को बंद कर देगी.

Conclusion

हमने कोशिश किया है की आप लोगो को SIM card के जुडी हर जानकारी को डिटेल में बताउ अब इसमे कहाँ तक सफल हुआ हूँ यह बात आप लोग ही बता पाएंगे. मुझे उम्मीद है की आप लोगो को SIM (Subscriber Identity Module) kya hai? aur isaki cloning kaise ki jati hai? जरुर पसंद आया होगा. यदि कोई सुझाव या सिकायत हो तो आप निचे कमेंट के जरिये हमें जरुर बताये. और इसे facebook, twitter पर अपने मित्रो के साथ शेयर करना ना भूले.
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सोमवार, 7 अगस्त 2017

PCB kya hota hai? Printed Circuit Boards

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दोस्तों क्या आप ने कभी सोचा है की आज के समय में सभी इलेक्ट्रॉनिक सामान पतले और छोटे कैसे होते जा रहे है. आखिर इनके पीछे किसका हाथ है? कैसे यह इतने छोटे होते जा रहे है? आज हम इसी के बारे में आप लोगो को बताएँगे की कैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान पतले होते जा रहे है? दरअसल इनके पीछे हो ही कारण है पहला है सभी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स छोटे होते जा रहे है और दूसरा है printed circuit boards क्योकि यह जितने छोटे होंगे हमारे सभी इलेक्ट्रॉनिक सामान भी छोटे होते जायेंगे. आज हम इसी PCB (Printed Circuit Boards) के बारे में आप लोगो को बताएँगे.

PCB kya hai?

पीसीबी  का अविष्कार सन 1980 में आस्ट्रिया के इंजिनियर पाल एस्लर ने अपने इंग्लैंड में काम करने के दौरान किया था.
PCB का पूरा नाम Printed Circuit Boards है. यह एक पतला बोर्ड होता होता है.जो core फाइबर का बना होता है. जिसपर कॉपर की कोटिंग की जाती है. उसके बाद जो भी circuit उस पर बनाना होता है, उसका कंप्यूटर से एक मास्क बनाया जाता है. फिर केमिकल प्रोसेस के द्वारा उसे वाश आउट करते है. फिर उस पर लगे एक्स्ट्रा कॉपर को हटा देते है जिसे इच कहते है. अब सिर्फ बोर्ड पर वही कॉपर बचे हुए है जो कॉम्पोनेन्ट को जड़ने का काम करते है. और इस पर circuit के कॉम्पोनेन्ट को लगाने के लिए छेद बने होते है. और एक कॉम्पोनेन्ट को दुसरे कॉम्पोनेन्ट से जोड़ने के लिए कॉपर के ट्रैक बने होते है.
जितने भी इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे laptop मोबाइल, डेस्कटॉप, LEDBulb, Monitor इन सभी को बनाने में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को इसी PCB या printed circuit boards पर एक दुसरे से कनेक्ट किया जाता है.
आप जब भी किसी पीसीबी को देखते होंगे तो जरुर सोचते होंगे की दो कॉम्पोनेन्ट को जोड़ने के लिए आखिर क्यों टेड़े मेढे वायर क्यों घुमाये गए होते है. चलिए हम अब आपको बता देते है की यह ऐसा क्यों होता है.


PCB par wire ki design tedha medha kyo hota hai? or PCB me Length match kya hota hai?

PCB पर दो कॉम्पोनेन्ट को जोड़ने के लिए सीधे वायर को न बना कर उसे टेढ़ा मेढ़ा बना कर जोड़ा जाता है. इसका कारण यह है की मान लीजिये कोई ऐसा कॉम्पोनेन्ट है जिसे 4 इनपुट पिन्स मिल रहे है. और यह चारो अलग अलग सोर्स से आ रहे है. अब यहाँ यह देखना होता है की यह सिग्नल सही टाइम पर अपने डेस्टिनेशन तक पहुचें. कही ऐसा न हो की यह आगे पीछे पहुचे. यदि यह सिग्नल सही समय पर नहीं पहुचेंगे तो आउटपुट रिजल्ट बदल सकता है.
इसमे यह देखना होता है की वायर की लेंथ same हो. इसके बाद जो दूसरी चीज़ होती है जिसे देखना होता है वह है उनकी थिकनेस . असल  में हमें अलग अलग level का करंट काम में लेना होता है. उस करंट के हिसाब से ही वायर की थिकनेस को रखा किया जाता है. ताकि वह करंट को सही ढंग से प्रवाहित कर सके. इसी को हम PCB में Length match के नाम से जानते है
लेकिन यदि आप ने PCB के लेआउट पर ध्यान दिए होंगे तो आप देखे होंगे की इन सभी  में से कोई भी 90 डिग्री के एंगल पर नहीं मुड़ा होगा. क्योकि इस तरह के design में दिक्कत होती है और दुसरे बात यह है की 90 डिग्री के एंगल पर मुड़े ट्रैक उखड सकते है.
इसीलिए सभी PCB 45 डिग्री के एंगल पर मुड़े होते है. और यह हमें यह सुविधा भी देता है की कम से कम एरिया में जो वायर ट्रैक है उन्हें अच्छे से अरेंज कर पाएंगे.

PCB kitane prakar ke hote hai?

PCB ke prakar

  1. Singal layer
  2. Dual layer
  3. Multi layer

Singal layer

इस प्रकार के PCB में कॉपर के बने ट्रैक सिर्फ एक ही तरह होते है. इनका इस्तेमाल रेडिओ, पुराने टेलीविज़न, पुराने मॉनिटर, और इस समय आने वाले LED बल्ब में होता है.

Dual layer

कुछ ऐसे पीसीबी या printed circuit boards होते है, जिनके दोनों तरफ लेआउट होते है. इस प्रकार के पीसीबी को Dual layer PCB कहते है.

Multi layer

इस प्रकार के पीसीबी में दो से ज्यादा layer होते है. और इन्हें एक दुसरे के ऊपर स्टैग करके बनाया गया होता है इस प्रकार के PCB का इस्तेमाल हमारे कंप्यूटर के motherboard, ram स्टिक, laptop के motherboard, या मोबाइल फ़ोन के motherboard और ram में इस्तेमाल किया जाता है.
multi layer PCB इस लिए design किये गए है ताकि एक बहुत ही छोटे space में बहुत ज्यादा circuit को लगा सके. और हमारे सामान की design छोटी रह सके.

Conclusion

पुराने पीसीबी पर हम कॉम्पोनेन्ट को उनके वायर के साथ सोल्डरिंग आयरन से सोल्ड करते थे. लेकिन अब हम इस तरीके का इस्तेमाल नहीं करते है. अब हम SMD (Surface Mounted Device) के द्वारा बिना किसी एक्स्ट्रा वायर के भी कॉम्पोनेन्ट को बोर्ड के ऊपर चिपका देते है.
हम कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान का इस्तेमाल करें अगर उसे ओपन करके देखे तो उसमे जरुर PCB (Printed Circuit Boards) लगा होता है. भले ही वह एक 50 रुपये का रिमोट ही क्यों ना हो.  मुझे उम्मीद है की आज का यह पोस्ट PCB kya hota hai? Printed Circuit Boards आप लोगो को जरुर पसंद आया होगा. आप इसे अपने मित्रो के साथ facebook और twitter पर शेयर करना ना भूले. यदि इस आर्टिकल से जुडी कोई सुझाव या सिकायत हो तो आप कमेंट box के जरिये हमें जरुर बताएं.हमें ख़ुशी होगी.
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शनिवार, 5 अगस्त 2017

UV Rays/ UV Light kya hai aur isase kya fayda hai?

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दोस्तों आप UV (Ultra Violet) Rays के बारे में जरुर सुने होंगे. लेकिन क्या आप जानते है की  UV Rays kya hai aur kya hai isake fayde? यदि जानते है तो ठीक ही है, यदि नही जानते है तो आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आप लोगो को बताने का प्रयाश करेंगे की यह क्या है और यह हम लोगो के लिए हानिकारक है यह लाभदायक है.
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शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

YouTube ko Screen Recorder ki Tarah Kaise Use Kare?

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दोस्तों यदि आप कंप्यूटर इस्तेमाल करते होंगे तो आपको स्क्रीन रिकॉर्ड करने के लिए किसी सॉफ्टवेयर की जरुरत होती होगी. लेकिन आज हम बताएँगे की कैसे आप बिना किसी सॉफ्टवेयर के अपने कंप्यूटर के स्क्रीन को रिकॉर्ड कर सकते है वही भी बड़ी ही आसानी से. हम आप को बताएँगे की YouTube ko Screen Recorder ki Tarah Kaise Use Kare?
youtube के इस ट्रिक के द्वारा बनाया गया विडियो आपके youtube अकाउंट के विडियो में ऑटो सेव भी हो जाता है. और यदि इसे आप  youtube पर एडिट  करना चाहते हो तो उसे भी बड़ी ही आसानी से कर सकते है. आप अपने कंप्यूटर के स्क्रीन को रिकॉर्ड करने के लिए किसी भी सॉफ्टवेयर की जरुरत नहीं होगी. आप  इसे सिर्फ youtube से ही कर सकते है.
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गुरुवार, 3 अगस्त 2017

Plastic money ke security feature kya hai?

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दोस्तों पिछले आर्टिकल में मैंने आप लोगो को बताया था की plastic money kya hai? लेकिन आज मैं, plastic money के कुछ security फीचर के बारे में बताऊंगा जो आपके लिए काफी उपयोगी साबित होंगे और उन्हें जानकर आप अपने plastic money के फ्रॉड transaction को रोक सकते है और अपने plastic money को सुरक्षित रख सकते है.  तो चलिए अब हम आपको बताते  है की Plastic Money me kaun kaun se security feature hai?  जिन्हें जानना आपके लिए अति आवश्यक है.
इसके साथ हम आप को यह भी बताएँगे की इसको इस्तेमाल करने में क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
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बुधवार, 2 अगस्त 2017

Plastic Money Kya hai aur isase kya fayda hai?

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दोस्तों क्या आप जानते है की Plastic Money Kya hai aur isase kya fayda hai? आप भी खरीददारी के लिये या अक्सर लेन देन  में आप सभी कैश का ही इस्तेमाल करते होंगे लेकिन नोट बंदी के बाद सभी लोग कैशलेस पेमेंट की तरफ   अपना रुख किये ताकि नोट बंदी के बाद भी किसी प्रकार की पैसे के लें दें या शॉपिंग में कोई दिक्कत ना हो.
जब नोट बंदी हुआ उस समय सरकार ने खुद digital payment को बढ़ावा दिया ताकि इस देश के लोग कैशलेस भुगतान करें. अब यह digital payment या कैशलेस भुगतान को हम अपने plastic money से कर सकते है. अब यह सवाल उठता है की यह plastic money kya hota hai?
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